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पर्यावरण संरक्षण के साथ मनाएं पर्व:चिदानंद मुनि
Updated Fri, 14 Sep 2018 02:24 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि के सानिध्य में आश्रम गुरुकुल वीरपुरखुर्द के ऋषिकुमारों ने मिट्टी के श्रीगणेश भगवान बनाकर पर्यावरण संवर्धन का संदेश दिया। गणेश चतुर्थी के अवसर पर परमार्थ निकेतन के ऋषिकुमारों ने आश्रमाध्यक्ष चिदानंद सरस्वती मुनि के सानिध्य में श्रीगणेश की स्थापना एवं पूजन किया। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि मिट्टी की मूर्तियों की स्थापना करें, जिससे पर्यावरण का संरक्षण होगा। साथ ही मूर्तियों का विसर्जन जल में नहीं करके उसी मिट्टी को गमलों में डालकर, उसमें पौधों का रोपण करें।
ऐसा करने से श्रीगणेश प्रतिमा विसर्जन से पौधों के सृजन का एक नया संकल्प उभरेगा। कहा कि हमें पर्व को इस तरह से मनाना चाहिए जिससे परंपराओं के साथ ही पर्यावरण का संवर्धन भी हो सके। इस अवसर पर उन्होंने कहा श्रीगणेश भगवान शिव व माता पार्वती के पुत्र हैं, जो कि तैंतीस करोड़ देवी देवताओं में प्रथम पूज्य हैं। गणेश भगवान के प्रत्येक अंग से हमें शिक्षा प्राप्त होती है। गणेशजी के वाहन मूषक और उनके मुख पर हाथी की सूंड उनके अगाध पशु प्रेम की भावनाओं को दर्शाता है।
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ऐसा करने से श्रीगणेश प्रतिमा विसर्जन से पौधों के सृजन का एक नया संकल्प उभरेगा। कहा कि हमें पर्व को इस तरह से मनाना चाहिए जिससे परंपराओं के साथ ही पर्यावरण का संवर्धन भी हो सके। इस अवसर पर उन्होंने कहा श्रीगणेश भगवान शिव व माता पार्वती के पुत्र हैं, जो कि तैंतीस करोड़ देवी देवताओं में प्रथम पूज्य हैं। गणेश भगवान के प्रत्येक अंग से हमें शिक्षा प्राप्त होती है। गणेशजी के वाहन मूषक और उनके मुख पर हाथी की सूंड उनके अगाध पशु प्रेम की भावनाओं को दर्शाता है।
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