{"_id":"5bbfb2f4bdec2250153de93a","slug":"153928981720-rishikesh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"...शायद जिंदगी चंद दिनों की मेहमान है","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
...शायद जिंदगी चंद दिनों की मेहमान है
Updated Fri, 12 Oct 2018 02:00 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। प्रो. जीडी अग्रवाल उर्फ स्वामी सानंद गंगत्व के हिमायती थे। उनका जाना पूरे देश और गंगा की हानि है। यह जानकारी दीदी विभा व ब्रह्मचारिणी समर्पिता ने दी। दीदी समर्पिता बताती हैं कि स्वामी सानंद सरकारों के रवैये से निराश हो चुके थे। वे अक्सर कहते थे कि अब किसी के पास मत जाओ... शायद जिंदगी चंद दिनों की मेहमान है। अंतत: वही हुआ...जैसे उन्हें देह छोड़ने का अंदाजा पहले से ही हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि हम उनके विचारों के अनुयायी हैं।
गंगा को लेकर जितना अध्ययन स्वामी सानंद का रहा उतना पूरे विश्व में किसी का नहीं है। वह आईआईटी में प्रोफेसर रहे लिहाजा उनका दृष्टिकोण गंगा को लेकर पूरी तरह वैज्ञानिक था। एम्स में भर्ती होने के बाद वे चिकित्सकों से भी गंगत्व को लेकर वैज्ञानिक तथ्यों पर वार्ता करते थे। दीदी विभा ने यादें ताजा करते हुए कहा कि अक्सर वे कहा करते थे कि मेरे शरीर को गंगा के आस पास ही रहने दो। दिल्ली मत भेजो। उन्होंने बताया कि एम्स ऋषिकेश में भर्ती होने के बाद कई बार चिकित्सकों ने दिल्ली एम्स रेफर करने की बात कही थी। इससे स्वामी सानंद का मन उचाट हो जाया करता था। स्वामी सानंद के विचारों की अनुयायी ब्रह्मचारिणी समर्पिता का कहना है कि सरकार चाहती तो हम गंगा और गंगत्व को लेकर बहुत अच्छा कर सकते थे।
सरकार ने कभी नहीं सुनी स्वामी की बात
दरअसल सरकार ने उनकी बात को कभी सुनना ही नहीं चाहा। प्रो. जीडी अग्रवाल चार मुद्दों को लेकर अनशन पर थे- पहला, गंगा परिषद बने। यह एक आटोनोमस बॉडी हो जिस पर सरकार का नियंत्रण न हो। दूसरा, उत्तराखंड में चल रही चार परियोजनाओं को रोका जाए। तीसरा, गंगा संरक्षण के लिए खास तौर पर एक्ट बने। चौथा, गंगा में खनन का मूल्यांकन किया जाए। गौरतलब है कि स्वामी सानंद ने खुद भी गंगा संरक्षण एक्ट का खाका तैयार किया था, जिसे वह लागू करना चाह रहे थे। दीदी समर्पिता ने बताया कि कई बार स्वामी सानंद कहते थे कि सरकार के प्रतिनिधि अनशन तुड़वाने तो चले आते हैं लेकिन हर बार मुद्दों से हटकर उनका प्रस्ताव होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
गंगा को लेकर जितना अध्ययन स्वामी सानंद का रहा उतना पूरे विश्व में किसी का नहीं है। वह आईआईटी में प्रोफेसर रहे लिहाजा उनका दृष्टिकोण गंगा को लेकर पूरी तरह वैज्ञानिक था। एम्स में भर्ती होने के बाद वे चिकित्सकों से भी गंगत्व को लेकर वैज्ञानिक तथ्यों पर वार्ता करते थे। दीदी विभा ने यादें ताजा करते हुए कहा कि अक्सर वे कहा करते थे कि मेरे शरीर को गंगा के आस पास ही रहने दो। दिल्ली मत भेजो। उन्होंने बताया कि एम्स ऋषिकेश में भर्ती होने के बाद कई बार चिकित्सकों ने दिल्ली एम्स रेफर करने की बात कही थी। इससे स्वामी सानंद का मन उचाट हो जाया करता था। स्वामी सानंद के विचारों की अनुयायी ब्रह्मचारिणी समर्पिता का कहना है कि सरकार चाहती तो हम गंगा और गंगत्व को लेकर बहुत अच्छा कर सकते थे।
विज्ञापन
सरकार ने कभी नहीं सुनी स्वामी की बात
दरअसल सरकार ने उनकी बात को कभी सुनना ही नहीं चाहा। प्रो. जीडी अग्रवाल चार मुद्दों को लेकर अनशन पर थे- पहला, गंगा परिषद बने। यह एक आटोनोमस बॉडी हो जिस पर सरकार का नियंत्रण न हो। दूसरा, उत्तराखंड में चल रही चार परियोजनाओं को रोका जाए। तीसरा, गंगा संरक्षण के लिए खास तौर पर एक्ट बने। चौथा, गंगा में खनन का मूल्यांकन किया जाए। गौरतलब है कि स्वामी सानंद ने खुद भी गंगा संरक्षण एक्ट का खाका तैयार किया था, जिसे वह लागू करना चाह रहे थे। दीदी समर्पिता ने बताया कि कई बार स्वामी सानंद कहते थे कि सरकार के प्रतिनिधि अनशन तुड़वाने तो चले आते हैं लेकिन हर बार मुद्दों से हटकर उनका प्रस्ताव होता है।
विज्ञापन