वु लोग जु भी काम कना छन, चौंदिसी खुल्ला आम कना छन....

Dehradun Bureau Updated Sun, 14 Jan 2018 10:33 PM IST
कीर्तिनगर। वु लोग जु भी काम कना छन, चौंदिसी खुल्ला आम कना छन....जैसी कविताओं के माध्यम से गढ़ कवियों ने राजनीति के वर्तमान परिदृश्य पर जमकर तंज कसे। कवियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों पर भी प्रहार किए।
नगर पंचायत की ओर से आयोजित नागेंद्र सकलानी व मोलू भरदारी स्मृति एवं विकास मेले की तीसरी सांस्कृतिक संध्या गढ़ कवियों के नाम रही। इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार मुकेश उनियाल की कविता वु लोग जु भी काम कना छन, चौंदिसी खुल्ला आम कना छन....ने नेताओं की कार्यशैली व उनके चरित्र पर व्यंग किया। कवियत्री कुसुमलता ममगांई की प्रस्तुति घाट कू मूर्दा घर वापस...ने दर्शकों को खूब हंसाया। जबकि मोहित नेगी की कविता मनखि दिख्ये पर मनख्यात नि दिख्ये..ने समाज में कम हो रही मानवता की भावना पर व्यंग्यात्मक प्रहार किया। वही संदीप रावत की कविता चट्टलेकी टक्क-कुटक्क लगौणा छन, पहाड़ तैं कुस्वाणू बणोणा छन...ने विकास के नाम पर किए जा रहे अनियंत्रित निर्माण कार्यों व प्राकृतिक संपदाओं से छेड़ छाड़ पर प्रहार किया। इसके अलावा डा. सत्यानंद बडोनी, प्रियंका नेगी, बीना बैंजवाल, भूपेंद्र कुवर, राकेश जिरवाण आदि ने भी अपनी रचनाओं का पाठ किया। दूसरी ओर शहीदी मेले की सांस्कृतिक संध्या पर स्कूली छात्रों की प्रस्तुतियों पर दर्शक जमकर झूमे। मौके पर नगर पंचायत अध्यक्ष कल्पना कठैत, विपिन पंवार, पूर्व अध्यक्ष विजयराम गोदियाल, एडवोकेट मुकेश कठैत, चंद्रभानु तिवाड़ी, जगतंबा कुमाई, दीपक थपलियाल आदि मौजूद थे।

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