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छुट्टियों में लग रही है शिक्षकों की पाठशाला
Updated Wed, 06 Jun 2018 01:55 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
हर साल की तरह इस साल भी गर्मी की छुट्टियों में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन शिक्षकों को सीखने-सिखाने की प्रक्रियाओं को बेहतर करने के लिए ग्रीष्मकालीन कार्यशालाओं का आयोजन कर रहा है। इसके तहत शिक्षक चार दिन अपनी शिक्षण प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने रहे हैं।
अजीम प्रेमजी फाउंडेशन स्वैच्छिक प्रतिभाग पर आधारित कार्यशालाएं गर्मी और जाडे़ की छुट्टियों में पूरे उत्तराखंड में कराता है। इसके तहत हिंदी, अंग्रेजी, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और गणित के विषयों में होने वाली कार्यशाला में प्रदेश के अलग-अलग जगहों से करीब 600 कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं। इस बार कार्यशालाओं में 2000 शिक्षक हिस्सा लेने की संभावना हैं। 29 मई से दो जून तक चली अंग्रेजी की कार्यशाला में 60 शिक्षकों ने भाग लिया। वहीं, बीते सोमवार को रायपुर ब्लॉक में हिंदी और विज्ञान की कार्यशाला में 76 शिक्षकों ने हिस्सा लिया। फाउंडेशन के राज्य प्रमुख कैलाश चंद्र कांडपाल ने कहा कि शिक्षकों का कार्यशाला में हिस्सा लेना उनका अपने कार्य के प्रति सजगता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस साल सरकार ने एनसीईआरटी की किताबें लागू की हैं। इसलिए शिक्षकों के साथ इन किताबों का अवलोकन करने और चर्चा करने की योजना बनाई गई है।
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हर साल की तरह इस साल भी गर्मी की छुट्टियों में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन शिक्षकों को सीखने-सिखाने की प्रक्रियाओं को बेहतर करने के लिए ग्रीष्मकालीन कार्यशालाओं का आयोजन कर रहा है। इसके तहत शिक्षक चार दिन अपनी शिक्षण प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने रहे हैं।
अजीम प्रेमजी फाउंडेशन स्वैच्छिक प्रतिभाग पर आधारित कार्यशालाएं गर्मी और जाडे़ की छुट्टियों में पूरे उत्तराखंड में कराता है। इसके तहत हिंदी, अंग्रेजी, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और गणित के विषयों में होने वाली कार्यशाला में प्रदेश के अलग-अलग जगहों से करीब 600 कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं। इस बार कार्यशालाओं में 2000 शिक्षक हिस्सा लेने की संभावना हैं। 29 मई से दो जून तक चली अंग्रेजी की कार्यशाला में 60 शिक्षकों ने भाग लिया। वहीं, बीते सोमवार को रायपुर ब्लॉक में हिंदी और विज्ञान की कार्यशाला में 76 शिक्षकों ने हिस्सा लिया। फाउंडेशन के राज्य प्रमुख कैलाश चंद्र कांडपाल ने कहा कि शिक्षकों का कार्यशाला में हिस्सा लेना उनका अपने कार्य के प्रति सजगता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस साल सरकार ने एनसीईआरटी की किताबें लागू की हैं। इसलिए शिक्षकों के साथ इन किताबों का अवलोकन करने और चर्चा करने की योजना बनाई गई है।
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