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पर्यावरण को दिव्यांग नहीं दिव्य बनाएं : चिदानंद

Tue, 05 Jun 2018 02:00 AM IST
Updated Tue, 05 Jun 2018 02:00 AM IST
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पर्यावरण को दिव्यांग नहीं दिव्य बनाएं : चिदानंद
ब्यूरो/अमर उजाला,मुनिकीरेती ।
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केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्यमंत्री थावर चंद गहलौत ने कहा कि मानस कथा शौर्य, रक्षा और मानवता का संदेश प्रसारित करने वाली दिव्य गाथा है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति को पुरातन व सनातन संस्कृति बताया। हम सभी को अपने भीतर दैवीय गुणों को विकसित कर देश को दिव्यता प्रदान करने का प्रयास करना चाहिए।
सोमवार को परमार्थ निकेतन आश्रम गंगा तट पर आयोजित श्रीराम कथा में केंद्रीय राज्यमंत्री थावर चंद गहलौत, पूर्व मुख्यमंत्री व हरिद्वार सांसद रमेश पोखरियाल निशंक और योग शक्तिपीठ के रसायनी बाबा ने शिरकत की। इस दौरान मानस कथा में महर्षि दयानंद सरस्वती विकलांग आश्रम, नजीबाबाद के करीब 30 दिव्यांग छात्रों ने आध्यात्मिक संगीत की प्रस्तुति भी दी। इस मौके पर दिव्यांग छात्रों ने अपने जन्मदिन पर केक पार्टी नहीं बल्कि पेड़ पार्टी करने का संकल्प भी लिया।
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स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि ने लोगों से प्रकृति को दिव्यांग नहीं दिव्य बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए पर्वों को पर्यावरण से जोड़ना ही बेहतर समाधान है। पर्व और उत्सव के अवसर पर उपहार के तौर पर पेड़ बांटने और पेड़ लगाने की परंपरा को अपनाना पर्यावरण संरक्षण का बेहतर विकल्प है।
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रसायनी बाबा ने कहा कि कथा के श्रवण से ज्ञान, भक्ति और कर्म के साथ पुरुषोत्तम बनने का मार्ग प्रशस्त होता है। इस दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं को पर्यावरण संरक्षण का संकल्प भी दिलाया। सांसद रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि मानस कथा वैदिक संस्कृति के संदेश की मौलिक व्याख्या है। मानस कथा हमें जीवन की शैली सिखाती है व गृहस्थ जीवन का मर्म बताती है।
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