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डिम्मर गांव में आयोजित रामलीला मंचन में उमड़ रहा श्रद्वा का सैलाब
Updated Wed, 07 Mar 2018 10:28 PM IST
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कर्णप्रयाग। श्री बदरीनाथ धाम के डिमरी पुजारियों के मूल गांव डिम्मर में शताब्दी वर्ष पर आयोजित रामलीला मंचन के आठवें दिन अशोक वाटिका में रावण और सीता संवाद का मंचन किया गया।
रामलीला मंचन में हनुमान लंका में विभीषण की कुटिया में जाते हैं और विभीषण उनको सीता माता के अशोक वाटिका में होने की बात बताते हैं। इसके बाद रावण अशोक वाटिका में जाकर सीता से अपनी प्रणनयनी होने की बात कहता है तो सीता रावण को धिक्कारते हुए श्री राम के हाथों उसके कुल का सर्वनाश होने की बात कहती है। रावण क्रोधित होकर अपने अनुचरों को सीता को सहमत करने का एक माह का समय देता है। इस मौके पर रामलीला कमेटी के अध्यक्ष शैलेंद्र प्रसाद डिमरी, डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत के अध्यक्ष सुरेश डिमरी, हारमोनियम वादक गजेंद्र प्रसाद डिमरी, प्रभुकांत डिमरी, दिनेश चंद्र, जीपी डिमरी, एसपी डिमरी, रामकृष्ण भट्ट, समीर मिश्रा, पुरुषोत्तम सती सहित कर्णप्रयाग, नाकोट, सिमली, गोपेश्वर, जोशीमठ, चमोली आदि स्थानों से सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे थे।
कलाकारों और ध्याणियों का होगा सम्मान
कर्णप्रयाग। ब्लाक के डिम्मर गांव में आयोजित शताब्दी (100) रामलीला समारोह का समापन बृहस्पतिवार को सम्मान समारोह के साथ होगा। इस दौरान रामलीला में सहभागिता करने वाले कलाकार और ग्रामीणों का सम्मान किया जाएगा, वहीं रामलीला में पहुंची गांव की ध्याणियों का सभी समिति सम्मान करेंगी।
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डिम्मर गांव में वर्ष 1918 में रामलीला की शुरुआत हुई। ग्रामीणों के अनुसार तब ग्रामीण ज्ञानानंद और अन्य ग्रामीणों ने अल्प संसाधनों में रामलीला की शुरुआत की, जिसके बाद अनवरत रूप से चली रामलीला ने इस बार अपना शताब्दी वर्ष मनाया। ग्रामीण रामलीला को तब से यहां ईष्ट पूजा के रूप में मनाते हैं। समिति के अध्यक्ष शैलेंद्र प्रसाद डिमरी का कहना है शताब्दी रामलीला का भगवान राम के राज्याभिषेक और सम्मान समारोह के साथ समापन किया जाएगा।
रामलीला मंचन में हनुमान लंका में विभीषण की कुटिया में जाते हैं और विभीषण उनको सीता माता के अशोक वाटिका में होने की बात बताते हैं। इसके बाद रावण अशोक वाटिका में जाकर सीता से अपनी प्रणनयनी होने की बात कहता है तो सीता रावण को धिक्कारते हुए श्री राम के हाथों उसके कुल का सर्वनाश होने की बात कहती है। रावण क्रोधित होकर अपने अनुचरों को सीता को सहमत करने का एक माह का समय देता है। इस मौके पर रामलीला कमेटी के अध्यक्ष शैलेंद्र प्रसाद डिमरी, डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत के अध्यक्ष सुरेश डिमरी, हारमोनियम वादक गजेंद्र प्रसाद डिमरी, प्रभुकांत डिमरी, दिनेश चंद्र, जीपी डिमरी, एसपी डिमरी, रामकृष्ण भट्ट, समीर मिश्रा, पुरुषोत्तम सती सहित कर्णप्रयाग, नाकोट, सिमली, गोपेश्वर, जोशीमठ, चमोली आदि स्थानों से सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे थे।
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कलाकारों और ध्याणियों का होगा सम्मान
कर्णप्रयाग। ब्लाक के डिम्मर गांव में आयोजित शताब्दी (100) रामलीला समारोह का समापन बृहस्पतिवार को सम्मान समारोह के साथ होगा। इस दौरान रामलीला में सहभागिता करने वाले कलाकार और ग्रामीणों का सम्मान किया जाएगा, वहीं रामलीला में पहुंची गांव की ध्याणियों का सभी समिति सम्मान करेंगी।
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डिम्मर गांव में वर्ष 1918 में रामलीला की शुरुआत हुई। ग्रामीणों के अनुसार तब ग्रामीण ज्ञानानंद और अन्य ग्रामीणों ने अल्प संसाधनों में रामलीला की शुरुआत की, जिसके बाद अनवरत रूप से चली रामलीला ने इस बार अपना शताब्दी वर्ष मनाया। ग्रामीण रामलीला को तब से यहां ईष्ट पूजा के रूप में मनाते हैं। समिति के अध्यक्ष शैलेंद्र प्रसाद डिमरी का कहना है शताब्दी रामलीला का भगवान राम के राज्याभिषेक और सम्मान समारोह के साथ समापन किया जाएगा।