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तीन साल से फाइलों में कैद लंगासू का बिजली घर
Updated Sat, 30 Jun 2018 10:40 PM IST
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कर्णप्रयाग। लंगासू में पूर्व सीएम हरीश रावत की ओर से घोषित बिजली घर तीन साल से ऊर्जा निगम की फाइलों में घूम रहा है। निगम तीन सालों में बिजली घर बनाने के लिए जमीन की तलाश भी नहीं कर पाया है।
अलकनंदा नदी के दोनों ओर सोनला तक कर्णप्रयाग और जिलासू तहसील के करीब 100 से अधिक गांव हैं। इन गांवों के लिए ऊर्जा निगम एक मात्र जिलासू फीडर से बिजली की आपूर्ति करता है, लेकिन दुर्गम क्षेत्र होने के चलते यहां आए दिन बिजली की लाइनों में दिक्कतें आती हैं। इस कारण कई दिनों तक दर्जनों गांवों की बिजली गुल रहती है साथ ही लो-वोल्टेज और अन्य समस्याओं से भी लोगों को जूझना पड़ता है। प्रधान संघ के उपाध्यक्ष राकेश लाल, संदीप खंडूड़ी, सुमन सिंह, दशमद्वार विकास मंच के कोषाध्यक्ष ताजवर सिंह नेगी और जितेंद्र कुमार आदि का कहना है कि लोगों की मांग पर वर्ष 2015 में तत्कालीन सीएम हरीश रावत ने जिलासू में 33केवी विद्युत सबस्टेशन बनाने की घोषणा की, लेकिन ऊर्जा निगम को स्वीकृति मिलने के बाद भी इस विद्युत सब स्टेशन की स्थापना नहीं हो पाई है। दूसरी ओर ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता डीएस चौधरी का कहना है कि लंगासू के आसपास बिजली घर के लिए भूमि उपलब्ध नहीं हो पा रही है। करीब आठ नाली भूमि में बनने वाले विद्युत सब स्टेशन के लिए राजस्व विभाग सहित प्रधानों को पत्र लिखा गया है।
अलकनंदा नदी के दोनों ओर सोनला तक कर्णप्रयाग और जिलासू तहसील के करीब 100 से अधिक गांव हैं। इन गांवों के लिए ऊर्जा निगम एक मात्र जिलासू फीडर से बिजली की आपूर्ति करता है, लेकिन दुर्गम क्षेत्र होने के चलते यहां आए दिन बिजली की लाइनों में दिक्कतें आती हैं। इस कारण कई दिनों तक दर्जनों गांवों की बिजली गुल रहती है साथ ही लो-वोल्टेज और अन्य समस्याओं से भी लोगों को जूझना पड़ता है। प्रधान संघ के उपाध्यक्ष राकेश लाल, संदीप खंडूड़ी, सुमन सिंह, दशमद्वार विकास मंच के कोषाध्यक्ष ताजवर सिंह नेगी और जितेंद्र कुमार आदि का कहना है कि लोगों की मांग पर वर्ष 2015 में तत्कालीन सीएम हरीश रावत ने जिलासू में 33केवी विद्युत सबस्टेशन बनाने की घोषणा की, लेकिन ऊर्जा निगम को स्वीकृति मिलने के बाद भी इस विद्युत सब स्टेशन की स्थापना नहीं हो पाई है। दूसरी ओर ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता डीएस चौधरी का कहना है कि लंगासू के आसपास बिजली घर के लिए भूमि उपलब्ध नहीं हो पा रही है। करीब आठ नाली भूमि में बनने वाले विद्युत सब स्टेशन के लिए राजस्व विभाग सहित प्रधानों को पत्र लिखा गया है।
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