{"_id":"65f1fef8a4256a2a8c0c5ca4","slug":"as-part-of-the-week-eyes-of-400-patients-were-examined-dehradun-news-c-5-1-drn1030-370585-2024-03-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Dehradun News: बुजुर्ग ही नहीं बच्चों में भी दिख रहा काला मोतिया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Dehradun News: बुजुर्ग ही नहीं बच्चों में भी दिख रहा काला मोतिया
विज्ञापन
Iदून मेडिकल कॉलेज, अस्पताल में काला मोतिया पर हुई जागरूकता गोष्ठी
I
I
I
Iपिछले दो दिन में 400 मरीजों की आंखों की जांच की गईI
विश्व ग्लूकोमा (काला मोतिया) सप्ताह के तहत दून मेडिकल कॉलेज, अस्पताल में पिछले दो दिन में 400 मरीजों की आंखों की जांच की गई। जिसमें 30 मरीजों की आंखों में काला मोतिया के लक्षण मिले। काला मोतिया अब बुजुर्ग ही नहीं बच्चों में भी देखने को मिल रहा है। लक्षण वाले लोगों की आवश्यक जांच कर इलाज शुरू किया जाएगा। डॉक्टरों का कहना है कि आंखों की सुरक्षा के लिए लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए।
काला मोतिया पर दून अस्पताल की ओपीडी में जागरकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसकी शुरुआत प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने की। कहा कि काला मोतिया से होने वाली अंधता को रोका जा सकता है। इसके लिए 40 साल से ऊपर के सभी लोग की नियमित जांच करवानी चाहिए। नेत्र रोग के विभागाध्यक्ष डॉ. यूसुफ रिजवी ने कहा कि काला मोतिया का इलाज सफल तरीके से हो सकता है।
Iबच्चों में आनुवंशिक रूप से उभर कर सामने आ रहाI
एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुशील ओझा ने कहा कि काला मोतिया पिछले कुछ दशकों में बुजुर्गों में ही नहीं बच्चों में भी देखने को मिल रहा है। बच्चों में यह आनुवंशिक रूप से उभर कर सामने आ रहा है। उन्होंने उच्च जोखिम वाले लोग और मधुमेह व उच्च रक्तचाप वाले रोगियों को ग्लूकोमा की जांच कराने की सलाह दी। कहा कि अगर इसका जल्द पता चल जाए तो इसे रोका जा सकता है। इस दौरान एमएस डॉ. अनुराग अग्रवाल, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नीरज सारस्वत, डॉ. दुष्यंत उपाध्याय समेत अन्य डॉक्टर मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
I
I
I
Iपिछले दो दिन में 400 मरीजों की आंखों की जांच की गईI
विश्व ग्लूकोमा (काला मोतिया) सप्ताह के तहत दून मेडिकल कॉलेज, अस्पताल में पिछले दो दिन में 400 मरीजों की आंखों की जांच की गई। जिसमें 30 मरीजों की आंखों में काला मोतिया के लक्षण मिले। काला मोतिया अब बुजुर्ग ही नहीं बच्चों में भी देखने को मिल रहा है। लक्षण वाले लोगों की आवश्यक जांच कर इलाज शुरू किया जाएगा। डॉक्टरों का कहना है कि आंखों की सुरक्षा के लिए लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए।
काला मोतिया पर दून अस्पताल की ओपीडी में जागरकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसकी शुरुआत प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने की। कहा कि काला मोतिया से होने वाली अंधता को रोका जा सकता है। इसके लिए 40 साल से ऊपर के सभी लोग की नियमित जांच करवानी चाहिए। नेत्र रोग के विभागाध्यक्ष डॉ. यूसुफ रिजवी ने कहा कि काला मोतिया का इलाज सफल तरीके से हो सकता है।
विज्ञापन
Iबच्चों में आनुवंशिक रूप से उभर कर सामने आ रहाI
एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुशील ओझा ने कहा कि काला मोतिया पिछले कुछ दशकों में बुजुर्गों में ही नहीं बच्चों में भी देखने को मिल रहा है। बच्चों में यह आनुवंशिक रूप से उभर कर सामने आ रहा है। उन्होंने उच्च जोखिम वाले लोग और मधुमेह व उच्च रक्तचाप वाले रोगियों को ग्लूकोमा की जांच कराने की सलाह दी। कहा कि अगर इसका जल्द पता चल जाए तो इसे रोका जा सकता है। इस दौरान एमएस डॉ. अनुराग अग्रवाल, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नीरज सारस्वत, डॉ. दुष्यंत उपाध्याय समेत अन्य डॉक्टर मौजूद रहे।
विज्ञापन