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गढ़वाल विवि के छात्रो ने बनाया धान के भूसे से कार्य करने वाला ब्वॉयलर
Updated Wed, 30 May 2018 10:56 PM IST
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श्रीनगर। गढ़वाल विवि के बीटेक में अध्ययनरत छात्रों ने धान के भूसे से कार्य करने वाला ‘फायर कम वाटर ट्यूब ब्वॉयलर’ बनाया है। छात्रों द्वारा तैयार किया गया ब्वॉयलर विभिन्न उद्योगों के अलग-अलग कार्यों में काम आएगा। विशेषज्ञों ने छात्रों के इस ब्यॉवलर की सराहना की है।
गढ़वाल विवि के बीटेक मैकेनिकल इंजीनियरिंग सत्र 2014-18 के फाइनल सेमेस्टर के छात्रों ने एक ऐसे ब्वायलर का निर्माण किया है, जिसमें ईंधन के लिए कोयले के बजाय धान के भूसे का प्रयोग किया जाएगा। इस ‘फायर कम वाटर ट्यूब ब्वॉयलर’ का फायदा टैक्सटाइल उद्योग, डेरी उद्योग, रंगाई सहित सभी उद्योगों में होगा। ब्वॉयलर से एक लीटर पानी का भाप बनाने में 80 पैसे की लागत आती है। जो कि कोयले के ईंधन से काफी सस्ता है। छात्र दिलारफी, नेहा जोशी, आफतब आलम मौ. फैजी व विपिन पंवार ने बताया कि उक्त ब्वॉयलर को बनाने में 35 हजार की लागत आई है। छात्रों ने इसे 6 माह में बना कर तैयार किया है। छात्रों का कहना है कि अन्य ब्वॉयलरों में ईंधन के लिए कोयले का प्रयोग किया जाता है। जो कि काफी महंगा साबित होता है। जबकि धान के भूसे का किसान कोई प्रयोग नहीं करते और यह आसानी से उपलब्ध भी हो जाता है। बताया कि इस मॉडल का वृहद रूप औद्योगिक क्षेत्र में काफी फायदेमंद होगा। विभाग के शिक्षक डा. मनेाज कुमार गुप्ता व बृजेश गांगली ने इस प्रोजेक्ट में छात्रों का निर्देशन किया है।
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गढ़वाल विवि के बीटेक मैकेनिकल इंजीनियरिंग सत्र 2014-18 के फाइनल सेमेस्टर के छात्रों ने एक ऐसे ब्वायलर का निर्माण किया है, जिसमें ईंधन के लिए कोयले के बजाय धान के भूसे का प्रयोग किया जाएगा। इस ‘फायर कम वाटर ट्यूब ब्वॉयलर’ का फायदा टैक्सटाइल उद्योग, डेरी उद्योग, रंगाई सहित सभी उद्योगों में होगा। ब्वॉयलर से एक लीटर पानी का भाप बनाने में 80 पैसे की लागत आती है। जो कि कोयले के ईंधन से काफी सस्ता है। छात्र दिलारफी, नेहा जोशी, आफतब आलम मौ. फैजी व विपिन पंवार ने बताया कि उक्त ब्वॉयलर को बनाने में 35 हजार की लागत आई है। छात्रों ने इसे 6 माह में बना कर तैयार किया है। छात्रों का कहना है कि अन्य ब्वॉयलरों में ईंधन के लिए कोयले का प्रयोग किया जाता है। जो कि काफी महंगा साबित होता है। जबकि धान के भूसे का किसान कोई प्रयोग नहीं करते और यह आसानी से उपलब्ध भी हो जाता है। बताया कि इस मॉडल का वृहद रूप औद्योगिक क्षेत्र में काफी फायदेमंद होगा। विभाग के शिक्षक डा. मनेाज कुमार गुप्ता व बृजेश गांगली ने इस प्रोजेक्ट में छात्रों का निर्देशन किया है।
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