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लक्सर में मालगाड़ी डिरेल
Updated Tue, 22 Aug 2017 12:31 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
रुड़की। हादसे पर हादसे हो रहे हैं, लेकिन रेल विभाग लापरवाही से सबक लेने को तैयार नहीं है। लक्सर स्टेशन की बात करें तो चार दिन के भीतर पटरी से डिब्बे उतरने की यहां दूसरी घटना है। राहत की बात यह है कि दोनों दुर्घटनाओं में मालगाड़ी के डिब्बे पटरी से उतरे हैं। इस दौरान कोई जनहानी तो नहीं हुई, लेकिन यदि ट्रेने मालगाड़ी न होकर सवारी गाड़ी और स्पीड में होती तो खतौली उत्कल एक्सप्रेस से भी बड़ा हादसा हो सकता था।
खतौली में उत्कल एक्सप्रेस के पटरी से उतरने पर इतना भयावह हादसा हुआ है। जबकि लक्सर क्षेत्र में ट्रेन का पटरी से उतरना मामूली बात बनकर रह गया है। सोमवार से पहले भी एक मालगाड़ी पटरी से उतर चुकी है। 17 अगस्त की शाम को भी एक मालगाड़ी पटरी से उतर गई थी, लेकिन विभाग ने इसे मामूली रूप में लिया। जिसके कारण पटरियों को दुरुस्त नहीं किया गया। यही वजह रही कि सोमवार को फिर एक मालगाड़ी पटरी से उतर गई। जानकारों का कहना है कि बरसात में पटरियों को विशेष मरम्मत और देखभाल की जरूरत रहती है। क्योंकि कई बार पानी आदि ट्रैक पर रुकने या फिर मिट्टी खिसक जाने से ट्रैक दब जाता है। ऐसे में जब उसके ऊपर ट्रेन गुजरती है तो डिब्बों के उतरने की आशंका बढ़ जाती है।
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रुड़की। हादसे पर हादसे हो रहे हैं, लेकिन रेल विभाग लापरवाही से सबक लेने को तैयार नहीं है। लक्सर स्टेशन की बात करें तो चार दिन के भीतर पटरी से डिब्बे उतरने की यहां दूसरी घटना है। राहत की बात यह है कि दोनों दुर्घटनाओं में मालगाड़ी के डिब्बे पटरी से उतरे हैं। इस दौरान कोई जनहानी तो नहीं हुई, लेकिन यदि ट्रेने मालगाड़ी न होकर सवारी गाड़ी और स्पीड में होती तो खतौली उत्कल एक्सप्रेस से भी बड़ा हादसा हो सकता था।
खतौली में उत्कल एक्सप्रेस के पटरी से उतरने पर इतना भयावह हादसा हुआ है। जबकि लक्सर क्षेत्र में ट्रेन का पटरी से उतरना मामूली बात बनकर रह गया है। सोमवार से पहले भी एक मालगाड़ी पटरी से उतर चुकी है। 17 अगस्त की शाम को भी एक मालगाड़ी पटरी से उतर गई थी, लेकिन विभाग ने इसे मामूली रूप में लिया। जिसके कारण पटरियों को दुरुस्त नहीं किया गया। यही वजह रही कि सोमवार को फिर एक मालगाड़ी पटरी से उतर गई। जानकारों का कहना है कि बरसात में पटरियों को विशेष मरम्मत और देखभाल की जरूरत रहती है। क्योंकि कई बार पानी आदि ट्रैक पर रुकने या फिर मिट्टी खिसक जाने से ट्रैक दब जाता है। ऐसे में जब उसके ऊपर ट्रेन गुजरती है तो डिब्बों के उतरने की आशंका बढ़ जाती है।
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