{"_id":"5a70cf6e4f1c1b90268b7659","slug":"15173427783-vikas-nagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नाम दर्ज कराने में फर्जी प्रमाण-पत्र का इस्तेमाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नाम दर्ज कराने में फर्जी प्रमाण-पत्र का इस्तेमाल
Updated Wed, 31 Jan 2018 01:36 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
महेश कुमार, त्यूनी।
ग्राम पंचायत चातरा के हनोल गांव में बंजर भूमि एक व्यक्ति के नाम दर्ज किए जाने के मामले में सूचना का अधिकार के तहत मिली जानकारी से एक बड़ा खुलासा हुआ है। जमीन को अपने नाम करने के लिए उक्त व्यक्ति ने फर्जी तरीके से पूर्व महिला ग्राम प्रधान का अनापत्ति प्रमाण-पत्र तैयार किया। इतना ही नहीं महिला ग्राम प्रधान के फर्जी हस्ताक्षर भी कर दिए।
इस प्रमाण-पत्र को भी विनियमितीकरण के लिए मुख्य आधार बनाया गया। तहसील प्रशासन ने प्रमाण-पत्र की सत्यता जाने बिना ही बंजर भूमि को उस व्यक्ति के नाम विनियमित करने की संस्तुति कर दी। इसमें लापरवाही रही या मिलीभगत यह तो जांच के बाद पता चल पाएगा लेकिन इससे तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
इस कारनामे से पूर्व महिला प्रधान भी हैरत में है। 22 जुलाई 2016 को खतौनी संख्या-41 में दर्ज करीब 0.2000 हेक्टेयर बंजर भूमि को तहसील प्रशासन ने एक व्यक्ति के नाम दर्ज कर दिया था। बताया गया है कि यह खेल मोटा मुआवजा हड़पने के लिए किया गया।
विज्ञापन
इसकी शिकायत हनोल निवासी संगीता नौटियाल ने गढ़वाल मंडल आयुक्त, जिलाधिकारी, डीआईजी गढ़वाल के साथ ही मुख्यमंत्री से की थी। महिला का आरोप है कि सारा खेल निर्माणाधीन हनोल-भ्यूलाड़ा मोटर मार्ग की कटिंग के नाम पर मुआवजा हड़पने के लिए हुआ। उन्होंने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री, मंडलायुक्त के साथ जिलाधिकारी से की थी। मामले में आयुक्त ने फरवरी के प्रथम सप्ताह में जिलाधिकारी से विस्तृत रिपोर्ट तलब की हुई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि आईटीआई से हुए खुलासे के बाद संबंधित अधिकारियों के साथ ही उक्त व्यक्ति के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए।
--------
मेरा कार्यकाल वर्ष 2013 में खत्म हो चुका था, जबकि विनियमितीकरण की कार्रवाई वर्ष 2016 में हुई। मैंने अपने कार्यकाल में चंदराम नाम के व्यक्ति को कोई अन्नापत्ति प्रमाण-पत्र जारी नहीं किया। मैं सिर्फ साक्षर हूं, किसी तरह अपने हस्ताक्षर कर पाती हूं। हस्ताक्षर में मैं सिर्फ सुबा लिखती हूं, जबकि जारी प्रमाण-पत्र में सुब्बा रावत लिखा है, प्रणाम-पत्र पूरी तरह से फर्जी है, इसमें तारीख तक नहीं डाली गई है। मेरे फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं।
- सुबा रावत, पूर्व प्रधान ग्राम पंचायत चातरा
जांच तथ्यों के आधार पर की जा रही है। यदि विनियमितीकरण की कार्रवाई में फर्जी प्रमाण-पत्र की बात प्रकाश में आई तो संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों को बक्शा नहीं जाएगा। उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- एसए मुरुगेशन, जिलाधिकारी
विज्ञापन
ग्राम पंचायत चातरा के हनोल गांव में बंजर भूमि एक व्यक्ति के नाम दर्ज किए जाने के मामले में सूचना का अधिकार के तहत मिली जानकारी से एक बड़ा खुलासा हुआ है। जमीन को अपने नाम करने के लिए उक्त व्यक्ति ने फर्जी तरीके से पूर्व महिला ग्राम प्रधान का अनापत्ति प्रमाण-पत्र तैयार किया। इतना ही नहीं महिला ग्राम प्रधान के फर्जी हस्ताक्षर भी कर दिए।
इस प्रमाण-पत्र को भी विनियमितीकरण के लिए मुख्य आधार बनाया गया। तहसील प्रशासन ने प्रमाण-पत्र की सत्यता जाने बिना ही बंजर भूमि को उस व्यक्ति के नाम विनियमित करने की संस्तुति कर दी। इसमें लापरवाही रही या मिलीभगत यह तो जांच के बाद पता चल पाएगा लेकिन इससे तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
विज्ञापन
इस कारनामे से पूर्व महिला प्रधान भी हैरत में है। 22 जुलाई 2016 को खतौनी संख्या-41 में दर्ज करीब 0.2000 हेक्टेयर बंजर भूमि को तहसील प्रशासन ने एक व्यक्ति के नाम दर्ज कर दिया था। बताया गया है कि यह खेल मोटा मुआवजा हड़पने के लिए किया गया।
विज्ञापन
इसकी शिकायत हनोल निवासी संगीता नौटियाल ने गढ़वाल मंडल आयुक्त, जिलाधिकारी, डीआईजी गढ़वाल के साथ ही मुख्यमंत्री से की थी। महिला का आरोप है कि सारा खेल निर्माणाधीन हनोल-भ्यूलाड़ा मोटर मार्ग की कटिंग के नाम पर मुआवजा हड़पने के लिए हुआ। उन्होंने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री, मंडलायुक्त के साथ जिलाधिकारी से की थी। मामले में आयुक्त ने फरवरी के प्रथम सप्ताह में जिलाधिकारी से विस्तृत रिपोर्ट तलब की हुई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि आईटीआई से हुए खुलासे के बाद संबंधित अधिकारियों के साथ ही उक्त व्यक्ति के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए।
--------
मेरा कार्यकाल वर्ष 2013 में खत्म हो चुका था, जबकि विनियमितीकरण की कार्रवाई वर्ष 2016 में हुई। मैंने अपने कार्यकाल में चंदराम नाम के व्यक्ति को कोई अन्नापत्ति प्रमाण-पत्र जारी नहीं किया। मैं सिर्फ साक्षर हूं, किसी तरह अपने हस्ताक्षर कर पाती हूं। हस्ताक्षर में मैं सिर्फ सुबा लिखती हूं, जबकि जारी प्रमाण-पत्र में सुब्बा रावत लिखा है, प्रणाम-पत्र पूरी तरह से फर्जी है, इसमें तारीख तक नहीं डाली गई है। मेरे फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं।
- सुबा रावत, पूर्व प्रधान ग्राम पंचायत चातरा
जांच तथ्यों के आधार पर की जा रही है। यदि विनियमितीकरण की कार्रवाई में फर्जी प्रमाण-पत्र की बात प्रकाश में आई तो संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों को बक्शा नहीं जाएगा। उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- एसए मुरुगेशन, जिलाधिकारी