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स्थायी रोजगार और मजदूरों की समस्याओं लेकर किया प्रदर्शन
Updated Tue, 20 Mar 2018 10:20 PM IST
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भराड़ीसैंण (गैरसैंण)। पर्वतीय जिलों में मूलभूत सुविधाएं, स्थायी रोजगार, आंगनबाड़ी, आशा कार्यकत्रियों और भोजन माताओं के मानदेय में बढ़ोत्तरी, राज्य की बिगड़ती कानून व्यवस्था सहित 12 सूत्री मांगों को लेकर भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने विधानसभा के बाहर प्रदर्शन किया।
पार्टी के राज्य सचिव राजेंद्र सिंह नेगी के नेतृत्व में दिवालीखाल पहुंचे कार्यकर्ताओं ने प्रदेश की स्थायी राजधानी गैरसैंण बनाने की मांग भी उठाई। पार्टी नेताओं ने कहा कि आउट सोर्सिंग प्रक्रिया से युवाओं का शोषण किया जा रहा है। मांग की गई कि नौकरियों में ठेका प्रथा पूरी तरह बंद हो। प्रदर्शन करने वालों में आरएस नेगी, केएस बिष्ट सहित कई लोग शामिल थे। दूसरी ओर चिह्नित राज्य आंदोलनकारी समिति ने भी गैरसैण स्थायी राजधानी को लेकर सदन के बाहर हंगामा किया। केंद्रीय अध्यक्ष जेपी पांडे के नेतृत्व में मंगलवार को आंदोलनकारी समिति का विधानसभा घेराव का कार्यक्रम प्रस्तावित था, लेकिन पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को दिवालीखाल बैरियर पर रोक दिया गया। समिति के पदाधिकारियों ने यहां तैनात मजिस्ट्रेट पीआर चौहान को ज्ञापन दिया।
इनका कहना है-
गैरसैंण के मसले पर हमारा आलाकमान गंभीर चिंतन कर रहा है। जो भी होगा गैरसैंण के लिए बेहतर होगा। लोकतंत्र है सबको अपनी बात कहने का अधिकार है।
-कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन भाजपा विधायक।
यह राज्य हमने बनाया है और आज जो सरकार है उनमें से आधे तो विधायक बनने लायक ही नहीं है। राज्य और राजधानी की लड़ाई सरकार की समझ में नहीं है। यूकेडी ने वर्ष 1992 में ही गैरसैंण को राजधानी घोषित कर दिया था, जिसे किसी भी हाल में पूरा किया जाएगा।
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-दिवाकर भट्ट, केंद्रीय अध्यक्ष उक्रांद
पिछले 106 दिनों से गैरसैण के रामलीला मैदान में राजधानी के लिए आंदोलन चल रहा है, लेकिन प्रदेश सरकार ने राजधानी की घोषणा तो दूर वार्ता करने तक की पहल शुरू नहीं की। ऐसे में आंदोलनकारियों के पास उग्र आंदोलन करने के सिवा कुछ नहीं है। राजधानी के लिए अब प्रदेश में आंदोलन का बिगुल बज चुका है।
-चारू तिवारी, केंद्रीय अध्यक्ष, राजधानी आंदोलन संघर्ष समिति।
जारी-
पार्टी के राज्य सचिव राजेंद्र सिंह नेगी के नेतृत्व में दिवालीखाल पहुंचे कार्यकर्ताओं ने प्रदेश की स्थायी राजधानी गैरसैंण बनाने की मांग भी उठाई। पार्टी नेताओं ने कहा कि आउट सोर्सिंग प्रक्रिया से युवाओं का शोषण किया जा रहा है। मांग की गई कि नौकरियों में ठेका प्रथा पूरी तरह बंद हो। प्रदर्शन करने वालों में आरएस नेगी, केएस बिष्ट सहित कई लोग शामिल थे। दूसरी ओर चिह्नित राज्य आंदोलनकारी समिति ने भी गैरसैण स्थायी राजधानी को लेकर सदन के बाहर हंगामा किया। केंद्रीय अध्यक्ष जेपी पांडे के नेतृत्व में मंगलवार को आंदोलनकारी समिति का विधानसभा घेराव का कार्यक्रम प्रस्तावित था, लेकिन पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को दिवालीखाल बैरियर पर रोक दिया गया। समिति के पदाधिकारियों ने यहां तैनात मजिस्ट्रेट पीआर चौहान को ज्ञापन दिया।
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इनका कहना है-
गैरसैंण के मसले पर हमारा आलाकमान गंभीर चिंतन कर रहा है। जो भी होगा गैरसैंण के लिए बेहतर होगा। लोकतंत्र है सबको अपनी बात कहने का अधिकार है।
-कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन भाजपा विधायक।
यह राज्य हमने बनाया है और आज जो सरकार है उनमें से आधे तो विधायक बनने लायक ही नहीं है। राज्य और राजधानी की लड़ाई सरकार की समझ में नहीं है। यूकेडी ने वर्ष 1992 में ही गैरसैंण को राजधानी घोषित कर दिया था, जिसे किसी भी हाल में पूरा किया जाएगा।
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-दिवाकर भट्ट, केंद्रीय अध्यक्ष उक्रांद
पिछले 106 दिनों से गैरसैण के रामलीला मैदान में राजधानी के लिए आंदोलन चल रहा है, लेकिन प्रदेश सरकार ने राजधानी की घोषणा तो दूर वार्ता करने तक की पहल शुरू नहीं की। ऐसे में आंदोलनकारियों के पास उग्र आंदोलन करने के सिवा कुछ नहीं है। राजधानी के लिए अब प्रदेश में आंदोलन का बिगुल बज चुका है।
-चारू तिवारी, केंद्रीय अध्यक्ष, राजधानी आंदोलन संघर्ष समिति।
जारी-