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अमर उजाला एक्सक्लूसिव : अब ड्रोन खोलेगा प्रॉपर्टी टैक्स चुराने वालों की कुंडली

Wed, 04 Nov 2020 11:13 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal आफताब अजमत, अमर उजाला, देहरादून
आफताब अजमत, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 04 Nov 2020 11:13 AM IST
सार

  • प्रदेश के चार शहरों में शहरी विकास निदेशालय ने शुरू की ड्रोन से जीआईएस मैपिंग
  • पहली बार ड्रोन से की जा रही है मैपिंग, इससे होगा प्रॉपर्टी टैक्स का निर्धारण
  • प्रदेशभर में बड़े पैमाने पर लोग नहीं दे रहे हैं प्रॉपर्टी का टैक्स

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Amar Ujala Exclusive: Now drone will vigil on those who steal property tax
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : पिक्साबे

विस्तार

प्रॉपर्टी टैक्स चुराने वालों की अब खैर नहीं। शहरी विकास निदेशालय ने प्रदेश के शहरों की ड्रोन से जीआईएस मैपिंग की शुरुआत कर दी है। इसके तहत एक निजी कंपनी को ठेका दिया जा चुका है, जो प्रदेश के चार शहरों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर जीआईएस मैपिंग शुरू करने जा रही है।

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अभी तक तमाम नगर निगम और नगर पालिका क्षेत्रों में लोग प्रॉपर्टी का टैक्स देने में हीलाहवाली करते आ रहे हैं। फिर चाहे वह राजधानी देहरादून हो या बड़ी आबादी वाले दूसरे जिले। इन सभी जगहों पर एक-एक प्रॉपर्टी को चिन्ह्ति करने का काम बड़े पैमाने पर शुरू हो गया है।
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शहरी विकास निदेशालय के मुताबिक, देहरादून, हरिद्वार, हल्द्वानी और काशीपुर में ड्रोन से प्रॉपर्टी की जीआईएस मैपिंग शुरू होने जा रही है। इसके नतीजे सही आने के बाद निदेशालय की ओर से 14 अन्य शहरों में मैपिंग कराई जाएगी। इसमें सभी आठ नगर निगम क्षेत्र शामिल हैं। 

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क्या होता है प्रॉपर्टी टैक्स

कोई जमींदार या किसी संपत्ति का मालिक जब अपने क्षेत्र के स्थानीय सरकार या नगर निगम को अपनी संपत्ति के बदले कुछ वार्षिक रकम देता है, तो उस राशि को संपत्ति कर या प्रॉपर्टी टैक्स कहा जाता है। संपत्ति के अंतर्गत सभी वास्तविक रियल एस्टेट की वस्तुएं आती है, जैसे कि घर कार्यालय की इमारत या कोई ऐसी संपत्ति जो भाड़े पर दी गई हो।

कैसे होगा सर्वे

150 से 200 फीट की ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन की शक्ति इतनी है कि वह आसानी से नीचे का नजारा कैद कर लेगा। इससे तस्वीर लेते वक्त उस क्षेत्र की देशांतर और अक्षांश की जानकारी मिल जाएगी। ज्योग्राफिकल इंफॉर्मेशन सिस्टम, जीआईएस आधारित शहर के बेस मैप के साथ ही शहर के सार्वजनिक स्थानों की भी जानकारी अपडेट हो जाएगी। जीआईएस मैप के आधार पर ही संबंधित शहरों के निकायों की ओर से प्रॉपर्टी टैक्स का निर्धारण किया जाएगा।

निगम और निकाय क्षेत्रों में प्रॉपर्टी टैक्स देने वालों की संख्या आबादी के सापेक्ष काफी कम है। लिहाजा, शुरुआत में चार शहरों में जीआईएस मैपिंग शुरू कराई गई है। इसके बाद बाकी शहरों में भी मैपिंग कराई जाएगी, ताकि लोग नियमानुसार अपनी प्रॉपर्टी का टैक्स संबंधित निकाय में जमा करा सकें। -शैलेश बगोली, सचिव, शहरी विकास विभाग

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