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क्षतिग्रस्त पेयजल योजनाएं बिगाड़ रही सेहत
Updated Fri, 02 Nov 2018 01:40 AM IST
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- जौनसार बावर क्षेत्र में 203 पेयजल लाइनें क्षतिग्रस्त
ब्यूरो/अमर उजाला
विकासनगर। चकराता और कालसी विकासखंड में क्षतिग्रस्त पेयजल लाइनें लोगों की सेहत बिगाड़ रही हैं। दूषित पानी पीने से लोग बीमार हो रहे हैं। कई गांवों में लोग ऐसे खड्डों से प्यास बुझाने को मजबूर हैं, जहां पशु पानी पीते हैं। ऐसे में लोगों के बीमार होने की आशंका बनी हुई है।
बीते कुछ सालों में 203 पेयजल लाइनें मरम्मत के अभाव में पूरी तरह से दम तोड़ चुकी हैं। करीब 6000 से अधिक की आबादी प्यास बुझाने के लिए पूरी तरह से गाड-गदेरों के ऊपर निर्भर होकर रह गई है। लोगों को प्यास बुझाने के लिए मीलों दूर से पानी ढोना पड़ रहा है। 100 से अधिक गांव में साफ पानी की सप्लाई नहीं हो पा रही है। जिन गांवों में पानी की सप्लाई हो रही हैं तो वहां पर लोगों ने प्लास्टिक के पाइपों के सहारे पेयजल आपूर्ति को बहाल किया हुआ है।
ग्रामीण श्याम सिंह, भगतराम, सहजराम, मायाराम, डोगरू आदि का कहना है कि शिकायत के बाद भी विभाग लाइनों की मरम्मत नहीं करा रहा है। पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त होने से सर्दियों और गर्मियों में पानी का संकट बढ़ जाता है।
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ये पेयजल लाइनें हैं क्षतिग्रस्त
क्षेत्र में कुडाली खड्ड से बैरावा, काठीगाड़, पुनाह पोखरी, डिरनाड़, कोटी-बिसाइला, बुल्हाड़, लाखामंडल, चिताड़, माख्टी, खाटुवा, ककोटा, बानसू खड्ड-धनपोग, सुनबाग-बिरसाल समेत 203 पेयजल लाइनें क्षतिग्रस्त पड़ी हैं।
बयान
मामले में अवर अभियंता से रिपोर्ट मांगी गई है। शीघ्र ही क्षतिग्रस्त लाइनों की मरम्मत का प्रस्ताव बना शासन को भेजा जाएगा।
- एसके बर्नवाल, अधिशासी अभियंता, जल निगम
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ब्यूरो/अमर उजाला
विकासनगर। चकराता और कालसी विकासखंड में क्षतिग्रस्त पेयजल लाइनें लोगों की सेहत बिगाड़ रही हैं। दूषित पानी पीने से लोग बीमार हो रहे हैं। कई गांवों में लोग ऐसे खड्डों से प्यास बुझाने को मजबूर हैं, जहां पशु पानी पीते हैं। ऐसे में लोगों के बीमार होने की आशंका बनी हुई है।
बीते कुछ सालों में 203 पेयजल लाइनें मरम्मत के अभाव में पूरी तरह से दम तोड़ चुकी हैं। करीब 6000 से अधिक की आबादी प्यास बुझाने के लिए पूरी तरह से गाड-गदेरों के ऊपर निर्भर होकर रह गई है। लोगों को प्यास बुझाने के लिए मीलों दूर से पानी ढोना पड़ रहा है। 100 से अधिक गांव में साफ पानी की सप्लाई नहीं हो पा रही है। जिन गांवों में पानी की सप्लाई हो रही हैं तो वहां पर लोगों ने प्लास्टिक के पाइपों के सहारे पेयजल आपूर्ति को बहाल किया हुआ है।
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ग्रामीण श्याम सिंह, भगतराम, सहजराम, मायाराम, डोगरू आदि का कहना है कि शिकायत के बाद भी विभाग लाइनों की मरम्मत नहीं करा रहा है। पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त होने से सर्दियों और गर्मियों में पानी का संकट बढ़ जाता है।
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ये पेयजल लाइनें हैं क्षतिग्रस्त
क्षेत्र में कुडाली खड्ड से बैरावा, काठीगाड़, पुनाह पोखरी, डिरनाड़, कोटी-बिसाइला, बुल्हाड़, लाखामंडल, चिताड़, माख्टी, खाटुवा, ककोटा, बानसू खड्ड-धनपोग, सुनबाग-बिरसाल समेत 203 पेयजल लाइनें क्षतिग्रस्त पड़ी हैं।
बयान
मामले में अवर अभियंता से रिपोर्ट मांगी गई है। शीघ्र ही क्षतिग्रस्त लाइनों की मरम्मत का प्रस्ताव बना शासन को भेजा जाएगा।
- एसके बर्नवाल, अधिशासी अभियंता, जल निगम