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रात्रि प्रवास पर कोटा पधारीं देव पालकियां
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर।
कालसी। कोटा के ग्रामीणों के लिए मंगलवार का दिन मंगलमय रहा। कालसी ब्लॉक के सिमोग मंदिर से तीन देवताओं शिलगुर, विजट, चुड़ेश्वर और डिमऊ से परशुराम देवता की पालकियां रात्रि प्रवास पर कोटा गांव पहुंचीं। चार देवताओं के एक साथ दर्शन को आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। हजारों की संख्या में लोग देवदर्शन के लिए पहुंचे। देव पालकियां जहां से भी गुजरीं, वहां भक्तों का तांता लगा रहा।
जनजाति क्षेत्र जौनसार बावर की धार्मिक मान्यताएं हैं कि जब कोई परिवार दुख और विपत्तियों से गुजरता है तो वह अपने कुल और ईष्ट देवताओं को याद करते हुए सुखी होने की कामना करता है। मनोकामना पूरी होने पर देवताओं को एक रात के प्रवास पर अपने घर आमंत्रित करता है। इसी परंपरा के तहत सिमोग मंदिर से तीन देवताओं की पालकियां और डिमऊ मंदिर से एक देवता की पालकी कोटा गांव निवासी ध्यान सिंह चौहान के घर पहुंची। ध्यान सिंह ने बताया कि उनका परिवार भी एक समय विपत्तियों से गुजर रहा था तब उन्होंने सिमोग मंदिर एवं डिमऊ मंदिर से देवताओं को छाये पालकी के जागडे़ के साथ रात्रि प्रवास पर अपने घर लाने की मन्नत की थी।
मंगलवार को प्राचीन मंदिर डिमऊ मंदिर से एक और सिमोग से तीन देवताओं की पालकियां छाये पालकी जागडे़ के साथ सुबह मंदिर से बाहर निकलकर हजारों पद यात्रियों के साथ कोटा पहुंचीं। जहां देवदर्शन को आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। जयकारों के साथ देवताओं का जगह जगह स्वागत किया गया। मंदिर समिति अध्यक्ष कुंवर सिंह, पुजारी प्रेमदत्त ने बताया कि सिमोग मंदिर के देवता कभी वाहन में बैठकर यात्रा नहीं करते, पालकियां पद यात्रियों के साथ ही प्रवास पर जाती हैं। वहीं, डिमऊ से परशुराम देवता की पालकी भी लाव लश्कर के साथ पहुंची। देवताओं के सम्मान में रात को देव गीत गाए गए। हाथू जोडी तांके ढालरे देवा.., मनोरी कर कामना पूरी देवा... गीतों पर लोग खूब झूमे। प्रवास के बाद बुधवार को चारों पालकियां वापस लौटेंगी।
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पद यात्रा में डिमऊ मंदिर के वजीर जवाहर सिंह चौहान, मायाराम, माधुराम, नारायण दत्त, ठेमिया शर्मा, संतराम भंडारी, अतर सिंह, सीता राम, विरेंद्र सिंह, रूपराम, कांतिराम, इंदर सिंह, राजेंद्र प्रसाद, नुपाराम चौहान, बीएस चौहान, रणवीर सिंह, सियाराम, कुंदन आदि शामिल रहे।
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कालसी। कोटा के ग्रामीणों के लिए मंगलवार का दिन मंगलमय रहा। कालसी ब्लॉक के सिमोग मंदिर से तीन देवताओं शिलगुर, विजट, चुड़ेश्वर और डिमऊ से परशुराम देवता की पालकियां रात्रि प्रवास पर कोटा गांव पहुंचीं। चार देवताओं के एक साथ दर्शन को आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। हजारों की संख्या में लोग देवदर्शन के लिए पहुंचे। देव पालकियां जहां से भी गुजरीं, वहां भक्तों का तांता लगा रहा।
जनजाति क्षेत्र जौनसार बावर की धार्मिक मान्यताएं हैं कि जब कोई परिवार दुख और विपत्तियों से गुजरता है तो वह अपने कुल और ईष्ट देवताओं को याद करते हुए सुखी होने की कामना करता है। मनोकामना पूरी होने पर देवताओं को एक रात के प्रवास पर अपने घर आमंत्रित करता है। इसी परंपरा के तहत सिमोग मंदिर से तीन देवताओं की पालकियां और डिमऊ मंदिर से एक देवता की पालकी कोटा गांव निवासी ध्यान सिंह चौहान के घर पहुंची। ध्यान सिंह ने बताया कि उनका परिवार भी एक समय विपत्तियों से गुजर रहा था तब उन्होंने सिमोग मंदिर एवं डिमऊ मंदिर से देवताओं को छाये पालकी के जागडे़ के साथ रात्रि प्रवास पर अपने घर लाने की मन्नत की थी।
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मंगलवार को प्राचीन मंदिर डिमऊ मंदिर से एक और सिमोग से तीन देवताओं की पालकियां छाये पालकी जागडे़ के साथ सुबह मंदिर से बाहर निकलकर हजारों पद यात्रियों के साथ कोटा पहुंचीं। जहां देवदर्शन को आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। जयकारों के साथ देवताओं का जगह जगह स्वागत किया गया। मंदिर समिति अध्यक्ष कुंवर सिंह, पुजारी प्रेमदत्त ने बताया कि सिमोग मंदिर के देवता कभी वाहन में बैठकर यात्रा नहीं करते, पालकियां पद यात्रियों के साथ ही प्रवास पर जाती हैं। वहीं, डिमऊ से परशुराम देवता की पालकी भी लाव लश्कर के साथ पहुंची। देवताओं के सम्मान में रात को देव गीत गाए गए। हाथू जोडी तांके ढालरे देवा.., मनोरी कर कामना पूरी देवा... गीतों पर लोग खूब झूमे। प्रवास के बाद बुधवार को चारों पालकियां वापस लौटेंगी।
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पद यात्रा में डिमऊ मंदिर के वजीर जवाहर सिंह चौहान, मायाराम, माधुराम, नारायण दत्त, ठेमिया शर्मा, संतराम भंडारी, अतर सिंह, सीता राम, विरेंद्र सिंह, रूपराम, कांतिराम, इंदर सिंह, राजेंद्र प्रसाद, नुपाराम चौहान, बीएस चौहान, रणवीर सिंह, सियाराम, कुंदन आदि शामिल रहे।