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मानव और वनों का चोली दामन का साथ : डीएफओ
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
सेलाकुई। भूमि संरक्षण वन प्रभाग कालसी की चौहड़पुर रेंज के कर्मियों ने सहसपुर परिसर में ग्रामीणों को वन्यजीव सुरक्षा के लिए जागरूक किया। प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) कालसी रंगनाथ पांडेय ने मानव-वन्यजीव संघर्ष से बचने के लिए वनों को आग से बचाने, अनावश्यक दोहन रोकने को प्रेरित किया।
डीएफओ ने कहा कि मानव और वनों का चोली-दामन का साथ है। वनों से ही मानव को शुद्ध हवा व जल की आपूर्ति होने के साथ ही आर्थिक संसाधनों की पूर्ति भी होती है। हरे-भरे वन वन्यजीवों को मानव बस्तियों में आने से रोकते हैं। इससे मानव व वन्यजीव संघर्ष की स्थिति पैदा नहीं होती है। बीते कुछ वर्षों से वनों में मानवीय हस्तक्षेप बढ़ने से वनों के साथ ही वन्यजीवों को भी नुकसान पहुंच रहा है। वन्यजीवों को होने वाले नुकसान से पारिस्थितिकीय तंत्र असंतुलित होने के साथ ही मानव व वन्यजीव संघर्ष बढ़ा है। इससे मानव वन्यजीव दोनों को ही नुकसान पहुंच रहा है। वन्यजीवों की सुरक्षा मानव का नैतिक कर्तव्य है। लिहाजा वनों का अनावश्यक दोहन रोकने के साथ ही वन्यजीवों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। संगोष्ठी में वनों को आग से बचाने के उपाय बताते हुए ग्रामीणों को प्रशिक्षित किया गया। वन कर्मियों ने गांव में वन सुरक्षा दस्ते का गठन कर ग्रामीणों को जागरूक किया। इस दौरान वन क्षेत्राधिकारी एडी सिद्दीकी, कुलदीप पंवार, दीपक उनियाल, रामकरण, मेहर सिंह, सलीम, मुश्ताक, दिनेश कुकरेती, सत्येंद्र रावत, सुरेंद्र कंडवाल, मनोज कुकरेती, मीनाक्षी, अनीता, रीता आदि मौजूद रहीं।
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सेलाकुई। भूमि संरक्षण वन प्रभाग कालसी की चौहड़पुर रेंज के कर्मियों ने सहसपुर परिसर में ग्रामीणों को वन्यजीव सुरक्षा के लिए जागरूक किया। प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) कालसी रंगनाथ पांडेय ने मानव-वन्यजीव संघर्ष से बचने के लिए वनों को आग से बचाने, अनावश्यक दोहन रोकने को प्रेरित किया।
डीएफओ ने कहा कि मानव और वनों का चोली-दामन का साथ है। वनों से ही मानव को शुद्ध हवा व जल की आपूर्ति होने के साथ ही आर्थिक संसाधनों की पूर्ति भी होती है। हरे-भरे वन वन्यजीवों को मानव बस्तियों में आने से रोकते हैं। इससे मानव व वन्यजीव संघर्ष की स्थिति पैदा नहीं होती है। बीते कुछ वर्षों से वनों में मानवीय हस्तक्षेप बढ़ने से वनों के साथ ही वन्यजीवों को भी नुकसान पहुंच रहा है। वन्यजीवों को होने वाले नुकसान से पारिस्थितिकीय तंत्र असंतुलित होने के साथ ही मानव व वन्यजीव संघर्ष बढ़ा है। इससे मानव वन्यजीव दोनों को ही नुकसान पहुंच रहा है। वन्यजीवों की सुरक्षा मानव का नैतिक कर्तव्य है। लिहाजा वनों का अनावश्यक दोहन रोकने के साथ ही वन्यजीवों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। संगोष्ठी में वनों को आग से बचाने के उपाय बताते हुए ग्रामीणों को प्रशिक्षित किया गया। वन कर्मियों ने गांव में वन सुरक्षा दस्ते का गठन कर ग्रामीणों को जागरूक किया। इस दौरान वन क्षेत्राधिकारी एडी सिद्दीकी, कुलदीप पंवार, दीपक उनियाल, रामकरण, मेहर सिंह, सलीम, मुश्ताक, दिनेश कुकरेती, सत्येंद्र रावत, सुरेंद्र कंडवाल, मनोज कुकरेती, मीनाक्षी, अनीता, रीता आदि मौजूद रहीं।
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