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सवालों के घेरे में राशन कालाबाजारी की जांच रिपोर्ट
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सवालों के घेरे में राशन कालाबाजारी की जांच रिपोर्ट
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। आपूर्ति विभाग के अधिकारी 30 बोरा सरकारी राशन की कालाबाजारी करने वाले तक नहीं पहुंच पाए हैं। इसके लिए 16 दिन तक गहनता से जांच का नाटक किया गया। जांच अधिकारी ने पकड़े गए वाहन चालक से भी पूछताछ करना जरूरी नहीं समझा। अब आनन फानन में जांच रिपोर्ट जिला आपूर्ति अधिकारी (डीसीओ) को सौंप दी गई। वहीं डीसीओ ने मामले की जांच पुलिस को सौंप दी है। उनकी ओर से क्लेमेंटटाउन थाने में चालक सहित अन्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के लिए तहरीर दी गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि 16 दिन जांच के नाम पर विभाग ने क्या किया?
मामले की जांच में दो सप्ताह तक कोई कार्रवाई न होने पर अमर उजाला ने शुक्रवार को प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी, जिस पर विभागीय अधिकारी ने शनिवार को जांच पूरी होने की घोषणा कर दी थी। अब आनन फानन में जांच रिपोर्ट आपूर्ति अधिकारी को रिपोर्ट सौंप दी गई। 16 दिन तक गहनता से जांच करने के बाद कोई नतीजा नहीं निकल सकता है। खास बात ये है जिस वाहन से सरकारी राशन पकड़ा गया था, उस वाहन के चालक से एक बार पूछताछ तक नहीं की गई। उधर सूत्रों की मानें तो इस पूरे प्रकरण में एक राशन डीलर को बचाया जा रहा है। उसकी दुकान से ये राशन कहीं बेचने के लिए ले जाया जा रहा था।
बता दें कि क्लेमेंटटाउन थाना क्षेत्र के टर्नर रोड पर सात फरवरी की रात में पुलिस ने एक वाहन में 30 बोरे सरकारी राशन पकड़ा था। तब वाहन चालक विजयपाल कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका था, न ही वह उस राशन से संबंधित कोई रसीद दिखा सका था। इस पर पुलिस ने मौके पर आपूर्ति निरीक्षक को बुला लिया था। अगले दिन मामला समाचार पत्रों में सुर्खियां बनने पर आरएफसी चंद्रसिंह धर्मशक्तू ने जिला आपूर्ति अधिकारी विपिन कुमार को जांच के निर्देश दिए थे। जिस जिला आपूर्ति अधिकारी ने आपूर्ति निरीक्षक विभूति जुयाल को मामले की जांच सौंपी थी।
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विभाग की कार्यशैली पर सवाल
पुलिस द्वारा पकड़े गए 30 बोरे सरकारी राशन को न तो गोदाम में रखा गया और न ही पुलिस की निगरानी में है। जबकि नियमानुसार ये राशन पुलिस या गोदाम प्रभारी की निगरानी में रखना होता है। आपूर्ति निरीक्षक ने पकड़ा गया राशन एक डीलर की निगरानी में रखा है। आरएफसी ने कहा कि आपूर्ति कार्यालय के कर्मचारियों ने लापरवाही की है। इसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
कोटस...
जांच रिपोर्ट में ये पता नहीं चल सका है कि ये राशन किसका है। ऐसे में चालक सहित कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाने के लिए थाने में तहरीर दी गई है।
- विपिन कुमार, जिला आपूर्ति अधिकारी
जांच में लापरवाही हुई है। वरना इतने दिनों तक जांच करने का क्या औचित्य था। उन्होंने कहा कि ये मामला गंभीर है आरोपियों को बख्शा नहीं जाएगा।
- चंद्रसिंह धर्मशक्तू, आरएफसी
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। आपूर्ति विभाग के अधिकारी 30 बोरा सरकारी राशन की कालाबाजारी करने वाले तक नहीं पहुंच पाए हैं। इसके लिए 16 दिन तक गहनता से जांच का नाटक किया गया। जांच अधिकारी ने पकड़े गए वाहन चालक से भी पूछताछ करना जरूरी नहीं समझा। अब आनन फानन में जांच रिपोर्ट जिला आपूर्ति अधिकारी (डीसीओ) को सौंप दी गई। वहीं डीसीओ ने मामले की जांच पुलिस को सौंप दी है। उनकी ओर से क्लेमेंटटाउन थाने में चालक सहित अन्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के लिए तहरीर दी गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि 16 दिन जांच के नाम पर विभाग ने क्या किया?
मामले की जांच में दो सप्ताह तक कोई कार्रवाई न होने पर अमर उजाला ने शुक्रवार को प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी, जिस पर विभागीय अधिकारी ने शनिवार को जांच पूरी होने की घोषणा कर दी थी। अब आनन फानन में जांच रिपोर्ट आपूर्ति अधिकारी को रिपोर्ट सौंप दी गई। 16 दिन तक गहनता से जांच करने के बाद कोई नतीजा नहीं निकल सकता है। खास बात ये है जिस वाहन से सरकारी राशन पकड़ा गया था, उस वाहन के चालक से एक बार पूछताछ तक नहीं की गई। उधर सूत्रों की मानें तो इस पूरे प्रकरण में एक राशन डीलर को बचाया जा रहा है। उसकी दुकान से ये राशन कहीं बेचने के लिए ले जाया जा रहा था।
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बता दें कि क्लेमेंटटाउन थाना क्षेत्र के टर्नर रोड पर सात फरवरी की रात में पुलिस ने एक वाहन में 30 बोरे सरकारी राशन पकड़ा था। तब वाहन चालक विजयपाल कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका था, न ही वह उस राशन से संबंधित कोई रसीद दिखा सका था। इस पर पुलिस ने मौके पर आपूर्ति निरीक्षक को बुला लिया था। अगले दिन मामला समाचार पत्रों में सुर्खियां बनने पर आरएफसी चंद्रसिंह धर्मशक्तू ने जिला आपूर्ति अधिकारी विपिन कुमार को जांच के निर्देश दिए थे। जिस जिला आपूर्ति अधिकारी ने आपूर्ति निरीक्षक विभूति जुयाल को मामले की जांच सौंपी थी।
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विभाग की कार्यशैली पर सवाल
पुलिस द्वारा पकड़े गए 30 बोरे सरकारी राशन को न तो गोदाम में रखा गया और न ही पुलिस की निगरानी में है। जबकि नियमानुसार ये राशन पुलिस या गोदाम प्रभारी की निगरानी में रखना होता है। आपूर्ति निरीक्षक ने पकड़ा गया राशन एक डीलर की निगरानी में रखा है। आरएफसी ने कहा कि आपूर्ति कार्यालय के कर्मचारियों ने लापरवाही की है। इसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
कोटस...
जांच रिपोर्ट में ये पता नहीं चल सका है कि ये राशन किसका है। ऐसे में चालक सहित कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाने के लिए थाने में तहरीर दी गई है।
- विपिन कुमार, जिला आपूर्ति अधिकारी
जांच में लापरवाही हुई है। वरना इतने दिनों तक जांच करने का क्या औचित्य था। उन्होंने कहा कि ये मामला गंभीर है आरोपियों को बख्शा नहीं जाएगा।
- चंद्रसिंह धर्मशक्तू, आरएफसी