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बेस अस्पताल में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट संचालन की उम्मीद
Updated Thu, 05 Apr 2018 10:20 PM IST
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श्रीनगर। राजकीय मेडिकल कॉलेज से संबद्ध बेस अस्पताल में स्थित ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट (रक्त अवयवों को पृथक करने की इकाई) के संचालन की उम्मीद दिख रही है। अस्पताल ने ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) की ओर से लगाई गई आपत्तियों का निराकरण कर लिया है। इसी क्रम में उत्तराखंड ड्रग कंट्रोलर की ओर से भेजे गए पौड़ी के ड्रग इंस्पेक्टर ने यूनिट का निरीक्षण किया। अगर रिपोर्ट सही रहती है, तो केंद्र यूनिट संचालन के लिए लाइसेंस जारी कर देगा।
बेस अस्पताल के ब्लड बैंक में ब्लड कंपोनेंट यूनिट संचालन करने की कार्रवाई लगभग चार साल से चल रही है, लेकिन सुस्त सरकारी प्रक्रियाओं की वजह से अभी तक यूनिट चालू नहीं हो पाई है। अक्तूबर 2016 में केंद्र व राज्य ड्रग कंट्रोलर की संयुक्त टीम ने यूनिट का निरीक्षण किया। इसके बाद लंबे समय तक मामला ठप रहा। इसी वर्ष मार्च माह में केंद्र ने कुछ आपत्तियां लगाते हुए पत्र भेजा। बेस अस्पताल की ओर से आपत्तियों का निराकरण होने के बाद बृहस्पतिवार को जिला ड्रग इंस्पेक्टर सुधीर कुमार ने यूनिट का निरीक्षण किया। ब्लड बैंक इचार्ज डा. सतीश कुमार ने निरीक्षण करवाते हुए बताया कि मशीनें हायर कंपनी की हैं। संबंधित कंपनी ने मशीन भेजने के बाद जांच के लिए नहीं आई। तब दूसरी कंपनी से इसको चालू करवाया गया है। इधर, ड्रग इंस्पेक्टर सुधीर कुमार ने बताया कि निरीक्षण रिपोर्ट उत्तराखंड ड्रग कंट्रोलर को भेज दी जाएगी। ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट मेें रक्त के प्लेटलेट्स, आरबीसी और प्लाज्मा आदि अवयव अलग हो जाते हैं। इसका सबसे अधिक फायदा डेंगू और जले हुए रोगियों के उपचार में होता है।
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बेस अस्पताल के ब्लड बैंक में ब्लड कंपोनेंट यूनिट संचालन करने की कार्रवाई लगभग चार साल से चल रही है, लेकिन सुस्त सरकारी प्रक्रियाओं की वजह से अभी तक यूनिट चालू नहीं हो पाई है। अक्तूबर 2016 में केंद्र व राज्य ड्रग कंट्रोलर की संयुक्त टीम ने यूनिट का निरीक्षण किया। इसके बाद लंबे समय तक मामला ठप रहा। इसी वर्ष मार्च माह में केंद्र ने कुछ आपत्तियां लगाते हुए पत्र भेजा। बेस अस्पताल की ओर से आपत्तियों का निराकरण होने के बाद बृहस्पतिवार को जिला ड्रग इंस्पेक्टर सुधीर कुमार ने यूनिट का निरीक्षण किया। ब्लड बैंक इचार्ज डा. सतीश कुमार ने निरीक्षण करवाते हुए बताया कि मशीनें हायर कंपनी की हैं। संबंधित कंपनी ने मशीन भेजने के बाद जांच के लिए नहीं आई। तब दूसरी कंपनी से इसको चालू करवाया गया है। इधर, ड्रग इंस्पेक्टर सुधीर कुमार ने बताया कि निरीक्षण रिपोर्ट उत्तराखंड ड्रग कंट्रोलर को भेज दी जाएगी। ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट मेें रक्त के प्लेटलेट्स, आरबीसी और प्लाज्मा आदि अवयव अलग हो जाते हैं। इसका सबसे अधिक फायदा डेंगू और जले हुए रोगियों के उपचार में होता है।
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