इंडेन गैस गोदाम पर छापामारी में मिले रिफलिंग के उपकरण

Dehradun Bureau Updated Wed, 08 Nov 2017 01:58 AM IST
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गैस गोदाम में जिला पूर्ति टीम का छापा
-- छापेमारी के दौरान मिले रिफ्लिंग उपकरण, सिलेंडरों से गैस निकालने का अंदेशा
-- जिलापूर्ति विभाग को घटतौली और रिफ्लिंग की मिली थी शिकायत

अमर उजाला ब्यूरो
डोईवाला।
गैस घटतौली और रिफ्लिंग की लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर जिला पूर्ति विभाग की टीम ने अधिकारी विपिन कुमार की देखरेख में मंगलवार को डोईवाला गैस गोदाम में छापेमारी की। छापेमारी के दौरान टीम को गैस गोदाम में रिफ्लिंग के उपकरण बरामद किए हैं। गोदाम में सिलेंडरों से गैस निकालने का अंदेशा जताया जा रहा है। इस मामले में टीम ने गढ़वाल विकास निगम के उच्चाधिकारियों को शिकायत दी है।
जिलापूर्ति अधिकारी ने बताया कि गैस एजेंसी के खिलाफ विभाग को कई शिकायतें मिल रही थी। टीम ने जब गढ़वाल मंडल विकास निगम की डोईवाला गैस एंजेसी के गैस गोदाम में छापा मारा और जांच की गई तो वहां से टीम को रिफ्लिंग के उपकरण बरामद हुए। इससे अंदेशा लगाया जा रहा है कि गोदाम के अंदर गैस रिफ्लिंग का धंधा चल रहा था। उन्होंने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हर स्तर पर छानबीन की जा रही है।
-- छापेमारी से गोदाम में मचा हड़कंप
जिलापूर्ति विभाग की औचक कार्रवाई से गोदाम में हड़कंप मच गया। टीम ने गोदाम में काम कर रहे लोगों को बाहर कर सघन निरीक्षण करते हुए अंदर रखे सभी सामानों की जांच की। इस दौरान पाया गया कि गैस गोदाम में लोगों को गैस सिलेंडर सप्लाई के बाद भी कर्मचारी गोदाम में काम कर रहे थे। विभागीय टीम ने घटतौली की आशंका को लेकर कई सिलेंडरों के वजन को भी चैक किया। कार्रवाई के दौरान किसी को भी अंदर नहीं जाने दिया गया।

कैसे आए उपकरण होगी जांच
गैस एजेंसी के मैनेजर डीएस भंडारी ने बताया कि गैस गोदाम में खुद टीम ने गैस सिलेंडरों का वजन नापा था, जोकि ठीक पाया गया। जहां तक गोदाम में उपकरण पाए जाने का सवाल है तो इसकी जांच की जाएगी। यदि इस मामले में कोई जिम्मेदार पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।


डोईवाला (ब्यूरो)।
देशभर में एक करोड़ से अधिक लोग अपने गैस सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी छोड़ चुके हैं। ये वो लोग हैं जो चाहते हैं कि उनके पैसे से किसी गरीब के घर गैस पहुंच सके, लेकिन क्या वाकई ऐसा हो पा रहा है। हकीकत ये है कि देशभर में ऐसे तमाम लोग हैं जिन्हें गैस कनेक्शन तो नहीं मिल पाते, लेकिन अगर वही लोग अधिक पैसे देकर ब्लैक मार्केट में सिलेंडर खरीदना चाहें तो आसानी से मिल जाता है।

जांच नहीं होती।
कम वजन के गैस सिलेंडर ग्राहकों को अक्सर मिलते हैं। गैस कंपनी के अधिकारियों को इसकी जानकारी दी जाती है। इसके बावजूद मामले की जांच नहीं होती है। सिर्फ जांच के आश्वासन पर मामला रुक जाता है।

यह हो सकती है कार्रवाई
माप-तौल में हेरफेर पर जिला प्रशासन, संबंधित विभाग और कंपनी कार्रवाई कर सकती है। लोग माप-तौल विभाग को शिकायत करें, तो दोषी एजेंसी पर जुर्माना हो सकता है। जिला प्रशासन एजेंसी की एनओसी रद्द कर सकता है। सही से कार्रवाई हुई तो गैस कंपनी के अधिकारी एजेंसी का लाइसेंस तक रद्द कर सकते हैं।

ऐसे बच सकते हैं नुकसान से
- गैस सिलेंडर का वजन खुद करें।
- गैस पहुंचाने वाले हॉकर के पास तौलने के सामान की जांच हमेशा करते रहें।
- सिलेंडर का उपयोग करने पर यह ध्यान रखें कि गैस कितने दिन चल रही है।
- गैस कम हो तो तुरंत इसकी शिकायत संबंधित एजेंसी और कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी से करें।

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