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अभियानों से कैसे स्वच्छ होगी गंगा और शहर
Updated Thu, 18 Jan 2018 01:41 AM IST
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ट्रंचिंग ग्राउंड ही नहीं कहां डंप होगा कूड़ा?
-- तीर्थनगरी में कूड़ा निस्तारण की नहीं हो पाई मुकम्मल व्यवस्था
- ऋषिकेश और स्वर्गाश्रम नगर निकायों के पास ट्रंचिंग ग्राउंड ही नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश। केंद्र और राज्य सरकार रिहायशी इलाकों और गंगा को स्वच्छ रखने के लिए तमाम अभियान चल रही है, लेकिन तीर्थनगरी में गंगा तटीय निकायों के पास साफ-सफाई के लिए पर्याप्त संसाधन ही नहीं हैं। गंगा से सटी तीर्थनगरी के अंतर्गत ऋषिकेश नगर निगम और नगर पंचायत स्वर्गाश्रम जौंक के पास ट्रंचिंग ग्राउंड ही नहीं है। ऐसे में निगम प्रशासन शहर के बीचोंबीच हरिद्वार हाईवे के किनारे एक खाली भूखंड पर नगर का कूड़ा डंप कर रहा है। जबकि स्वर्गाश्रम नगर पंचायत में भी ट्रंचिंग ग्राउंड के अभाव में नगर के बीचोंबीच कूड़े को डंप किया जा रहा है।
ऐसे में तीर्थ क्षेत्र से हर रोज निकलने वाले टनों कूड़े को डंप तो किया जा रहा है, मगर इसके ट्रीटमेंट की कोई मुकम्मल व्यवस्था न तो नगर निगम प्रशासन के पास है और न ही नगर पंचायत स्वर्गाश्रम जौंक के पास। जिससे कूड़े का ठीक प्रकार से निस्तारण नहीं होने से आसपास के लोग व यहां हर रोज आने वाले लाखों देसी-विदेशी सैलानी गंदगी से परेशान हैं। मुनिकीरेती नगर पालिका खारास्रोत नदी के किनारे ट्रंचिंग ग्राउंड बनाकर कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था कर भी रही है, मगर निकाय को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यनल (एनजीटी) नदी के किनारे बने ट्रंचिंग ग्राउंड को हटाने के आदेश जारी कर चुका है। ट्रंचिंग ग्राउंड की व्यवस्था नहीं होने के चलते गंगा और तीर्थक्षेत्रों की साफ-सफाई मुकम्मल तरीके से हो पाना मुश्किल ही है, जबकि सरकारें हकीकत पर गौर करने की बजाए योजनाओं व अभियानों से स्वच्छता का दावा भर कर रही हैं।
रोजाना निकलता है 46 टन कचरा
ऋषिकेश। नगर निगम ऋषिकेश, स्वर्गाश्रम और मुनिकीरेती नगर निकायों से रोजाना करीब 46 टन कचरा निकलता है। फिलहाल मुनिकीरेती से निकलने वाले महज करीब 15 टन कचरे के निस्तारण की ही व्यवस्था की गई है। जबकि अन्य निकायों में कूड़े को महज डंप किया जा रहा है। अब एनजीटी के आदेश के बाद मुनिकीरेती निकाय प्रशासन की भी कूड़ा ट्रीटमेंट को लेकर दिक्कतें बढ़ने की पूरी उम्मीद है। वजह अभी तक निकाय के पास फिलहाल ट्रीटमेंट के लिए अतिरिक्त स्थान उपलब्ध नहीं है।
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क्या कहते हैं अधिकारी
कूड़ा निस्तारण के लिए भूमि तलाशने का काम जारी है। उपयुक्त भूमि मिलने पर ट्रंचिंग ग्राउंड स्थापित किया जाएगा। जब तक भूमि निगम को नहीं मिल जाती है, तब तक उसी स्थान पर कूड़ा डाला जाएगा।
- एसए मुरुगेशन, डीएम, देहरादून
स्वर्गाश्रम निकाय के ट्रंचिंग ग्राउंड के लिए क्षेत्र में वन भूमि को चिह्नित किया गया है। वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया को शुरू किया जा रहा है, जिसे जल्द पूरा कर नगर पंचायत के लिए ट्रंचिंग ग्राउंड स्थापित किया जाएगा।
