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Bharat Bandh: कृषि बिलों को वापस लेने की मांग को लेकर भारत बंद, पढ़ें उत्तराखंड में कैसा रहा असर

Tue, 08 Dec 2020 07:21 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Tue, 08 Dec 2020 07:21 PM IST
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bharat bandh in uttarakhand : state wide kisan band update
बंद का मिलाजुला असर - फोटो : amar ujala

कृषि बिलों को वापस लेने की मांग को लेकर उत्तराखंड में किसानों के बंद को समर्थन मिला। विभिन्न किसान संगठनों ने धरना दिया। कहीं ट्रैक्टर रैली निकाली गई तो कहीं किसान धरने पर बैठ गए। वहीं पुतला दहन भी किया गया। राजधानी देहरादून में कांग्रेस ने रैली निकालकर विरोध दर्ज कराया। बहरहाल राज्य में बंद का मिलाजुला असर देखने को मिला।

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देहरादून में भारत बंद को सफल बनाने के लिए कांग्रेसी सड़कों पर निकले

राजधानी देहरादून में भारत बंद को सफल बनाने के लिए कांग्रेसी सड़कों पर निकले। महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा के नेतृत्व में कांग्रेसियों ने पलटन बाजार में घूमकर व्यापारियों से सहयोग मांगा। दुकानें बंद करने की अपील की । इस दौरान उनके साथ भारी पुलिस फोर्स तैनात रही। किसान बंद के समर्थन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने रैली निकाली। घण्टाघर पर जाम लगाकर प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पुलिस ने गिरफ्तार किया।
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किसानों के भारत बंद आंदोलन में रैली, प्रदर्शन और सड़क जाम करने के मामले में कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह समेत 60-70 के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। इससे पहले उन्हें शांतिभंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इसमें कांग्रेस के कुल 34 नेताओं की गिरफ्तारी हुई थी। सभी को मजिस्ट्रेट के आदेश पर निजी मुचलकों पर रिहा कर दिया गया। 
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बंद का दून में आंशिक असर

नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के भारत बंद का दून में आंशिक असर रहा। लगभग सभी बाजार खुले रहे। केवल कुछ व्यापारियों ने समर्थन में सांकेतिक रूप से अपनी दुकानें बंद रही। कांग्रेस, भाकियू तोमर गुट, सपा, शिवसेना, ट्रेड यूनियन सहित विभिन्न संगठनों ने समर्थन में जगह-जगह प्रदर्शन, पुतला दहन किया। कांग्रेस ने घंटाघर जबकि भाकियू ने आशारोडी चैक पोस्ट पर जाम लगाने की कोशिश की, जिसे पुलिस ने सफल नहीं होने दिया। 

कृषि कानूनों के विरोध में किसानों के भारत बंद के चलते देहरादून से दिल्ली, यूपी, टनकपुर और हल्द्वानी की बस सेवा दोपहर ढाई बजे तक बंद रही। केवल लोकल और पर्वतीय रूटों के लिए ही बसें रवाना की गई। दोपहर बाद बाकी सभी जगहों के लिए बसें चलाई गई।  देश में कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठनों की ओर से बुलाए गए भारत बंद की वजह से देहरादून में भी करीब दो हजार ट्रकों के पहिये थमे रहे। 

कांग्रेसियों और व्यापारियों में नोंकझोंक

बंद को लेकर पलटन बाजार में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और व्यापारियों में नोंकझोंक हुई। पूर्व विधायक राजकुमार और कांग्रेस महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा के नेतृत्व में कार्यकर्ता पलटन बाजार पहुंचे। यहां दुकानें बंद करने को लेकर उनकी व्यापारियों से बहस हुई। कुछ कार्यकर्ता दुकान बंद करने के लिए जोर जबरदस्ती करने लगे। इस पर व्यापारी ने विरोध किया। राजकुमार और लालचंद शर्मा ने दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर शांत कराया।

किसानों के भारत बंद के समर्थन में शिव सेना ने शव यात्रा निकालकर केंद्र सरकार का पुतला दहन किया। इस दौरान शिव सैनिकों ने कहा कि केंद्र सरकार के नीतियों के खिलाफ आज अन्नदाता सड़कों पर है। कहा कि केंद्र सरकार अपनी हिटलर शाही और तानाशाही को छोड़ दें।
 

