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छात्र-छात्राओें को पर्यावरण संरक्षण की जानकारी देंगे आईसीएफआरई के वैज्ञानिक
Updated Tue, 16 Oct 2018 02:09 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
देहरादून। भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई) के वैज्ञानिक अब नवोदय व केंद्रीय विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को वन एवं पर्यावरण संरक्षण का पाठ पढ़ाएंगे। इस संबंध में नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण सचिव सीके मिश्रा, महानिदेशक वन एवं विशेष सचिव सिद्धांता दास की मौजूदगी में आईसीएफआरई के महानिदेशक डॉ. एससी गैरोला, नवोदय विद्यालय के आयुक्त बीके सिंह व केंद्रीय विद्यालय संगठन के आयुक्त संतोष कुमार मल्ल ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।
आईसीएफआरई के महानिदेशक डॉ. गैरोला ने बताया कि भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद देश भर में स्थित अपने नौ संस्थानों और पांच केंद्रों के जरिए राष्ट्रीय स्तर पर वानिकी अनुसंधान, पर्यावरण एवं वन संरक्षक के प्रति जागरूकता अभियान चला रहा है। समझौते के तहत संस्थान के वैज्ञानिक शिक्षकों, छात्र छात्राओं को पर्यावरण संरक्षण, वन संरक्षण के साथ ही वानिकी अनुसंधान से जुड़े विषयों की जानकारी देंगे। इसके अलावा प्रायोगिक अनुभवों के लिए भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद के संस्थानों की प्रयोगशालाओं और परीक्षण क्षेत्रों के लिए दौरों का आयोजन भी किया जाएगा। फिलहाल यह समझौता 10 साल के लिए किया गया है।
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देहरादून। भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई) के वैज्ञानिक अब नवोदय व केंद्रीय विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को वन एवं पर्यावरण संरक्षण का पाठ पढ़ाएंगे। इस संबंध में नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण सचिव सीके मिश्रा, महानिदेशक वन एवं विशेष सचिव सिद्धांता दास की मौजूदगी में आईसीएफआरई के महानिदेशक डॉ. एससी गैरोला, नवोदय विद्यालय के आयुक्त बीके सिंह व केंद्रीय विद्यालय संगठन के आयुक्त संतोष कुमार मल्ल ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।
आईसीएफआरई के महानिदेशक डॉ. गैरोला ने बताया कि भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद देश भर में स्थित अपने नौ संस्थानों और पांच केंद्रों के जरिए राष्ट्रीय स्तर पर वानिकी अनुसंधान, पर्यावरण एवं वन संरक्षक के प्रति जागरूकता अभियान चला रहा है। समझौते के तहत संस्थान के वैज्ञानिक शिक्षकों, छात्र छात्राओं को पर्यावरण संरक्षण, वन संरक्षण के साथ ही वानिकी अनुसंधान से जुड़े विषयों की जानकारी देंगे। इसके अलावा प्रायोगिक अनुभवों के लिए भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद के संस्थानों की प्रयोगशालाओं और परीक्षण क्षेत्रों के लिए दौरों का आयोजन भी किया जाएगा। फिलहाल यह समझौता 10 साल के लिए किया गया है।
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