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कानून के छात्रों ने किया मूट कोर्ट का ट्रायल
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर।
इक्फाई विश्वविद्यालय सेलाकुई में चल रही तीन दिवसीय राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता के दूसरे दिन काल्पनिक कोर्ट रूम बनाया गया, जिसमें मूट कोर्ट ट्रायल का आयोजन हुआ। ट्रायल में कानून के 23 संस्थानों के 69 छात्र-छात्राओं ने न्यायालयों में चलने वाली प्रक्रिया का प्रदर्शन किया।
विवि के कुलपति डॉ. पवन कुमार अग्रवाल ने कहा कि ट्रायल का मुख्य उद्देश्य है कि कानून के छात्र भविष्य में लोगों को निष्पक्ष न्याय दिला सकें। ट्रायल के दौरान धारा 307, धारा 120बी, धारा 34 भारतीय दंड संहिता के अधीन एक वाद पत्र छात्रों की ओर से प्रस्तुत किया गया। साथ ही छात्रों ने धारा 370 की प्रासंगिकता सहित कई अन्य महत्वपूर्ण मसलों पर आपस में बहस की। काल्पनिक कोर्ट रूम में कई वादों पर सुनवाई की गई, जिसमें दो पक्षों की बहस के बाद निर्णय सुनाया गया। साथ ही कानून के छात्रों ने देश की ज्वलंत समस्याओं पर भी चर्चा की।
कुलपति डॉ. अग्रवाल ने कहा कि छात्रों को ईमानदार बने रहने और भविष्य में न्याय को सुलभता से मुहैया कराने की नसीहत दी। उन्होंने देश भर से आए कानून के छात्रों से कहा कि न्याय दिलाना पेशा नहीं बल्कि धर्म है। न्यायिक प्रक्रिया को पेशे से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। न्यायपालिका से जुड़ा प्रत्येक व्यक्ति अपने न्यायिक धर्म का निर्वहन करता है। इस दौरान डॉ. युगल किशोर, सुनील कुमार, सौरभ सिद्धार्थ, अवनीश भट्ट, साक्षी मिश्रा, प्रिया मिश्रा, आकार श्रीवास्तव, मनस्वी गुप्ता, प्रशस्ति राजपाल, आस्तीक थपलियाल आदि मौजूद रहे।
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इक्फाई विश्वविद्यालय सेलाकुई में चल रही तीन दिवसीय राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता के दूसरे दिन काल्पनिक कोर्ट रूम बनाया गया, जिसमें मूट कोर्ट ट्रायल का आयोजन हुआ। ट्रायल में कानून के 23 संस्थानों के 69 छात्र-छात्राओं ने न्यायालयों में चलने वाली प्रक्रिया का प्रदर्शन किया।
विवि के कुलपति डॉ. पवन कुमार अग्रवाल ने कहा कि ट्रायल का मुख्य उद्देश्य है कि कानून के छात्र भविष्य में लोगों को निष्पक्ष न्याय दिला सकें। ट्रायल के दौरान धारा 307, धारा 120बी, धारा 34 भारतीय दंड संहिता के अधीन एक वाद पत्र छात्रों की ओर से प्रस्तुत किया गया। साथ ही छात्रों ने धारा 370 की प्रासंगिकता सहित कई अन्य महत्वपूर्ण मसलों पर आपस में बहस की। काल्पनिक कोर्ट रूम में कई वादों पर सुनवाई की गई, जिसमें दो पक्षों की बहस के बाद निर्णय सुनाया गया। साथ ही कानून के छात्रों ने देश की ज्वलंत समस्याओं पर भी चर्चा की।
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कुलपति डॉ. अग्रवाल ने कहा कि छात्रों को ईमानदार बने रहने और भविष्य में न्याय को सुलभता से मुहैया कराने की नसीहत दी। उन्होंने देश भर से आए कानून के छात्रों से कहा कि न्याय दिलाना पेशा नहीं बल्कि धर्म है। न्यायिक प्रक्रिया को पेशे से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। न्यायपालिका से जुड़ा प्रत्येक व्यक्ति अपने न्यायिक धर्म का निर्वहन करता है। इस दौरान डॉ. युगल किशोर, सुनील कुमार, सौरभ सिद्धार्थ, अवनीश भट्ट, साक्षी मिश्रा, प्रिया मिश्रा, आकार श्रीवास्तव, मनस्वी गुप्ता, प्रशस्ति राजपाल, आस्तीक थपलियाल आदि मौजूद रहे।
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