{"_id":"5baa6587867a557ead23eb75","slug":"15378937465-karnpryag-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"देवडोलियों की विदाई के पल छलछलाई श्रद्घालुओं की आंखें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
देवडोलियों की विदाई के पल छलछलाई श्रद्घालुओं की आंखें
Updated Tue, 25 Sep 2018 10:16 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
कर्णप्रयाग। क्षेत्र भ्रमण पर निकली टिहरी के प्रतापनगर की मिश्रवाण गांव की श्रीभद्रकाली, आकाशभैरव की डोली और नागराज के निशाण को टिहरी के लिए विदा किया गया। विदाई के दौरान श्रद्धालुओं की आंखें छलछला उठीं। इस दौरान देवताओं के पश्वाओं ने देवनृत्य कर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया। भद्रकाली, आकाशभैरव और उमा देवी के जयकारों से नगर गुंजायमान रहा।
आठ दिनों तक मिश्रवाण गांव की ईष्ट देवी श्रीभद्रकाली और आकाश भैरव की डोलियां कर्णप्रयाग में रहीं। आठ दिनों तक सुबह देव डोलियों की पूजा और रात को जागरण किया गया। दिन में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया। मिश्रवाण रैपाल मिश्रवाण सहित अन्य ने बताया कि देवी की आज्ञा से ही किसी भी क्षेत्र में ऐसे आयोजन किए जाते हैं। मंगलवार सुबह पूजा के बाद श्रीमद्भागवत कथा का समापन हुआ। नवीन डिमरी ने भंडारे का आयोजन किया। इसके बाद डा. मदन मोहन नवानी, वीरेंद्र मिंगवाल, संजय नवानी आदि ने श्रीभद्रकाली, आकाशभैरव की डोली और नागराज के निशाण को बाजे भंकारों के साथ टिहरी के लिए विदा किया। व्यास आचार्य विहारी लाल सेमवाल ने कर्णप्रयाग के लोगों का आभार जताया। इस दौरान आचार्य रविंद्र चमोली, डा. विजया नवानी, अंकित पैन्यूली, महावीर मिश्रवाण, भगवान मिश्रवाण, मनोरमा नैनवाल, दमयंती रतूड़ी, किशोरी रतूड़ी, अर्चना सती, विनोद डिमरी, चैता देवी, दिक्केश्वरी नौटियाल आदि मौजूद थे।
आठ दिनों तक मिश्रवाण गांव की ईष्ट देवी श्रीभद्रकाली और आकाश भैरव की डोलियां कर्णप्रयाग में रहीं। आठ दिनों तक सुबह देव डोलियों की पूजा और रात को जागरण किया गया। दिन में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया। मिश्रवाण रैपाल मिश्रवाण सहित अन्य ने बताया कि देवी की आज्ञा से ही किसी भी क्षेत्र में ऐसे आयोजन किए जाते हैं। मंगलवार सुबह पूजा के बाद श्रीमद्भागवत कथा का समापन हुआ। नवीन डिमरी ने भंडारे का आयोजन किया। इसके बाद डा. मदन मोहन नवानी, वीरेंद्र मिंगवाल, संजय नवानी आदि ने श्रीभद्रकाली, आकाशभैरव की डोली और नागराज के निशाण को बाजे भंकारों के साथ टिहरी के लिए विदा किया। व्यास आचार्य विहारी लाल सेमवाल ने कर्णप्रयाग के लोगों का आभार जताया। इस दौरान आचार्य रविंद्र चमोली, डा. विजया नवानी, अंकित पैन्यूली, महावीर मिश्रवाण, भगवान मिश्रवाण, मनोरमा नैनवाल, दमयंती रतूड़ी, किशोरी रतूड़ी, अर्चना सती, विनोद डिमरी, चैता देवी, दिक्केश्वरी नौटियाल आदि मौजूद थे।
विज्ञापन