काली फीती बांधकर बैंककर्मियों का समर्थन

ऑल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन के आह्वान पर शहर के विभिन्न बैंकों में कर्मचारी भारत बंद का समर्थन कर रहे हैं। इसके लिए हाथों में काली फीती बांधकर कृषि कानूनों का विरोध किया जा रहा है।

हालांकि, बैंककर्मियों ने कार्य का बहिष्कार नहीं किया है। वहीं, उत्तरांचल बैंक इम्प्लाइज यूनियन के सदस्य भी किसान आंदोलन के समर्थन व कृषि कानूनों के विरोध में हाथों में काली फीती बांधकर कार्य कर रहे हैं।


हरिद्वार के देहात क्षेत्रों में दिखा भारत बंद का असर

भारत बंद के आह्वान पर शहर और देहात क्षेत्रों में किसानों ने सड़कों पर उतरकर चक्का जाम किया। कहीं ज्ञापन सौंपे तो कहीं पुतले जलाकर कृषि कानूनों का विरोध किया। वहीं बाजारों में इसका मिलाजुला असर देखने को मिला। व्यापारियों के समर्थन के चलते नारसन में बंद का पूरा असर रहा। कस्बे के अलावा आसपास के गांवों के बाजार भी बंद रहे।

खानपुर में भी अधिकांश दुकानें बंद रही। वहीं, लालढांग क्षेत्र में करीब 600 खनन कारोबारियों ने किसानों के आंदोलन के समर्थन में काम पूरी तरह से बंद रखा। तो रुड़की तहसील के अधिवक्ता भी कार्य विरत पर रहे। पथरी क्षेत्र के पदार्था में दुकानें बंद रहीं। हरिद्वार और रुड़की शहर में सभी बाजार खुले रहे। 

मंगलवार को भारत बंद के तहत किसानों का साथ देने उतरी कांग्रेस और इससे जुड़े संगठनों ने भी जिलेभर में प्रदर्शन कर केंद्र सरकार के पुतले फूंके। मंगलौर में किसानों के साथ आम आदमी पार्टी व भीम आर्मी के कार्यकर्ता भी पहुंचे और बंद का समर्थन किया। लक्सर, मंगलौर, नारसन, भगवानपुर में किसानों के प्रदर्शन से दोपहर करीब 12 बजे से दो बजे तक हाईवे जाम हो गया।

प्रशासन ने वाहनों का डायवर्ट कर यातायात सुचारु कराया। शाम करीब तीन बजे तक सभी किसान संगठन प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के बाद लौट गए। इसके के बाद सभी जगहों पर यातायात बहाल हो गया। इस दौरान भाकियू (टिकैत), भाकियू (तोमर), उत्तराखंड किसान मोर्चा, भारतीय किसान यूनियन रोड़ गुट, राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन सोसायटी के बैनर तले किसान नेताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर प्रदर्शन किया।

भारत बंद के चलते मंगलवार को हरिद्वार रोडवेज डिपो से चालीस फीसदी बसों का संचालन नहीं हुआ। बसें नहीं चलने से यात्रियों को कई घंटे तक फजीहत झेलनी पड़ी। शाम को चार बजे बाद कुछ बसों को दिल्ली के लिए भेजा गया।

किसानों ने गन्नों से लदे ट्रक लगाकर हाईवे जाम कर दिया

रुड़की में नारसन और लक्सर पुरकाजी में किसानों ने गन्नों से लदे ट्रक लगाकर हाईवे जाम कर दिया। पुलिस प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास कर रही है। वहीं लक्सर कृषि मंडी में किसान नहीं पहुंचे। खानपुर क्षेत्र के गोवर्धनपुर में बाजार बंद रहा। विधायक ममता राकेश के समर्थन में भगवानपुर में किसान यूनियन के लोगों ने पुतला दहन किया और बाजार बंद कराया। कलियर के बेड़पुर चौक पर विधायक फुरकान अहमद के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं  और किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया।

कुमाऊं में ऊधमसिंह नगर रहा बंद 

कुमाऊं में किसान बहुल इलाके ऊधमसिंह नगर जिले में कृषि कानूनों के विरोध भारत बंद का व्यापक असर नजर आया। उधर, पिथौरागढ़ में मिलाजुला असर देखने को मिला। व्यापार संगठन के बंद के समर्थन के बावजूद बाजार में अधिकतर लोगों ने दुकानें खोलीं। अन्य जिलों में बंद का कुछ खास असर देखने को नहीं मिला। कांग्रेस समेत कुछ अन्य राजनीतिक दलों ने बंद के समर्थन में धरना प्रदर्शन किया। ऊधमसिंह नगर में जिन्होंने दुकानें खोली थी व्यापारियों शांतिपूर्ण तरीके से उनकी दुकानें बंद करा दीं।

