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जागड़ा पर्व: जौनसार बावर में उमड़ा आस्था का सैलाब
Updated Fri, 14 Sep 2018 02:24 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/विकासनगर/नागथात।
जय महासू...जय महासू...के गगनभेदी उद्घोषों से बृहस्पतिवार को जौनसार बावर की फिजाएं गुंजायमान हो उठी। ढोल-दमाऊ की थाप पर हर तरफ लोग जागड़ा पर्व के उल्लास में डूबे नजर आए। गणेश चतुर्थी और भाद्रपद शुक्ल पक्ष की हरितालिका तीज पर आयोजित जागड़ा पर्व पर देवता की वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच पूजा अर्चना की गई। देव पालकी को कंधा लगाने के लिए श्रद्धालु आतुर दिखे। मंदिरों में देर शाम तक श्रद्धालुओं की कतार लगी रही। रातभर जागकर लोगों ने देवता की स्तुति की। आस्था के प्रतीक कहे जाने वाले लक्सयार गांव स्थित मंदिर में महासू देवता की पालकी को सुबह 10:30 बजे स्नान के लिए डिब्बा स्थित पवित्र जलधारा ले जाया गया। इसके बाद महिलाओं ने पारंपरिक तरीके से पालकी की पूजा अर्चना की। इसके बाद लोगों ने देव पालकी पर फूल, अखरोट और चावलों की बारिश की। इस दौरान देवता के दर्शन और कंधा लगाने के लिए श्रद्धालु आतुर दिखे। शाम होते ही मंदिर परिसर रोशनी से जगमगा उठा।
श्रद्धालु करम सिंह तोमर की ओर से भंडारे का आयोजन किया गया। इस मौके पर मंदिर समिति के अध्यक्ष पं. मुन्नालाल नौटियाल, प्रधान भरत सिंह, दिनेश तोमर, सुरत सिंह तोमर, भंडारी अनुज नौटियाल, वीरेंद्र सिंह, रघुवीर तोमर, बजीर राजेश्वर तोमर, पूर्व सोसायटी अध्यक्ष गुमान सिंह तोमर, युद्धवीर तोमर, महावीर सिंह, गजेंद्र सिंह, सुरेंद्र तोमर, भजन सिंह तोमर, महिपाल सिंह ,अमर सिंह आदि लोग मौजूद रहे। बिसोई गांव स्थित मंदिर में महासू देवता की पालकी को स्नान के लिए नाव पणियान ले जाया गया। लखवाड़ महासू मंदिर देवता मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी पड़ी थी। मंदिरों को विशेष फूल मालाओं से सजाया गया। सुबह चार बजे देवता की विशेष पूजा-अर्चना की गई। इसके उपरांत मंदिर को भक्तों के लिए खोल दिया गया। सुबह 11 बजे ढोल-दमाऊ देव पालकी को पवित्र जलधारा चामा पणियान ले जाया गया। लोगों ने फूल-मालाओं के साथ पालकी का स्वागत किया।
गुंजायमान हुई महासू नगरी
हनोल स्थित महासू मंदिर में बृहस्पतिवार को देवता को स्नान कराया गया। इससे पहले बुधवार को पूरी रात मंदिर परिसर में जागर का आयोजन किया गया। हनोल, चातरा, भ्यूलाड़ा, कूपा, भट्टा, ठडियार, भंखवाड़, बागीय चौसाल समेत कई गांव से हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने जागड़ा में हिस्सा लिया। वहीं, बाशिक देवता मंदिर मेंद्रथ, टुंगरा, गबेला, पबासी देवता ठडियार, शेड़कुड़िया देवता रायगी, चालदा देवता थरोच, थैना, चिल्हाड़ स्थित महासू मंदिर में भी पर्व की धूम रही। लोगों न देव दर्शन कर सुख समृद्धि की कामना की। इन जगहों पर भी देव पालकी को स्नान के लिए पवित्र जलधारा पर ले जाया गया।
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जय महासू...जय महासू...के गगनभेदी उद्घोषों से बृहस्पतिवार को जौनसार बावर की फिजाएं गुंजायमान हो उठी। ढोल-दमाऊ की थाप पर हर तरफ लोग जागड़ा पर्व के उल्लास में डूबे नजर आए। गणेश चतुर्थी और भाद्रपद शुक्ल पक्ष की हरितालिका तीज पर आयोजित जागड़ा पर्व पर देवता की वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच पूजा अर्चना की गई। देव पालकी को कंधा लगाने के लिए श्रद्धालु आतुर दिखे। मंदिरों में देर शाम तक श्रद्धालुओं की कतार लगी रही। रातभर जागकर लोगों ने देवता की स्तुति की। आस्था के प्रतीक कहे जाने वाले लक्सयार गांव स्थित मंदिर में महासू देवता की पालकी को सुबह 10:30 बजे स्नान के लिए डिब्बा स्थित पवित्र जलधारा ले जाया गया। इसके बाद महिलाओं ने पारंपरिक तरीके से पालकी की पूजा अर्चना की। इसके बाद लोगों ने देव पालकी पर फूल, अखरोट और चावलों की बारिश की। इस दौरान देवता के दर्शन और कंधा लगाने के लिए श्रद्धालु आतुर दिखे। शाम होते ही मंदिर परिसर रोशनी से जगमगा उठा।
श्रद्धालु करम सिंह तोमर की ओर से भंडारे का आयोजन किया गया। इस मौके पर मंदिर समिति के अध्यक्ष पं. मुन्नालाल नौटियाल, प्रधान भरत सिंह, दिनेश तोमर, सुरत सिंह तोमर, भंडारी अनुज नौटियाल, वीरेंद्र सिंह, रघुवीर तोमर, बजीर राजेश्वर तोमर, पूर्व सोसायटी अध्यक्ष गुमान सिंह तोमर, युद्धवीर तोमर, महावीर सिंह, गजेंद्र सिंह, सुरेंद्र तोमर, भजन सिंह तोमर, महिपाल सिंह ,अमर सिंह आदि लोग मौजूद रहे। बिसोई गांव स्थित मंदिर में महासू देवता की पालकी को स्नान के लिए नाव पणियान ले जाया गया। लखवाड़ महासू मंदिर देवता मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी पड़ी थी। मंदिरों को विशेष फूल मालाओं से सजाया गया। सुबह चार बजे देवता की विशेष पूजा-अर्चना की गई। इसके उपरांत मंदिर को भक्तों के लिए खोल दिया गया। सुबह 11 बजे ढोल-दमाऊ देव पालकी को पवित्र जलधारा चामा पणियान ले जाया गया। लोगों ने फूल-मालाओं के साथ पालकी का स्वागत किया।
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गुंजायमान हुई महासू नगरी
हनोल स्थित महासू मंदिर में बृहस्पतिवार को देवता को स्नान कराया गया। इससे पहले बुधवार को पूरी रात मंदिर परिसर में जागर का आयोजन किया गया। हनोल, चातरा, भ्यूलाड़ा, कूपा, भट्टा, ठडियार, भंखवाड़, बागीय चौसाल समेत कई गांव से हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने जागड़ा में हिस्सा लिया। वहीं, बाशिक देवता मंदिर मेंद्रथ, टुंगरा, गबेला, पबासी देवता ठडियार, शेड़कुड़िया देवता रायगी, चालदा देवता थरोच, थैना, चिल्हाड़ स्थित महासू मंदिर में भी पर्व की धूम रही। लोगों न देव दर्शन कर सुख समृद्धि की कामना की। इन जगहों पर भी देव पालकी को स्नान के लिए पवित्र जलधारा पर ले जाया गया।
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