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एक ऐसा बाप जो बच्चों को पालने में असमर्थ, लेकिन पी रहा ब्रांडेड पानी, देखने वाले हैरान

Sun, 12 Aug 2018 10:06 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 12 Aug 2018 10:06 AM IST
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a father who had no money for kids need but drink branded water

प्रसव के दौरान पत्नी की मौत हो गई। उसकी अंत्येष्टि के लिए पैसे नहीं। बच्चा गंभीर बीमार है। चार दिन से बच्चे को मिलने तक नहीं आया। आर्थिक हालत खराब है, लेकिन पानी सिर्फ ब्रांडेड ही पी रहा था।

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खुद को महाराष्ट्र का बताता है, देहरादून आने के सवाल पर चुप्पी साध लेता है। सवाल पूछो तो कभी कुछ जवाब तो कभी कुछ। आखिर कौन है वो? यह सवाल इन दिनों देहरादून के श्री महंत इंदिरेश अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकों के मन में कौंध रहा है। वर्तमान में एक गैर सरकारी संस्था (एनजीओ) मदद के साथ साथ उसकी जांच में भी जुटी है। 
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छह अगस्त को दोपहर करीब एक बजे एक व्यक्ति अपनी पत्नी को प्रसव पीड़ा के दौरान श्री महंत इंदिरेश अस्पताल में लेकर आया था। उसके साथ एक एनजीओ के कुछ लोग भी थे। व्यक्ति ने खुद का नाम राहुल सिंदे निवासी महाराष्ट्र बताया था। उसके साथ उसकी एक बेटी भी थी।

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उसके हाव भाव और ढंग को देखकर हर कोई हतप्रभ

a father who had no money for kids need but drink branded water
mahant indresh hospital

चिकित्सक जब उसकी पत्नी को लेबर रूम में ले जाने लगे तो जरूरी खर्च के लिए रुपये भी उसके पास नहीं थे। मगर उसके हाव भाव और ढंग को देखकर हर कोई हतप्रभ था। पीने के लिए पानी भी ब्रांडेड इस्तेमाल कर रहा था। 


श्री महंत इंदिरेश अस्पताल के वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी भूपेंद्र रतूड़ी ने बताया कि रात में उसकी पत्नी ने एक बेटे को जन्म दिया। कुछ देर बाद महिला की मृत्यु हो गई। राहुल सिंदे ने बताया कि उसके पास पत्नी की अंत्येष्टि कराने के लिए भी पैसे नहीं हैं। उससे पूछा कि वह महाराष्ट्र में क्या करता है तो कहने लगा कि किसी समाचार पत्र में फोटोग्राफर है।


उसके पास एक लाख रुपये का कैमरा है, जिसे बेचकर वह सारे पैसे चुका देगा। भूपेंद्र रतूड़ी ने बताया कि उसकी तमाम बातों से वह संदिग्ध नजर आ रहा था। किसी बात का कभी कुछ जवाब देता था तो कभी कुछ। ऐसे में एनजीओ के लोगों ने उसकी मदद की और महिला की अंत्येष्टि कराई। इसके बाद वह अस्पताल में सिर्फ एक दिन आया फिर नहीं दिखाई दिया। 

घरवालों की मर्जी के बगैर एक विधवा से की थी शादी

a father who had no money for kids need but drink branded water
डेमो - फोटो : डेमो

एनजीओ स्वामी विवेकानंद फाउंडेशन के अध्यक्ष अचिन गुप्ता ने बताया कि राहुल शिंदे को कहीं से उनका नंबर मिला था। इसके बाद वे उसे अस्पताल लेकर गए। उसकी गतिविधियां संदिग्ध लग रही थी तो उसके आधार कार्ड के माध्यम से उसका पता किया गया।
 

पता चला कि वह एक साल पहले वह महाराष्ट्र के ठाणे से देहरादून आया था और यहां सहस्रधारा रोड पर रह रहा है। उसके परिजनों से बात करने पर पता चला कि उसने घरवालों की मर्जी के बगैर एक विधवा से शादी की थी। उस वक्त उसकी एक बेटी भी थी। देहरादून में वह एक फोटोग्राफर के साथ काम कर रहा था, मगर तीन महीने से उसका काम नहीं चल रहा था। जिससे उसकी आर्थिक स्थिति खराब हो गई। अचिन गुप्ता ने बताया कि व्यक्ति की जांच होनी चाहिए। 

बच्चों को पालने में जताई असमर्थता, गोद लेने की अपील 
राहुल शिंदे ने अपने दोनों बच्चों को पालने में असमर्थता जताई है। उसका कहना है कि वह इतना सक्षम नहीं है और न ही उसके परिवार वाले अब उसे स्वीकार करेंगे। ऐसे में एनजीओ ने उसके बच्चों को गोद लेने की अपील की है। अध्यक्ष अचिन गुप्ता ने बताया कि उन्होंने कई लोगों से इस बाबत संपर्क किया है। प्रशासन को भी इस संबंध में जानकारी दी जाएगी। 

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