किसानों के आह्वान पर मंगलवार को भारत बंद के समर्थन का सबसे ज्यादा असर उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर में देखने को मिला। यहां भारत बंद के समर्थन में सुबह से ही सभी दुकानें बंद रखी गईं। मुख्य चौराहों पर पुलिस बल तैनात रहा। भारत बंद और किसान आंदोलन को रुद्रपुर के व्यापारियों, मजदूरों, सिख संगठन और पेट्रोलियम एसोसिएशन ने अपना समर्थन दिया है। 

साथ ही पेट्रोल पंप सुबह आठ बजे से शाम पांच बजे तक बंद रहेंगे। रुद्रपुर रोडवेज डिपो से दिल्ली के लिए बसें संचालित नहीं हुई। रुद्रपुर मुख्य बाजार में खुली कुछ दुकानों को व्यापारियों ने बंद कराया। काशीपुर में भारत बंद को लेकर मुख्य बाजार बंद रहा।

काशीपुर में किसान धरने पर बैठे और यहां सुरक्षा के लिए पुलिस फोर्स मौजूद है। रुद्रपुर में बाटा चौक में किसानों के समर्थन में कांग्रेसियों ने केंद्र सरकार का पुतला फूंका। बाजपुर में भारत बंद के आह्वान पर बाजार बंद कराया। यहां भी पुलिस तैनात है। जसपुर में भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले राष्ट्रीय राजमार्ग पर धरना प्रदर्शन कर मार्ग को जाम कर दिया। पुलिस प्रशासन ने यहां ट्रैफिक डायवर्ट कर दिया।

हल्द्वानी में बंद का मिलाजुला असर देखने को मिला। यहां ट्रांसपोर्ट की दुकानें बंद रहीं। पुरानी सब्जी मंडी खुली रही। पिथौरागढ़ में भारत बंद का मिलाजुला असर देखने को मिला। लोहाघाट, चंपावत में बाजार पूरी तरह खुला।

बातचीत से ही समाधान, जल्द भ्रम के बादल छंट जाएंगे : त्रिवेंद्र

कृषि कानूनों पर भारत बंद को लेकर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि केंद्र सरकार कानून वापस नहीं लेगी। अगर कोई सुधार की गुंजाइश है तो उसके लिए केंद्र ने बातचीत के दरवाजे खुले रखे हैं। देश के किसानों को मजबूत करना है तो पुराने कानूनों की तिलांजलि देनी पड़ेगी।

उन्होंने कहा कि हर समस्या का समाधान बातचीत से ही होगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि कांग्रेस व अन्य दलों ने जो कृषि कानूनों को लेकर भ्रम के बादल पैदा किए हैं, वह जल्द छंट जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड का किसान आंदोलन में शामिल नहीं है। कांग्रेस व अन्य राजनीतिक दल किसानों के कंधे पर बंदूक रखकर केंद्र सरकार पर निशाना साध रहे हैं।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक समझौतों का कोई कानूनी महत्व नहीं होता। यह विश्वास की बातें होती हैं। सरकार और किसानों का विश्वास बहुत जरूरी है। किसानों को सरकार की मंशा को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार किसानों की हितैषी है।

पिछले छह सालों में केंद्र सरकार ने किसानों के बजट को 12 हजार करोड़ रुपये से 1.34 लाख करोड़ तक बढ़ा दिया। किसानों की फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को डेढ़ गुना तक बढ़ाया। किसानों के मंडी के अलावा बाजार खोल दिए। किसानों के लिए तमाम तरह के विकल्प दिए गए हैं।

कृषि कानून में जो भी सुधार किए गए हैं, उन्हें कांग्रेस ने भी अपने घोषणा पत्र में शामिल किया था। पंजाब आज आंदोलन का लीडर बना हुआ है, लेकिन वहां कांग्रेस पार्टी के चुनाव घोषणा पत्र में भी ये सारी बातें शामिल हैं। इसलिए इन दोहरे चरित्र वाले लोगों से किसानों को बचने की आवश्यकता है। कांग्रेस डूब चुकी है और अब वह किसानों के कंधे पर बंदूक रखकर केंद्र सरकार पर निशाना साधना चाहती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ही किसानों की सबसे हितैषी पार्टी है।

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