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Bird Flu : बर्ड फ्लू के मामले में अन्य राज्यों की तुलना में ज्यादा सुरक्षित है उत्तराखंड

Fri, 08 Jan 2021 04:06 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal अनिल चन्दोला, अमर उजाला, देहरादून
अनिल चन्दोला, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 08 Jan 2021 04:06 PM IST
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bird flu in uttarakhand news : uttarakhand safe from other states
- फोटो : अमर उजाला (File Photo)

पूरे देश में भले ही लगातार बर्ड फ्लू के मामले बढ़ रहे हैं, लेकिन उत्तराखंड अब तक इससे पूरी तरह अछूता है। राज्य में इस साल अब तक एक भी मामला सामने नहीं आया है। इससे पहले भी यह बीमारी बहुत ज्यादा नहीं फैली। यही कारण है कि वर्ष 2006 से आज तक कभी भी पक्षियों को कलिंग (बेहोश कर दफनाने) की नौबत नहीं आई। इससे यह भी माना जा सकता है कि अन्य राज्यों की तुलना में उत्तराखंड काफी सुरक्षित है। 

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इन दिनों पूरे देश में बर्ड फ्लू का खतरा है। बर्ड फ्लू का कोई उपचार भी नहीं है। इसलिए संक्रमित पक्षियों को बेहोश कर दफनाने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। इस प्रक्रिया को कलिंग कहा जाता है। दुनिया के हर हिस्से में संक्रमित पक्षियों को खत्म करने और इंफेक्शन की चेन तोड़ने के लिए कलिंग का सहारा लिया जाता है। मामले बढ़ने पर हर राज्य में फॉर्म के फॉर्म कलिंग कराते हैं। पोलट्री फॉर्म की सभी मुर्गियों को बेहोश करने के बाद बड़ा गड्ढ़ा खोदकर दफना दिया जाता है। उत्तराखंड में आज तक इसकी नौबत नहीं आई।  
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2006 में पहली बार बर्डफ्लू के मामलों में बहुत उछाल आया था, जब पूरी भारत में इस बीमारी का नाम सुना गया। बड़े पैमाने पर पक्षियों (विशेषकर मुर्गियों की) कलिंग की गई। बर्ड फ्लू पक्षियों से आदमियों में फैल सकता है। यही कारण है कि इसके इक्का-दुक्का मामले सामने आने के साथ एहतियातन उपाय भी किए जाते हैं। 
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प्रवासी पक्षियों से खतरा ज्यादा

उत्तराखंड आनेवाले प्रवासी पक्षियों से बर्ड फ्लू के फैलने का खतरा ज्यादा रहता है। राजधानी दून में आसन वेटलैंड, चीला बैराज में वन विभाग और पशुपालन की टीमें लगातार निरीक्षण कर रही हैं। किसी भी जगह अभी बहुत ज्यादा मामले सामने नहीं आए हैं। एक-दो कौए या अन्य पक्षियों के मरने की जानकारी सामने आ रही है। इनके सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। 

दूसरे राज्यों से मुर्गियां लाने पर रोक

दूसरे राज्यों से पक्षियां लाने पर रोक लगा दी गई है। जिले में कई बड़े पोलट्री फार्म हैं, जिनके पास 35 से 40 हजार तक मुर्गियां हैं। उपचार के रूप में टेमी फ्लू का विकल्प दिया गया है। हालांकि यह बहुत ज्यादा प्रभावी नहीं है। इसलिए बीमारी को रोकने पर फोकस किया जाता है।

पक्षियों की असामान्य मौत होने पर विशेषज्ञ टीम उनकी जांच कर सैंपल भोपाल लैब भेजते हैं। रिपोर्ट में बर्डफ्लू की पुष्टि होने के बाद पूरे फॉर्म की कलिंग करनी होती है। इससे बीमारी के फैलने का खतरा कम हो जाता है। उत्तराखंड के लिहाज से अच्छा यह रहा कि कभी कलिंग नहीं करनी पड़ी। बीमारी के दौरान चिकन व अंडों की बिक्री पर असर जरूर पड़ा।
-एसबी पांडे, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी

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