उत्तराखंड: वसुंधरा झील पर अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने की अनुमति जारी, 29 को सीबीआरआई की टीम होगी रवाना
हिमनद झीलों से जुड़े संभावित खतरों को लेकर उत्तराखंड में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा रही है। इसी कड़ी में चमोली की वसुंधरा हिमनद झील पर अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने की तैयारी शुरू हो गई है।
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उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने चमोली जिले में स्थित वसुंधरा हिमनद झील पर अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने की अनुमति केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) प्रदान कर दी है। कोई तकनीकी दिक्कत नहीं आयी तो टीम 29 सितंबर को सिस्टम लगाने के लिए रवाना होगी।
राज्य में 13 संवेदनशील हिमनद झीलों की पहचान की गई है। एनआईएच, वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान समेत अन्य संस्थानों के विशेषज्ञों की टीमें इन झीलों के क्षेत्रफल, आसपास की स्थिति समेत कई पहलुओं पर अध्ययन (बाथिमेट्री) कर रही हैं। अभी तक राज्य में चमोली, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ जिले में स्थित ऐसी छह ऐसी हिमनद झीलों का अध्ययन हो चुका है।
वहां पर अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने की योजना है। जिससे अगर हिमनद झील टूटने का कोई खतरा उत्पन्न होता है, उससे पहले लोगों का सचेत किया जा सके। इस दिशा में सीबीआरआई ने हिमनद झीलों को लेकर एक अर्ली वार्निंग सिस्टम विकसित भी किया है।
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अब इसको वसुंधरा झील पर लगाने की राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने अनुमति जारी कर दी है। इसके बाद टीम को 25 सितंबर को रवाना होना था लेकिन मौसम खराब होने के कारण योजना को स्थगित किया गया है। सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने बताया कि सीबीआरआई को मंजूरी दी गई है, अब यह टीम 29 को रवाना होगी।