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हिमालयी विकास में तकनीक और प्राकृतिक संतुलन जरूरी : राज्यपाल
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देहरादून। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने कहा हिमालयी विकास में तकनीक और प्राकृतिक संतुलन जरूरी है। उन्होंने मानव कल्याण व प्रकृति संरक्षण के लिए एआई के सही उपयोग पर जोर दिया।
लोक भवन में पर्यावरण और एआई विषय पर आयोजित संगोष्ठी में पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, हिमालयी पारिस्थितिकी और एआई के बेहतर उपयोग पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए। राज्यपाल ने कहा, आज दुनिया के सामने पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जलवायु परिवर्तन बड़ी चुनौतियां हैं। ऐसे समय में 21वीं सदी की महत्वपूर्ण उपलब्धि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को प्रकृति के साथ जोड़कर देखने की आवश्यकता है। हमारी चुनौतियां ही हमारे लिए अवसर भी बन सकती हैं, यदि हम तकनीक के माध्यम से उनके समाधान खोजने का प्रयास करें। राज्यपाल ने कहा, आने वाले समय में वैश्विक प्रतिस्पर्धा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, आधुनिक तकनीक और विनिर्माण क्षेत्र इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने युवाओं से नवाचार और तकनीकी ज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
वहीं, हेस्को के संस्थापक पद्मभूषण डॉ.अनिल प्रकाश जोशी ने प्रकृति और नैसर्गिक बुद्धिमत्ता (नेचुरल इंटेलिजेंस) के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर ही वास्तविक और स्थायी समृद्धि हासिल की जा सकती है। भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के अध्यक्ष एवं वैज्ञानिक डॉ. शेखर सी. मांडे ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मूल अवधारणा और उसके विभिन्न उपयोगों पर जानकारी दी। राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान के महानिदेशक डॉ.एमएम त्रिपाठी ने ऑनलाइन कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित पाठ्यक्रमों के विस्तार पर प्रस्तुति दी। इस मौके पर यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो.दुर्गेश पंत, सचिव राज्यपाल रविनाथ रामन, विधिक सलाहकार कौशल किशोर शुक्ल, वीर माधो सिंह भंडारी तकनीकी विवि की कुलपति प्रो.तृप्ता ठाकुर, इनमोबी की वैश्विक वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ.सुबी चतुर्वेदी, टेक्नो हब के मुख्य तकनीकी अधिकारी सिद्धार्थ माधव मौजूद रहे।
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हिम एआई का शुभारंभ
कार्यक्रम में वीर माधो सिंह भंडारी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन माउंटेन सिस्टम ‘हिम एआई‘ का शुभारंभ किया गया। यह केंद्र हिमालयी क्षेत्रों की विशिष्ट आवश्यकताओं, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और आपदा संबंधी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित समाधान, अनुसंधान एवं नवाचार, सतत विकास तथा आपदा प्रतिरोधक क्षमता के क्षेत्र में कार्य करेगा।
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लोक भवन में पर्यावरण और एआई विषय पर आयोजित संगोष्ठी में पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, हिमालयी पारिस्थितिकी और एआई के बेहतर उपयोग पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए। राज्यपाल ने कहा, आज दुनिया के सामने पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जलवायु परिवर्तन बड़ी चुनौतियां हैं। ऐसे समय में 21वीं सदी की महत्वपूर्ण उपलब्धि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को प्रकृति के साथ जोड़कर देखने की आवश्यकता है। हमारी चुनौतियां ही हमारे लिए अवसर भी बन सकती हैं, यदि हम तकनीक के माध्यम से उनके समाधान खोजने का प्रयास करें। राज्यपाल ने कहा, आने वाले समय में वैश्विक प्रतिस्पर्धा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, आधुनिक तकनीक और विनिर्माण क्षेत्र इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने युवाओं से नवाचार और तकनीकी ज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
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वहीं, हेस्को के संस्थापक पद्मभूषण डॉ.अनिल प्रकाश जोशी ने प्रकृति और नैसर्गिक बुद्धिमत्ता (नेचुरल इंटेलिजेंस) के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर ही वास्तविक और स्थायी समृद्धि हासिल की जा सकती है। भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के अध्यक्ष एवं वैज्ञानिक डॉ. शेखर सी. मांडे ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मूल अवधारणा और उसके विभिन्न उपयोगों पर जानकारी दी। राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान के महानिदेशक डॉ.एमएम त्रिपाठी ने ऑनलाइन कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित पाठ्यक्रमों के विस्तार पर प्रस्तुति दी। इस मौके पर यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो.दुर्गेश पंत, सचिव राज्यपाल रविनाथ रामन, विधिक सलाहकार कौशल किशोर शुक्ल, वीर माधो सिंह भंडारी तकनीकी विवि की कुलपति प्रो.तृप्ता ठाकुर, इनमोबी की वैश्विक वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ.सुबी चतुर्वेदी, टेक्नो हब के मुख्य तकनीकी अधिकारी सिद्धार्थ माधव मौजूद रहे।
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हिम एआई का शुभारंभ
कार्यक्रम में वीर माधो सिंह भंडारी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन माउंटेन सिस्टम ‘हिम एआई‘ का शुभारंभ किया गया। यह केंद्र हिमालयी क्षेत्रों की विशिष्ट आवश्यकताओं, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और आपदा संबंधी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित समाधान, अनुसंधान एवं नवाचार, सतत विकास तथा आपदा प्रतिरोधक क्षमता के क्षेत्र में कार्य करेगा।