{"_id":"5ae62c3a4f1c1bc03d8b5b48","slug":"152503404113-rishikesh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"...और वीरान हो गया सिंदूड़ी गांव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
...और वीरान हो गया सिंदूड़ी गांव
Updated Mon, 30 Apr 2018 02:04 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश।
सरकार की उदासीनता के कारण 180 परिवारों का सिंदूड़ी गांव आज पूरी तरह से वीरान हो गया। गांव में बचे एकमात्र परिवार ने शनिवार की सुबह गांव को अलविदा कह दिया। जिस गांव में कभी शोरगुल हुआ करता था, वहां पर बात करने वाला भी कोई नहीं रह गया। पौड़ी जिले के यमकेश्वर प्रखंड के सिंदूड़ी गांव में सड़क, पानी और स्वास्थ्य सुविधा जैसी मूलभूत सुविधा न मिलने के कारण पूरा गांव खाली हो गया है। पिछले दस साल में 179 परिवारों वाले इस गांव में आज एक भी परिवार नहीं बचा है।
ग्रामसभा प्रधान अरुण जुगलाण ने बताया कि करीब एक दशक पहले तक गांव में 180 परिवार निवास करते थे। बीते वर्षों में सड़क, पानी, बिजली, स्कूल, अस्पताल और रोजगार के अभाव में गांव से 179 परिवार पलायन कर चुके थे, गांव में बीते शनिवार तक सुंदरी देवी के परिवार ने भी रात के अंधेरे के डर और दिन में मन को उदासी से झकझोर देने वाले हालातों के चलते गांव को अलविदा कह दिया है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार पिछले 10 वर्षों से यदि गांव में पानी, संपर्क मार्ग, विद्युतीकरण, शिक्षा और चिकित्सा जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं जुटा लेती तो संभवत: पूरा गांव आज भी आबाद होता। लोग अभावों के चलते गांवों से शहरों की ओर जा रहे हैं, मगर सरकार पहाड़ों से खाली हो रहे गांवों की ओर उदासीन बनी बैठी है।
कोट्स
पहाड़ों के गांवों से आंकड़े जारी कर दिए गए हैं। एकत्रित किए गए आंकड़े राज्य सरकार को जल्द भेज दिए जाएंगे। उसके बाद सरकार द्वारा पलायन पर अंकुश लगाने की योजना पर कार्य किया जा रहा है।
विज्ञापन
-- एसएस नेगी, उपाध्यक्ष ग्रामीण विकास एवं पलायन आयोग।
विज्ञापन
सरकार की उदासीनता के कारण 180 परिवारों का सिंदूड़ी गांव आज पूरी तरह से वीरान हो गया। गांव में बचे एकमात्र परिवार ने शनिवार की सुबह गांव को अलविदा कह दिया। जिस गांव में कभी शोरगुल हुआ करता था, वहां पर बात करने वाला भी कोई नहीं रह गया। पौड़ी जिले के यमकेश्वर प्रखंड के सिंदूड़ी गांव में सड़क, पानी और स्वास्थ्य सुविधा जैसी मूलभूत सुविधा न मिलने के कारण पूरा गांव खाली हो गया है। पिछले दस साल में 179 परिवारों वाले इस गांव में आज एक भी परिवार नहीं बचा है।
ग्रामसभा प्रधान अरुण जुगलाण ने बताया कि करीब एक दशक पहले तक गांव में 180 परिवार निवास करते थे। बीते वर्षों में सड़क, पानी, बिजली, स्कूल, अस्पताल और रोजगार के अभाव में गांव से 179 परिवार पलायन कर चुके थे, गांव में बीते शनिवार तक सुंदरी देवी के परिवार ने भी रात के अंधेरे के डर और दिन में मन को उदासी से झकझोर देने वाले हालातों के चलते गांव को अलविदा कह दिया है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार पिछले 10 वर्षों से यदि गांव में पानी, संपर्क मार्ग, विद्युतीकरण, शिक्षा और चिकित्सा जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं जुटा लेती तो संभवत: पूरा गांव आज भी आबाद होता। लोग अभावों के चलते गांवों से शहरों की ओर जा रहे हैं, मगर सरकार पहाड़ों से खाली हो रहे गांवों की ओर उदासीन बनी बैठी है।
विज्ञापन
कोट्स
पहाड़ों के गांवों से आंकड़े जारी कर दिए गए हैं। एकत्रित किए गए आंकड़े राज्य सरकार को जल्द भेज दिए जाएंगे। उसके बाद सरकार द्वारा पलायन पर अंकुश लगाने की योजना पर कार्य किया जा रहा है।
विज्ञापन
-- एसएस नेगी, उपाध्यक्ष ग्रामीण विकास एवं पलायन आयोग।