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जीएसटी के दायरे में लाए जाएं पेट्रोलियम उत्पाद
Updated Wed, 31 Jan 2018 01:32 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला
विकासनगर। पेट्रोलियम उत्पादों को गुड्स एवं सर्विस टैक्स (जीएसटी) के दायरे में लाने की मांग भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने तहसील में प्रदर्शन किया। मांग के समर्थन में एसडीएम के माध्यम से केंद्रीय वित्त मंत्री को ज्ञापन भेजा।
जिलाध्यक्ष संदीप दुबे ने कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों के जीएसटी के दायरे में आने के बाद महंगाई पर काबू पाया जा सकेगा। अभी तक सभी राज्य सरकारें मनमाने तरीके से पेट्रोलियम पदार्थों पर टैक्स वसूलती हैं। जीएसटी के तहत अधिकतम कर 28 प्रतिशत है जबकि, कुछ राज्य सरकारें वर्तमान में 40 प्रतिशत तक कर वसूलती हैं। उन्होंने रबी और खरीफ की फसल को बढ़ावा देने के लिए काश्तकारों को एक निश्चित राशि उनके खातों में भेजने की मांग की।
प्रवक्ता पंजाब सिंह मजीठिया ने कहा कि सर्वे रिपोर्ट के आधार पर 2014 के बाद काश्तकारों के हालात खराब हो गए हैं। ऐसे में उन्हें सहायता राशि प्रदान की जानी चाहिए। प्रदर्शन करने वालों में भीमावाला के उप प्रधान गुलफाम, विमल तोमर, पारस कन्नौजिया, जोगेंद्र सिंह बेदी, विष्णु दुबे, कामिल खान, रमेश आदि शामिल रहे।
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विकासनगर। पेट्रोलियम उत्पादों को गुड्स एवं सर्विस टैक्स (जीएसटी) के दायरे में लाने की मांग भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने तहसील में प्रदर्शन किया। मांग के समर्थन में एसडीएम के माध्यम से केंद्रीय वित्त मंत्री को ज्ञापन भेजा।
जिलाध्यक्ष संदीप दुबे ने कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों के जीएसटी के दायरे में आने के बाद महंगाई पर काबू पाया जा सकेगा। अभी तक सभी राज्य सरकारें मनमाने तरीके से पेट्रोलियम पदार्थों पर टैक्स वसूलती हैं। जीएसटी के तहत अधिकतम कर 28 प्रतिशत है जबकि, कुछ राज्य सरकारें वर्तमान में 40 प्रतिशत तक कर वसूलती हैं। उन्होंने रबी और खरीफ की फसल को बढ़ावा देने के लिए काश्तकारों को एक निश्चित राशि उनके खातों में भेजने की मांग की।
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प्रवक्ता पंजाब सिंह मजीठिया ने कहा कि सर्वे रिपोर्ट के आधार पर 2014 के बाद काश्तकारों के हालात खराब हो गए हैं। ऐसे में उन्हें सहायता राशि प्रदान की जानी चाहिए। प्रदर्शन करने वालों में भीमावाला के उप प्रधान गुलफाम, विमल तोमर, पारस कन्नौजिया, जोगेंद्र सिंह बेदी, विष्णु दुबे, कामिल खान, रमेश आदि शामिल रहे।
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