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उतराखंड सांस्कृतिक नीति लागू करने की मांग
Updated Sun, 13 May 2018 02:28 AM IST
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उत्तराखंड में सांस्कृतिक नीति लागू करने की मांग
देहरादून। पंजाब की तर्ज पर उत्तराखंड में सांस्कृतिक नीति लागू करने की मांग को लेकर गवर्नमेंट पीजी कॉलेज, चंडीगढ़ के सहायक प्रोफेसर पंडित राव धरेनवर ने राज्यपाल केके पॉल से मुलाकात की।
शनिवार को दून पहुंचे धरेनवर ने राज्यपाल से मिलकर प्रदेश में सांस्कृतिक नीति तैयार कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में अनेक कलाकार ऐसे हैं जो यहां की सांस्कृतिक विरासत को बचाए रखने के लिए कार्य रहे हैं, लेकिन राज्य में ऐसे कलाकारों के मदद के लिए कोई नीति लागू नहीं है। जिस कारण उनको परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए नीति लागू करने की आवश्यकता है। राज्यपाल ने उन्हें आश्वासन दिया कि नीति तैयार करने के लिए प्रयास किया जाएगा। इसके बाद उन्होंने सार्वजनिक स्थानों पर शिविर लगाकर लोगों को संस्कृति के संरक्षण के लिए जागरूक किया।
पंडित राव धरेनवर ने बताया कि वह मूलरूप से कर्नाटक के रहने वाले हैं। वे उत्तर भारत की संस्कृति से प्रभावित होकर यहां सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए काम कर रहे हैं। अपने प्रयासों से वह पंजाब में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए नीति लागू करवाने में सफल रहेे हैं। वह पंजाबी भाषा में 12 किताबें भी लिख चुके हैं।
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उत्तराखंड में सांस्कृतिक नीति लागू करने की मांग
देहरादून। पंजाब की तर्ज पर उत्तराखंड में सांस्कृतिक नीति लागू करने की मांग को लेकर गवर्नमेंट पीजी कॉलेज, चंडीगढ़ के सहायक प्रोफेसर पंडित राव धरेनवर ने राज्यपाल केके पॉल से मुलाकात की।
शनिवार को दून पहुंचे धरेनवर ने राज्यपाल से मिलकर प्रदेश में सांस्कृतिक नीति तैयार कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में अनेक कलाकार ऐसे हैं जो यहां की सांस्कृतिक विरासत को बचाए रखने के लिए कार्य रहे हैं, लेकिन राज्य में ऐसे कलाकारों के मदद के लिए कोई नीति लागू नहीं है। जिस कारण उनको परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए नीति लागू करने की आवश्यकता है। राज्यपाल ने उन्हें आश्वासन दिया कि नीति तैयार करने के लिए प्रयास किया जाएगा। इसके बाद उन्होंने सार्वजनिक स्थानों पर शिविर लगाकर लोगों को संस्कृति के संरक्षण के लिए जागरूक किया।
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पंडित राव धरेनवर ने बताया कि वह मूलरूप से कर्नाटक के रहने वाले हैं। वे उत्तर भारत की संस्कृति से प्रभावित होकर यहां सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए काम कर रहे हैं। अपने प्रयासों से वह पंजाब में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए नीति लागू करवाने में सफल रहेे हैं। वह पंजाबी भाषा में 12 किताबें भी लिख चुके हैं।
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