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यूटीयू में घटीं बीटेक की तीन हजार सीटें
Updated Sun, 03 Jun 2018 01:59 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) में इस साल इंजीनियरिंग कोटे (बीटेक) की तीन हजार सीटें कम कर दी गई हैं। गत वर्ष यूटीयू में बीटेक की करीब 11 हजार सीटें थीं। वहीं इस साल सीटों की संख्या घटकर 8081 रह गई है। इसके पीछे यूटीयू कई तरह के तर्क दे रहा है।
उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय में तीन वर्ष पूर्व तक बीटेक की 12 हजार सीटें थीं। इन सीटों में 60 प्रतिशत से ज्यादा हर साल खाली रह जाती थीं। इसके चलते यूटीयू में साल दर साल सीटें कम होती गईं। इसके अलावा तीन साल में कई निजी कॉलेज बंद हो गए और कई कॉलेजों ने सीटें भी वापस कर दीं। नतीजतन इस साल सबसे कम सीटें रह गई हैं। गत वर्ष तकनीकी विवि में करीब 11 हजार सीटें थीं। वहीं इस साल घटकर 8081 रह गई हैं। इसके पीछे एक वजह क्वांटम इंजीनियरिंग कॉलेज के यूनिवर्सिटी बनने को भी माना जा रहा है। इसके अलावा इस साल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, रुड़की ने इंफॉरमेशन टेक्नोलॉजी की सीटें वापस कर दी हैं। रुड़की कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग ने भी ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग व इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन की सीटें लौटा दी हैं। इसकी मुख्य वजह इंजीनियरिंग क्षेत्र में रोजगार के अवसर घटने को भी माना जा रहा है। तकनीकी विवि के कुलपति डॉ. यूएस रावत का कहना है कि इंजीनियरिंग में कई कॉलेजों ने सीटें लौटाई हैं, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। अभी भी होनहारों के पास आठ हजार से ज्यादा सीटों पर दाखिले का मौका है। इंजीनियरिंग में घटते रुझान के पीछे मुख्य वजह बीते कुछ वर्षों में उद्योगों की मांग के हिसाब से अधिक इंजीनियर तैयार होना रहा है। अब इस क्षेत्र में सुधारीकरण शुरू हो चुका है।
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उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) में इस साल इंजीनियरिंग कोटे (बीटेक) की तीन हजार सीटें कम कर दी गई हैं। गत वर्ष यूटीयू में बीटेक की करीब 11 हजार सीटें थीं। वहीं इस साल सीटों की संख्या घटकर 8081 रह गई है। इसके पीछे यूटीयू कई तरह के तर्क दे रहा है।
उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय में तीन वर्ष पूर्व तक बीटेक की 12 हजार सीटें थीं। इन सीटों में 60 प्रतिशत से ज्यादा हर साल खाली रह जाती थीं। इसके चलते यूटीयू में साल दर साल सीटें कम होती गईं। इसके अलावा तीन साल में कई निजी कॉलेज बंद हो गए और कई कॉलेजों ने सीटें भी वापस कर दीं। नतीजतन इस साल सबसे कम सीटें रह गई हैं। गत वर्ष तकनीकी विवि में करीब 11 हजार सीटें थीं। वहीं इस साल घटकर 8081 रह गई हैं। इसके पीछे एक वजह क्वांटम इंजीनियरिंग कॉलेज के यूनिवर्सिटी बनने को भी माना जा रहा है। इसके अलावा इस साल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, रुड़की ने इंफॉरमेशन टेक्नोलॉजी की सीटें वापस कर दी हैं। रुड़की कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग ने भी ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग व इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन की सीटें लौटा दी हैं। इसकी मुख्य वजह इंजीनियरिंग क्षेत्र में रोजगार के अवसर घटने को भी माना जा रहा है। तकनीकी विवि के कुलपति डॉ. यूएस रावत का कहना है कि इंजीनियरिंग में कई कॉलेजों ने सीटें लौटाई हैं, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। अभी भी होनहारों के पास आठ हजार से ज्यादा सीटों पर दाखिले का मौका है। इंजीनियरिंग में घटते रुझान के पीछे मुख्य वजह बीते कुछ वर्षों में उद्योगों की मांग के हिसाब से अधिक इंजीनियर तैयार होना रहा है। अब इस क्षेत्र में सुधारीकरण शुरू हो चुका है।
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