{"_id":"95bb7cebcb4fd5a7db3d193df89073a5","slug":"capital-in-issue-on-stage-agitator","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकार की 'उपेक्षा' से आंदोलनकारी खफा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरकार की 'उपेक्षा' से आंदोलनकारी खफा
अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 19 Nov 2013 07:46 AM IST
विज्ञापन
उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों की उपेक्षा से नाराज आंदोलकारी संगठन अब एक मंच में आने को तैयार हो रहे हैं। राज्य की स्थाई राजधानी गैरसैंण बनाए जाने सहित छह मुद्दों पर सोमवार को सभी संगठनों की पंचायत हुई।
विज्ञापन
जिसमें 19 नवंबर को रायपुर में विधानसभा भवन के शिलान्यास कार्यक्रम के विरोध के साथ राजधानी का आंदोलन शुरू करने पर सहमति बनाई गई।
शहीद स्मारक में हुई बैठक
कचहरी स्थित शहीद स्मारक में सोमवार को राज्य आंदोलनकारी संगठनों की संयुक्त पंचायत हुई। शहीद स्मारक में 10 दिन से आमरण अनशन पर बैठे आंदोलनकारियों की सुध नहीं लेने पर उपस्थित सदस्यों ने नाराजगी जताई।
विज्ञापन
आंदोलकारियों ने कहा कि सरकार की इस बेरुखी के कारण ही आज अपने हक के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है। वक्ताओं ने कहा कि सरकार दो-दो जगह विधानसभा भवन का शिलान्यास कर रही है, लेकिन स्थाई राजधानी का मुद्दा आज भी सुलझा नहीं है।
विज्ञापन
राजधानी घोषित करने की मांग
उन्होंने पहले राजधानी घोषित करने की मांग की, जिसके बाद शिलान्यास की। परिचय प्राप्त सभी राज्य आंदोलनकारियों को एक समान पेंशन, राज्य निर्माण सेनानी का दर्जा और सरकारी नौकरी में 10 फीसदी आरक्षण पर लगी रोक हटाने की बात कही। वहीं आंदोलनकारी कुलदीप नेगी को षडयंत्र के तहत फंसाने की सीबाआई जांच कराने की मांग की। साथ ही राज्य आंदोलन के दौरान आंदोलनकारियों पर लगे मुकदमे वापस करने की मांग उठाई गई।
पंचायत में प्रदीप कुकरेती, नंदन सिंह रावत, रामलाल खंडूड़ी, विश्वंभर खखरियाल, सुदेश सिंह, प्रमिला रावत, रवींद्र प्रधान, वेदप्रकाश शर्मा आदि उपस्थित थे।