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सेना के कैंप के पास पहुंची भड़की आग
Updated Thu, 24 May 2018 02:20 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/चकराता।
छावनी क्षेत्र अंतर्गत कालसी मोटर मार्ग से सटे क्वारना गाड़ और तंदावा के जंगलों में आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। जंगल में भड़की आग कुछ ही देर में सेना के कैंप के पास तक जा पहुंची। जिस पर हरकत में आए सेना के जवानों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। आग से एक बड़े क्षेत्रफल में खड़ी वन संपदा जल गई।
तंदावा और क्वारना गांव के ऊपर स्थित जंगल का एक बड़ा भाग छावनी परिषद के अधीन है जबकि, कुछ भाग ग्राम पंचायत अंतर्गत आता है। बुधवार की सुबह जंगल में अचानक आग भड़क उठी। कुछ ही देर में पूरा आसमान धुएं के गुब्बार से काला हो गया। आग तेजी से वन क्षेत्रफल को अपने दायरे में लेते सेना के कैंप के पास तक जा पहुंची। आग को तेजी से बढ़ता देख सेना के अफसरों और जवानों को मोर्चा संभालना पड़ा। करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका।
समाज सेवी इंद्र सिंह नेगी, कप्तान चेतन संजीव चौहान आदि का कहना है कि फायर सीजन में भी वन विभाग के अधिकारी कालसी से बैठ अपने कार्यालय को संचालित कर रहे हैं। जिसके चलते समय पर विभागीय कर्मी घटना स्थल तक नहीं पहुंच पाते। वहीं डीएफओ चकराता दीप चंद आर्य का कहना है कि सभी रेंजाधिकारियों और वन बीट अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में बने रहने के निर्देश दिए हैं।
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छावनी क्षेत्र अंतर्गत कालसी मोटर मार्ग से सटे क्वारना गाड़ और तंदावा के जंगलों में आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। जंगल में भड़की आग कुछ ही देर में सेना के कैंप के पास तक जा पहुंची। जिस पर हरकत में आए सेना के जवानों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। आग से एक बड़े क्षेत्रफल में खड़ी वन संपदा जल गई।
तंदावा और क्वारना गांव के ऊपर स्थित जंगल का एक बड़ा भाग छावनी परिषद के अधीन है जबकि, कुछ भाग ग्राम पंचायत अंतर्गत आता है। बुधवार की सुबह जंगल में अचानक आग भड़क उठी। कुछ ही देर में पूरा आसमान धुएं के गुब्बार से काला हो गया। आग तेजी से वन क्षेत्रफल को अपने दायरे में लेते सेना के कैंप के पास तक जा पहुंची। आग को तेजी से बढ़ता देख सेना के अफसरों और जवानों को मोर्चा संभालना पड़ा। करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका।
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समाज सेवी इंद्र सिंह नेगी, कप्तान चेतन संजीव चौहान आदि का कहना है कि फायर सीजन में भी वन विभाग के अधिकारी कालसी से बैठ अपने कार्यालय को संचालित कर रहे हैं। जिसके चलते समय पर विभागीय कर्मी घटना स्थल तक नहीं पहुंच पाते। वहीं डीएफओ चकराता दीप चंद आर्य का कहना है कि सभी रेंजाधिकारियों और वन बीट अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में बने रहने के निर्देश दिए हैं।
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