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मूलभूत सुविधाओं की राह ताक रही पांडवकालीन नगरी लाखामंडल
Updated Sun, 11 Feb 2018 02:00 AM IST
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मूलभूत सुविधाओं की राह ताक रही पांडव कालीन नगरी
- पर्यटकों को रुकने के लिए नहीं है कोई धर्मशाला
- मंदिर के भीतर प्रकाश की व्यवस्था नहीं, लोग परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
त्यूनी।
पांडव कालीन नगरी लाखामंडल इन दिनों मूलभूत सुविधाओं की राह ताक रही है। क्षेत्र में बनाए गए सार्वजनिक शौचालय में ताला लटका हुआ है तो पर्यटकों के रुकने के लिए कोई धर्मशाला तक नहीं है। ऐसे में पुरातत्व महत्व के इस मंदिर के दर्शनार्थ को पहुंचने वाले लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मंदिर के भीतर कोई प्रकाश की भी व्यवस्था नहीं है। ऐसे में शाम ढलते ही मंदिर में अंधेरा पसर जाता है।
स्थानीय निवासी पं. संतराम बहुगुणा, तुलाराम बहुगुणा, मोहन लाल बहुगुणा, बालक राम शर्मा, भगत राम शर्मा, आशा राम शर्मा, महिमा नंद गौड़, सीना गौड़ आदि का कहना है कि मंदिर परिसर के आसपास धर्मशाला निर्माण के लिए लोग अपनी जमीन तक दान देने के लिए तैयार हैं। इसके बावजूद पर्यटन विभाग इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे है। मंदिर समिति के अध्यक्ष बाबू राम शर्मा ने कहा कि हर दिन सैकड़ों की संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं। जिनमें कई शोधार्थी भी शामिल होते हैं। यात्रा सीजन पर मंदिर में पर्यटकों का दबाव बढ़ जाता है। लेकिन यहां पर निकासी और प्रवेश के लिए एक ही गेट है। जिससे पर्यटकों की दिक्कतें ओर भी बढ़ जाती हैं। रुकने की कोई व्यवस्था न होने के कारण पर्यटकों को 15 किमी दूर उत्तरकाशी के नौगांव जाना पड़ता है। उन्होंने मंदिर में निकासी गेट निर्माण के साथ ही प्रकाश की भी व्यवस्था करने की भी मांग की।
कई कथाएं जुड़ी हैं मंदिर से
लाखामंडल से कई किवदंतियां जुड़ी हुई हैं। कई लोगों का मानना है कि यहीं पर पांडवों को मारने के लिए कौरवों ने लाक्षागृह का निर्माण कराया था। यहां पर खुदाई के दौरान कई छोटे-छोटे शिवलिंग निकले थे। जो कई लाखों साल पुराने बताए जाते हैं। हर साल सैकड़ों की संख्या में पर्यटक इस मंदिर के दीदार के लिए पहुंचते हैं। चारधाम यात्रा सीजन शुरू होते ही इस मंदिर पर भी श्रद्धालुओं का बोझ खासा बढ़ जाता है। यहां स्थित शिवलिंग में लोगों को अपना प्रतिबिंब नजर आता है। लेकिन मूलभूत सुविधाओं के अभाव में पर्यटकों को खासा दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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एडीबी के तहत धर्मशाला निर्माण को प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही धर्मशाला बनाई जाएगी। शौचालय को भी खुलवाया जाएगा। - किशन सिंह रावत, जिला पर्यटन अधिकारी
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- पर्यटकों को रुकने के लिए नहीं है कोई धर्मशाला
- मंदिर के भीतर प्रकाश की व्यवस्था नहीं, लोग परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
त्यूनी।
पांडव कालीन नगरी लाखामंडल इन दिनों मूलभूत सुविधाओं की राह ताक रही है। क्षेत्र में बनाए गए सार्वजनिक शौचालय में ताला लटका हुआ है तो पर्यटकों के रुकने के लिए कोई धर्मशाला तक नहीं है। ऐसे में पुरातत्व महत्व के इस मंदिर के दर्शनार्थ को पहुंचने वाले लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मंदिर के भीतर कोई प्रकाश की भी व्यवस्था नहीं है। ऐसे में शाम ढलते ही मंदिर में अंधेरा पसर जाता है।
स्थानीय निवासी पं. संतराम बहुगुणा, तुलाराम बहुगुणा, मोहन लाल बहुगुणा, बालक राम शर्मा, भगत राम शर्मा, आशा राम शर्मा, महिमा नंद गौड़, सीना गौड़ आदि का कहना है कि मंदिर परिसर के आसपास धर्मशाला निर्माण के लिए लोग अपनी जमीन तक दान देने के लिए तैयार हैं। इसके बावजूद पर्यटन विभाग इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे है। मंदिर समिति के अध्यक्ष बाबू राम शर्मा ने कहा कि हर दिन सैकड़ों की संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं। जिनमें कई शोधार्थी भी शामिल होते हैं। यात्रा सीजन पर मंदिर में पर्यटकों का दबाव बढ़ जाता है। लेकिन यहां पर निकासी और प्रवेश के लिए एक ही गेट है। जिससे पर्यटकों की दिक्कतें ओर भी बढ़ जाती हैं। रुकने की कोई व्यवस्था न होने के कारण पर्यटकों को 15 किमी दूर उत्तरकाशी के नौगांव जाना पड़ता है। उन्होंने मंदिर में निकासी गेट निर्माण के साथ ही प्रकाश की भी व्यवस्था करने की भी मांग की।
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कई कथाएं जुड़ी हैं मंदिर से
लाखामंडल से कई किवदंतियां जुड़ी हुई हैं। कई लोगों का मानना है कि यहीं पर पांडवों को मारने के लिए कौरवों ने लाक्षागृह का निर्माण कराया था। यहां पर खुदाई के दौरान कई छोटे-छोटे शिवलिंग निकले थे। जो कई लाखों साल पुराने बताए जाते हैं। हर साल सैकड़ों की संख्या में पर्यटक इस मंदिर के दीदार के लिए पहुंचते हैं। चारधाम यात्रा सीजन शुरू होते ही इस मंदिर पर भी श्रद्धालुओं का बोझ खासा बढ़ जाता है। यहां स्थित शिवलिंग में लोगों को अपना प्रतिबिंब नजर आता है। लेकिन मूलभूत सुविधाओं के अभाव में पर्यटकों को खासा दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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एडीबी के तहत धर्मशाला निर्माण को प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही धर्मशाला बनाई जाएगी। शौचालय को भी खुलवाया जाएगा। - किशन सिंह रावत, जिला पर्यटन अधिकारी