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परिवार के लिए एयरहोस्टेस बेटी ने रोकी अपनी 'उड़ान'
आफताब अजमत/अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 11 Jan 2014 10:04 AM IST
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परिवार पर मुसीबतें आती हैं तो बेटियां पहली पंक्ति में खड़ी मिलती हैं। इस बात को साबित किया है राजधानी देहरादून की शिवानी सिंह ने। पिता का साया सिर से उठने के बाद शिवानी परिवार के लिए खेवनहार बन गईं।
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बेटों से बढ़कर होती हैं बेटियां
अपने सपने बदलकर अपनों के सपनों का सहारा बन गई। शिवानी की मां साधना सिंह बेटी की लगन से बेहद प्रभावित हैं। कहती हैं कि बेटों से बढ़कर होती हैं बेटियां। शिवानी ने जिस तरह से घर संभाला है, कोई बेटा भी ऐसा नहीं कर सकता।
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दून इंटरनेशनल स्कूल से पढ़ी शिवानी बचपन से ही एयर होस्टेस बनने का ख्वाब देखा करती थी। यही वजह रही कि उन्होंने एविएशन संस्थान से बीबीए करने के बाद निजी विमान कंपनी में बतौर एयर होस्टेस शुरुआत की। वर्ष 2013, उनके लिए पहाड़ सी चुनौतियों भरा रहा।
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नौकरी को कुछ माह ही हुए थे कि प्रापर्टी डीलर का काम करने वाले पिता प्रवीन सिंह की तबीयत बिगड़ गई। पिता की देखभाल के लिए शिवानी नौकरी छोड़कर लौट आईं। पिता की लगन से सेवा की, लेकिन दुर्भाग्य से अक्तूबर माह में उनका (पिता का) देहांत हो गया।
दुख के लम्हों में बेटी ही सहारा
इसके बाद मां साधना सिंह, बहन मिलानी और छोटे भाई शौर्य वीर सिंह की जिम्मेदारी शिवानी पर आ गई। इंदर रोड निवासी परिवार के लिए दुख के लम्हों में बेटी ही सहारा बनी। शिवानी ने एंटरटेनमेंट कंपनी स्थापित की और रियलिटी शोज कराने शुरू किए। कंपनी को चलाते हुए शिवानी परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए प्राइवेट स्कूल में शिक्षण कार्य भी कर रही हैं।
मेरे पिता ने जो सहूलियतों भरा जीवन दिया था, वह तो नहीं मिल सकता लेकिन परिवार को चलाने के लिए मैं अपनी कोशिशों में कमी नहीं रखती। मेरा मकसद दूसरी कक्षा में पढ़ रहे छोटे भाई को कामयाब इंसान बनाने के साथ ही परिवार को हर दुख और दिक्कत से दूर रखना है।
शिवानी सिंह