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मरीजों को अस्पताल आने-जाने में नहीं होगी परेशानी
Updated Mon, 09 Jul 2018 02:04 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) को जोड़ने वाली सड़कों को गड्ढामुक्त कर चकाचक किया जाएगा। मरीजों और तीमारदारों को अस्पताल आने-जाने में होने वाली परेशानी को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। अपर प्रमुख सचिव ओमप्रकाश का कहना है कि जल्द ही इस संबंध में आदेश जारी कर दिए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग और पीडब्ल्यूडी के अफसर आपसी समन्वय से योजना को धरातल पर उतारेंगे।
हाल ही में दिल्ली से आई पार्लियामेंट्री बोर्ड कमेटी के सदस्यों ने आला अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान राज्य की सड़कों की बदहाली पर चिंता जताते हुए इन्हें दुरुस्त करने की बात कही थी। आंकड़े पेश कर उन्होंने कहा था कि यदि जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और फर्स्ट रेफरल यूनिट्स जैसे चिकित्सा केंद्रों को जोड़ने वाली सड़कों को दुरुस्त कर दिया जाए तो मात्र-शिशु मृत्यु दर के आंकड़े को कम किया जा सकता है, जो वर्तमान में 84 प्रतिशत है।
बोर्ड के सदस्यों का मानना है कि गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक लाने और ले-जाने के दौरान ही कई की मृत्यु हो जाती है। पार्लियामेंट्री बोर्ड कमेटी की चिंता को जायज मानते हुए सरकार ने अब अस्पतालों को जोड़ने वाली सड़कों को दुरुस्त करने का निर्णय लिया है। अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश का कहना है कि इस कार्य को प्राथमिकता के आधार पर तेजी से कराया जाएगा, ताकि अस्पताल पहुंचने में मरीजों और तीमारदारों को आसानी हो।
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जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) को जोड़ने वाली सड़कों को गड्ढामुक्त कर चकाचक किया जाएगा। मरीजों और तीमारदारों को अस्पताल आने-जाने में होने वाली परेशानी को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। अपर प्रमुख सचिव ओमप्रकाश का कहना है कि जल्द ही इस संबंध में आदेश जारी कर दिए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग और पीडब्ल्यूडी के अफसर आपसी समन्वय से योजना को धरातल पर उतारेंगे।
हाल ही में दिल्ली से आई पार्लियामेंट्री बोर्ड कमेटी के सदस्यों ने आला अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान राज्य की सड़कों की बदहाली पर चिंता जताते हुए इन्हें दुरुस्त करने की बात कही थी। आंकड़े पेश कर उन्होंने कहा था कि यदि जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और फर्स्ट रेफरल यूनिट्स जैसे चिकित्सा केंद्रों को जोड़ने वाली सड़कों को दुरुस्त कर दिया जाए तो मात्र-शिशु मृत्यु दर के आंकड़े को कम किया जा सकता है, जो वर्तमान में 84 प्रतिशत है।
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बोर्ड के सदस्यों का मानना है कि गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक लाने और ले-जाने के दौरान ही कई की मृत्यु हो जाती है। पार्लियामेंट्री बोर्ड कमेटी की चिंता को जायज मानते हुए सरकार ने अब अस्पतालों को जोड़ने वाली सड़कों को दुरुस्त करने का निर्णय लिया है। अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश का कहना है कि इस कार्य को प्राथमिकता के आधार पर तेजी से कराया जाएगा, ताकि अस्पताल पहुंचने में मरीजों और तीमारदारों को आसानी हो।
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