{"_id":"5946b0104f1c1b85788b4767","slug":"151497804816-dehradun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पीड़ित को सात लाख दे बीमा कंपनी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पीड़ित को सात लाख दे बीमा कंपनी
Updated Sun, 18 Jun 2017 10:23 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नई टिहरी। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम ने एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस कंपनी को शिकायतकर्ता को बीमा राशि का सात लाख रुपये भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही एक-एक हजार रुपये का शारीरिक और मानसिक क्षतिपूर्ति और वाद व्यय अदा करने को भी कहा है।
सारज्यूला पट्टी के ग्राम नवागर निवासी धर्मानंद शर्मा ने जिला उपभोक्ता फोरम में चार जून 2016 को शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी पत्नी सुमित्रा देवी ने चंबा एसबीआई के इंश्योरेंस एजेंट से 20 मार्च 2014 को स्मार्ट इलीफ गोल्ड कवर की डेढ़ लाख रुपये वार्षिक किस्त पर पॉलिसी की थी। इसमें धर्मानंद को नामित किया गया था। पॉलिसी की दो किस्त तीन लाख रुपये जमा किए गए थे। पॉलिसी के तहत बीमाकर्ता की सामान्य मृत्यु पर 10 लाख और दुर्घटना में मृत्यु होने पर 20 लाख रुपये का बीमा था। बताया गया कि 15 अप्रैल 2015 को शिकायतकर्ता की पत्नी सुमित्रा देवी की मृत्यु हो गई। इसकी सूचना बीमा कंपनी को दी गई थी, लेकिन बीमा कंपनी ने बीमा फॉर्म भरते समय आयु, व्यवसाय और आय की गलत जानकारी देने का आरोप लगाते हुए क्लेम खारिज कर दिया। उसके बाद तीन लाख का भुगतान किया गया। फोरम की अध्यक्ष मीना तिवारी, सदस्य किशन सिंह रावत और विजयलक्ष्मी थलवाल ने दोनों पक्षों की दलील सुनते हुए कहा कि बीमा फार्म एजेंट ने भरा है, जिसमें बीमाकर्ता से बाद में हस्ताक्षर कराए गए। जिसे बीमा कंपनी ने स्वीकार किया है। फोरम ने अपना फैसला सुनाते हुए नामित व्यक्ति को सात लाख रुपये मय ब्याज के भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। शिकायतकर्ता की ओर से चंद्र सिंह गुसाईं ने पैरवी की है।
विज्ञापन
सारज्यूला पट्टी के ग्राम नवागर निवासी धर्मानंद शर्मा ने जिला उपभोक्ता फोरम में चार जून 2016 को शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी पत्नी सुमित्रा देवी ने चंबा एसबीआई के इंश्योरेंस एजेंट से 20 मार्च 2014 को स्मार्ट इलीफ गोल्ड कवर की डेढ़ लाख रुपये वार्षिक किस्त पर पॉलिसी की थी। इसमें धर्मानंद को नामित किया गया था। पॉलिसी की दो किस्त तीन लाख रुपये जमा किए गए थे। पॉलिसी के तहत बीमाकर्ता की सामान्य मृत्यु पर 10 लाख और दुर्घटना में मृत्यु होने पर 20 लाख रुपये का बीमा था। बताया गया कि 15 अप्रैल 2015 को शिकायतकर्ता की पत्नी सुमित्रा देवी की मृत्यु हो गई। इसकी सूचना बीमा कंपनी को दी गई थी, लेकिन बीमा कंपनी ने बीमा फॉर्म भरते समय आयु, व्यवसाय और आय की गलत जानकारी देने का आरोप लगाते हुए क्लेम खारिज कर दिया। उसके बाद तीन लाख का भुगतान किया गया। फोरम की अध्यक्ष मीना तिवारी, सदस्य किशन सिंह रावत और विजयलक्ष्मी थलवाल ने दोनों पक्षों की दलील सुनते हुए कहा कि बीमा फार्म एजेंट ने भरा है, जिसमें बीमाकर्ता से बाद में हस्ताक्षर कराए गए। जिसे बीमा कंपनी ने स्वीकार किया है। फोरम ने अपना फैसला सुनाते हुए नामित व्यक्ति को सात लाख रुपये मय ब्याज के भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। शिकायतकर्ता की ओर से चंद्र सिंह गुसाईं ने पैरवी की है।
विज्ञापन