{"_id":"5b2695094f1c1bf86e8b86a6","slug":"152925517917-shrinagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद बोले","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद बोले
Updated Sun, 17 Jun 2018 10:52 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
श्रीनगर। गोवर्धन पीठ (पुरी) के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि हरिद्वार से नीचे गंगा सिर्फ नाम की रह गई है। गंगा की वर्तमान स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं, नहर योजनाओं, जल विद्युत परियोजनाओं और सीवर योजनाओं से गंगा को विकृत व दूषित किया जा रहा है। कहा कि सरकार को ऐसी परियोजनाओं को तत्काल निरस्त करना चाहिए।
श्रीनगर के प्रवास के दौरान पत्रकारों से वार्ता करते हुए शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि जब ऊर्जा के स्रोतों को विकृत करने का प्रयास होता है, तो वह तांडव दिखाते हैं। केदारनाथ की घटना इसी का परिणाम थी। यह भविष्य के लिए छोटी सी चेतावनी थी। इसको सरकार और जनता को समझना चाहिए। केदारनाथ धाम में विकास के नाम पर विस्फोट को आमंत्रण दिया जा रहा है। धर्मगुरुओं पर उठ रहे सवाल पर उन्होंने कहा कि दिशाहीन व्यापार तंत्र, प्रचार तंत्र और शासन तंत्र के सहारे जो उठते हैं, उन्हीं के द्वारा वह गिरा दिए जाते हैं। उन्होंने चिंता जताई कि आज राजनीतिक दलों ने अपने-अपने संत खड़े कर चुनावी एजेंट बना दिए हैं। शंकराचार्य ने कहा कि मैकाले की शिक्षा पद्धति से भारत की श्रम, वाणिज्य, मेधा व रक्षा शक्ति देश के काम नहीं आ रही है। यहां की मेधा विदेशी कंपनियों में काम कर रही है। विदेशी लोग भारत वैदिक शिक्षा पद्धति का सम्मान करते हैं। इससे पूर्व शंकराचार्य ने शनिवार शाम और रविवार को लोगों की धर्म संबंधी सवालों और शंकाओं का समाधान किया।
विज्ञापन
श्रीनगर के प्रवास के दौरान पत्रकारों से वार्ता करते हुए शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि जब ऊर्जा के स्रोतों को विकृत करने का प्रयास होता है, तो वह तांडव दिखाते हैं। केदारनाथ की घटना इसी का परिणाम थी। यह भविष्य के लिए छोटी सी चेतावनी थी। इसको सरकार और जनता को समझना चाहिए। केदारनाथ धाम में विकास के नाम पर विस्फोट को आमंत्रण दिया जा रहा है। धर्मगुरुओं पर उठ रहे सवाल पर उन्होंने कहा कि दिशाहीन व्यापार तंत्र, प्रचार तंत्र और शासन तंत्र के सहारे जो उठते हैं, उन्हीं के द्वारा वह गिरा दिए जाते हैं। उन्होंने चिंता जताई कि आज राजनीतिक दलों ने अपने-अपने संत खड़े कर चुनावी एजेंट बना दिए हैं। शंकराचार्य ने कहा कि मैकाले की शिक्षा पद्धति से भारत की श्रम, वाणिज्य, मेधा व रक्षा शक्ति देश के काम नहीं आ रही है। यहां की मेधा विदेशी कंपनियों में काम कर रही है। विदेशी लोग भारत वैदिक शिक्षा पद्धति का सम्मान करते हैं। इससे पूर्व शंकराचार्य ने शनिवार शाम और रविवार को लोगों की धर्म संबंधी सवालों और शंकाओं का समाधान किया।
विज्ञापन