- सुशील कुमार, डीएम, पौड़ी
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-- तीर्थनगरी में कूड़ा निस्तारण की नहीं हो पाई मुकम्मल व्यवस्था
- ऋषिकेश और स्वर्गाश्रम नगर निकायों के पास ट्रंचिंग ग्राउंड ही नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश। केंद्र और राज्य सरकार रिहायशी इलाकों और गंगा को स्वच्छ रखने के लिए तमाम अभियान चल रही है, लेकिन तीर्थनगरी में गंगा तटीय निकायों के पास साफ-सफाई के लिए पर्याप्त संसाधन ही नहीं हैं। गंगा से सटी तीर्थनगरी के अंतर्गत ऋषिकेश नगर निगम और नगर पंचायत स्वर्गाश्रम जौंक के पास ट्रंचिंग ग्राउंड ही नहीं है। ऐसे में निगम प्रशासन शहर के बीचोंबीच हरिद्वार हाईवे के किनारे एक खाली भूखंड पर नगर का कूड़ा डंप कर रहा है। जबकि स्वर्गाश्रम नगर पंचायत में भी ट्रंचिंग ग्राउंड के अभाव में नगर के बीचोंबीच कूड़े को डंप किया जा रहा है।
ऐसे में तीर्थ क्षेत्र से हर रोज निकलने वाले टनों कूड़े को डंप तो किया जा रहा है, मगर इसके ट्रीटमेंट की कोई मुकम्मल व्यवस्था न तो नगर निगम प्रशासन के पास है और न ही नगर पंचायत स्वर्गाश्रम जौंक के पास। जिससे कूड़े का ठीक प्रकार से निस्तारण नहीं होने से आसपास के लोग व यहां हर रोज आने वाले लाखों देसी-विदेशी सैलानी गंदगी से परेशान हैं। मुनिकीरेती नगर पालिका खारास्रोत नदी के किनारे ट्रंचिंग ग्राउंड बनाकर कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था कर भी रही है, मगर निकाय को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यनल (एनजीटी) नदी के किनारे बने ट्रंचिंग ग्राउंड को हटाने के आदेश जारी कर चुका है। ट्रंचिंग ग्राउंड की व्यवस्था नहीं होने के चलते गंगा और तीर्थक्षेत्रों की साफ-सफाई मुकम्मल तरीके से हो पाना मुश्किल ही है, जबकि सरकारें हकीकत पर गौर करने की बजाए योजनाओं व अभियानों से स्वच्छता का दावा भर कर रही हैं।
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रोजाना निकलता है 46 टन कचरा
ऋषिकेश। नगर निगम ऋषिकेश, स्वर्गाश्रम और मुनिकीरेती नगर निकायों से रोजाना करीब 46 टन कचरा निकलता है। फिलहाल मुनिकीरेती से निकलने वाले महज करीब 15 टन कचरे के निस्तारण की ही व्यवस्था की गई है। जबकि अन्य निकायों में कूड़े को महज डंप किया जा रहा है। अब एनजीटी के आदेश के बाद मुनिकीरेती निकाय प्रशासन की भी कूड़ा ट्रीटमेंट को लेकर दिक्कतें बढ़ने की पूरी उम्मीद है। वजह अभी तक निकाय के पास फिलहाल ट्रीटमेंट के लिए अतिरिक्त स्थान उपलब्ध नहीं है।
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क्या कहते हैं अधिकारी
कूड़ा निस्तारण के लिए भूमि तलाशने का काम जारी है। उपयुक्त भूमि मिलने पर ट्रंचिंग ग्राउंड स्थापित किया जाएगा। जब तक भूमि निगम को नहीं मिल जाती है, तब तक उसी स्थान पर कूड़ा डाला जाएगा।
- एसए मुरुगेशन, डीएम, देहरादून
स्वर्गाश्रम निकाय के ट्रंचिंग ग्राउंड के लिए क्षेत्र में वन भूमि को चिह्नित किया गया है। वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया को शुरू किया जा रहा है, जिसे जल्द पूरा कर नगर पंचायत के लिए ट्रंचिंग ग्राउंड स्थापित किया जाएगा।
- सुशील कुमार, डीएम, पौड़ी