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स्वास् थ्य विभाग के अफसरों ने मनमाने ढंग से खरीद डाले करोड़ां के उपकरण
Updated Sun, 21 Oct 2018 02:20 AM IST
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अफसरों ने मनमाने ढंग से खरीद डाली करोड़ों की मशीनें
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने पहले तो करोड़ों रुपये की एक्सरे और अल्ट्रासाउंड मशीनें खरीद लीं और अब जबकि टिहरी जिला अस्पताल समेत कई सीएचसी का संचालन बड़े निजी अस्पताल को सौंपा जा रहा है तो अस्पताल प्रबंधन ने इन मशीनों को लेने से इंकार कर दिया है। सवाल उठता है कि जब इन मशीनों की जरूरत नहीं थी तो विभाग के अफसरों ने करीब तीन करोड़ रुपये की इन मशीनों को क्यों खरीदा?
उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर जिला अस्पताल टिहरी, जिला अस्पताल बागेश्वर व बौराड़ी सामुदायिक स्वास्थ्य केेंद्र के लिए करीब तीन करोड़ रुपये की डिजिटल एक्सरे और अल्ट्रासाउंड मशीनें खरीदी गई थीं। नौ महीने से ये मशीनें अस्पतालों में ऐसे ही पड़ी हैं। सूत्रों की मानें तो अस्पतालों में रेडियोलॉजिस्ट व टेक्नीशियन नहीं होने से इन्हें खोला ही नहीं गया। अब जबकि टिहरी जिला अस्पताल समेत कई अस्पतालोें को हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट अस्पताल को सौंपा जाना है तो निजी अस्पताल ने इन अस्पतालों को लेने से इंकार कर दिया। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि टिहरी जिला अस्पताल का संचालन अपने हाथ में लेने के बाद वे अपनी तरफ से नई मशीनें लगाएंगे।
सीएमओ टिहरी डॉ. भागीरथी जंगपागी का कहना है कि दिसंबर में अस्पताल को हिमालयन अस्पताल को सौंपा जाना है, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने मशीनों को लेने से इंकार कर दिया है। दूसरी ओर निदेशक (बजट एवं स्टोर) डॉ. अमिता उप्रेती का कहना है कि मशीनों को अस्पताल में लगाया जाएगा ताकि मरीजों की जांच में आसानी हो सके। सवाल उठता है जब इन मशीनों को चलाने के लिए रेडियोलॉजिस्ट व तकनीकी विशेषज्ञ नहीं थे तो क्यों खरीदा गया? सवाल यह भी उठता है कि करोड़ाें रुपये कीमत के जिन उपकरणाें की खरीदी की गई क्या उनकी जरूरत उन अस्पतालों को थी या नहीं?
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स्वास्थ्य सचिव ने भी तलब की थी रिपोर्ट
राज्य के विभिन्न जिलों में खरीदी गईं मशीनों व उनके इस्तेमाल नहीं किए जाने पर स्वास्थ्य सचिव नितेश कुमार झा ने भी कड़ी नाराजगी जताई थी। इस संबंध में उन्होंने सभी सीएमओ से रिपोर्ट भी तलब की थी लेकिन बाद में मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने पहले तो करोड़ों रुपये की एक्सरे और अल्ट्रासाउंड मशीनें खरीद लीं और अब जबकि टिहरी जिला अस्पताल समेत कई सीएचसी का संचालन बड़े निजी अस्पताल को सौंपा जा रहा है तो अस्पताल प्रबंधन ने इन मशीनों को लेने से इंकार कर दिया है। सवाल उठता है कि जब इन मशीनों की जरूरत नहीं थी तो विभाग के अफसरों ने करीब तीन करोड़ रुपये की इन मशीनों को क्यों खरीदा?
उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर जिला अस्पताल टिहरी, जिला अस्पताल बागेश्वर व बौराड़ी सामुदायिक स्वास्थ्य केेंद्र के लिए करीब तीन करोड़ रुपये की डिजिटल एक्सरे और अल्ट्रासाउंड मशीनें खरीदी गई थीं। नौ महीने से ये मशीनें अस्पतालों में ऐसे ही पड़ी हैं। सूत्रों की मानें तो अस्पतालों में रेडियोलॉजिस्ट व टेक्नीशियन नहीं होने से इन्हें खोला ही नहीं गया। अब जबकि टिहरी जिला अस्पताल समेत कई अस्पतालोें को हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट अस्पताल को सौंपा जाना है तो निजी अस्पताल ने इन अस्पतालों को लेने से इंकार कर दिया। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि टिहरी जिला अस्पताल का संचालन अपने हाथ में लेने के बाद वे अपनी तरफ से नई मशीनें लगाएंगे।
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सीएमओ टिहरी डॉ. भागीरथी जंगपागी का कहना है कि दिसंबर में अस्पताल को हिमालयन अस्पताल को सौंपा जाना है, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने मशीनों को लेने से इंकार कर दिया है। दूसरी ओर निदेशक (बजट एवं स्टोर) डॉ. अमिता उप्रेती का कहना है कि मशीनों को अस्पताल में लगाया जाएगा ताकि मरीजों की जांच में आसानी हो सके। सवाल उठता है जब इन मशीनों को चलाने के लिए रेडियोलॉजिस्ट व तकनीकी विशेषज्ञ नहीं थे तो क्यों खरीदा गया? सवाल यह भी उठता है कि करोड़ाें रुपये कीमत के जिन उपकरणाें की खरीदी की गई क्या उनकी जरूरत उन अस्पतालों को थी या नहीं?
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स्वास्थ्य सचिव ने भी तलब की थी रिपोर्ट
राज्य के विभिन्न जिलों में खरीदी गईं मशीनों व उनके इस्तेमाल नहीं किए जाने पर स्वास्थ्य सचिव नितेश कुमार झा ने भी कड़ी नाराजगी जताई थी। इस संबंध में उन्होंने सभी सीएमओ से रिपोर्ट भी तलब की थी लेकिन बाद में मामला ठंडे बस्ते में चला गया।