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एमडीडीए के सॉफ्टवेयर में तकनीकी खामी से परेशानी
Updated Wed, 11 Apr 2018 02:32 AM IST
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ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
देहरादून मसूरी विकास प्राधिकरण में मानचित्रों की स्वीकृति के लिए इस्तेमाल किए जा रहे साफ्टवेयर प्रीडीसीआर में तकनीकी खामी से विकास प्राधिकरण के अफसरों के अलावा ड्राफ्टमैनों की मुसीबत बढ़ गई है। वहीं, भवन स्वामियों को घर बैठे मानचित्र मुहैया कराने की योजना भी धरातल पर नहीं उतर पा रही है। ऐसे में एमडीडीए के विशेष साफ्टवेयर स्वीकृत मानचित्रों में खामियों की वजह से बैंक लोन देने से कतरा रहे हैं।
विकास प्राधिकरण की ओर से भवन स्वामियों को घर बैठे स्वीकृत मानचित्र मुहैया कराने की योजना बनाई गई है। इसके लिए विकास प्राधिकरण की ओर से आटोकैड आधारित प्रीडीसीआर साफ्टवेयर तैयार किया गया है। इसमें आर्किटेक्ट व ड्राफ्टमैनों द्वारा मानचित्रों की फीडिंग की जाती है और मानचित्र यदि मानक के अनुरूप हैं तो साफ्टवेयर स्वीकृति दे देता है, लेकिन साफ्टवेयर में तकनीकी खामी से भवन स्वामियों को स्वीकृत मानचित्र नहीं मिल पा रहे हैं। यदि किसी तरह मानचित्र मिल जाय तो उसमें कई ऐसी खामियां है जिसकी वजह से बैंक आशियाना बनाने के लिए लोन देने में आनाकानी कर रहे हैं।
उत्तराखंड ड्राफ्टमैन वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा का कहना है कि ड्राफ्टमैनों द्वारा तैयार मानचित्र साफ्टवेयर में लोड किया जाता है उसमें प्रश्नवाचक चिह्न लगकर आ रहा है। इसकी वजह से बैैंक अधिकारियों में संशय की स्थिति है और बैंक अधिकारी मानचित्र को स्वीकृत न मानते हुए लोन देने से आनाकानी कर रहे हैं। इस समस्या के संबंध में प्राधिकरण उपाध्यक्ष को भी अवगत कराया गया था। उन्हाेंने मार्च में समस्या के निराकरण का आश्वासन दिया था, लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। इससे भवन स्वामियों के साथ ही आर्किटेक्ट व ड्राफ्टमैन को भी दिक्कतें आ रही हैं।
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समस्या का निराकरण कर दिया गया है। निर्धारित प्रारूपों में मानचित्र स्वीकृत किया जा रहा है। लोन संबंधित दिक्कतों के लिए बैंक अफसरों से बात की जाएगी।
आशीष श्रीवास्तव, उपाध्यक्ष, एमडीडीए
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देहरादून मसूरी विकास प्राधिकरण में मानचित्रों की स्वीकृति के लिए इस्तेमाल किए जा रहे साफ्टवेयर प्रीडीसीआर में तकनीकी खामी से विकास प्राधिकरण के अफसरों के अलावा ड्राफ्टमैनों की मुसीबत बढ़ गई है। वहीं, भवन स्वामियों को घर बैठे मानचित्र मुहैया कराने की योजना भी धरातल पर नहीं उतर पा रही है। ऐसे में एमडीडीए के विशेष साफ्टवेयर स्वीकृत मानचित्रों में खामियों की वजह से बैंक लोन देने से कतरा रहे हैं।
विकास प्राधिकरण की ओर से भवन स्वामियों को घर बैठे स्वीकृत मानचित्र मुहैया कराने की योजना बनाई गई है। इसके लिए विकास प्राधिकरण की ओर से आटोकैड आधारित प्रीडीसीआर साफ्टवेयर तैयार किया गया है। इसमें आर्किटेक्ट व ड्राफ्टमैनों द्वारा मानचित्रों की फीडिंग की जाती है और मानचित्र यदि मानक के अनुरूप हैं तो साफ्टवेयर स्वीकृति दे देता है, लेकिन साफ्टवेयर में तकनीकी खामी से भवन स्वामियों को स्वीकृत मानचित्र नहीं मिल पा रहे हैं। यदि किसी तरह मानचित्र मिल जाय तो उसमें कई ऐसी खामियां है जिसकी वजह से बैंक आशियाना बनाने के लिए लोन देने में आनाकानी कर रहे हैं।
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उत्तराखंड ड्राफ्टमैन वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा का कहना है कि ड्राफ्टमैनों द्वारा तैयार मानचित्र साफ्टवेयर में लोड किया जाता है उसमें प्रश्नवाचक चिह्न लगकर आ रहा है। इसकी वजह से बैैंक अधिकारियों में संशय की स्थिति है और बैंक अधिकारी मानचित्र को स्वीकृत न मानते हुए लोन देने से आनाकानी कर रहे हैं। इस समस्या के संबंध में प्राधिकरण उपाध्यक्ष को भी अवगत कराया गया था। उन्हाेंने मार्च में समस्या के निराकरण का आश्वासन दिया था, लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। इससे भवन स्वामियों के साथ ही आर्किटेक्ट व ड्राफ्टमैन को भी दिक्कतें आ रही हैं।
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समस्या का निराकरण कर दिया गया है। निर्धारित प्रारूपों में मानचित्र स्वीकृत किया जा रहा है। लोन संबंधित दिक्कतों के लिए बैंक अफसरों से बात की जाएगी।
आशीष श्रीवास्तव, उपाध्यक्ष, एमडीडीए