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कर्मचारियों की आड में अपने अवैध कब्जों को बचाने में लगे सियासतदां
Updated Tue, 31 Oct 2017 10:26 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
नगर निगम की बेशकीमती जमीनों पर अपने कब्जों को बचाने के लिए सियासतदां कर्मचारियों को आगे खड़ा कर नगर निगम प्रशासन को पीछे हटाने में जुटे हैं।
नगर निगम परिसर में ही कब्जा कर आवासीय पक्के निर्माण कराने वाले कर्मचारी सेवानिवृत्त होने के बाद भी नगर निगम छोड़ने को तैयार नहीं है। नगर निगम के गेस्ट हाउस पर सेवानिवृत्त कर्मचारी का कब्जा है। अपनी शानदार कोठी बनाने के बाद भी उसने कब्जा नहीं छोड़ा है। सेवा में रहते ही कुछ कर्मचारियों अपने नाम आवंटित आवासों को अपनी पत्नियों के नाम किरायेदारी में चढ़ाकर अरबों की संपत्तियों को ठिकाने लगा रखा है। किसी ने दफ्तर के नाम पर तो किसी ने आवास और दुकान के नाम पर बेशकीमती संपत्तियां कब्जा रखी हैं। नगर निगम की जमीनों पर नेताओं ने वोटों की बस्तियां आबाद कर रखी हैं। नगर निगम परिसर का पूरा क्षेत्र गंदगी व कब्जों से अटा हुआ है। कुछ लोगों ने बाहरी लोगों व नाते रिश्तेदारों तक को कब्जाए आवासों को किराये पर चढ़ा रखा है।
मेयर मनोज गर्ग नगर निगम परिसर में बहुउद्देश्य मल्टी स्टोरी बिल्डिंग बनवाने के लिए प्रयासरत हैं। जिसके लिए सर्वे भी कराया जा चुका है। नगर आयुक्त नितिन भदौरियों ने जब कब्जों को हटाने की योजना पर काम शुरू कर दिया तो राजनीतिज्ञों ने कर्मचारियों को भड़का दिया है। टिबड़ी तक से लोगों को यह कह कर विरोध के लिए जुटाया गया है यदि यहीं पर अभियान नहीं रुका तो फिर टिबड़ी भी नहीं बच पाएगी।
बोर्ड के प्रस्ताव पर कुंडली मारकर बैठ गए
कमल जौरा के नगर पालिका बोर्ड के समय भी कर्मचारियों ने अपने कब्जे की जगह पर मालिकाना हक के लिए जोर लगाया था। समस्या के निराकरण के लिए सभासद दिनेश जोशी की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई। कमेटी ने सभी अवैध कब्जे ध्वस्त कराने की अनुशंसा की थी। और फिर जिन कर्मचारियों ने कब्जा कर रखा है उनको तथा अन्य इच्छुक कर्मचारियों को आवास बनाने के लिए नियमानुसार समान रूप से भूमि देने की सिफारिश की गई थी। इस प्रस्ताव को उन कुछ नेताओं व कर्मचारियों ने आगे नहीं बढ़ने दिया, जिन्होंने घर के साथ लाखों की भूमि कब्जा कर बेच रखी है।
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कर्मचारियों की बात ठीक है
नगर निगम की संपत्तियों पर कब्जा कर आवास बनाने वाले कर्मचारियों का कहना है कि नगर निगम के अधिकारी अपने कर्मचारियों को सड़क पर ला रहे हैं। लेकिन जिन लोगों ने अरबों की व्यावसासियक संपत्तियों पर कब्जा कर रखा है, उनके विरुद्ध कार्रवाई करने में प्रशासन हमेशा पीछे हट जाता है। पीपीपी एक्ट में बेदखली के मुकदमे कर नगर निगम मुकदमों की फीस का बोझ और बढ़ाया जा रहा है। जबकि नगर निगम प्रशासन उनको लीज समाप्त होने पर बेदखल कर सकता था। पीपीपी एक्ट में सिटी मजिस्ट्रेट न्यायालय में कब्जाधारी तारीख पर तारीख लेते जा रहे हैं। टिबड़ी में करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि को भाजपा नेताओं ने अवैध रूप से बेचकर ठिकाने लगा दिया है।
मंत्री जी ने हमें बहन बना लिया है
रानीपुर झाल पर अतिक्रमण हटाने के विरोध में जुटी महिलाओं ने नगर निगम के अधिकारियों को जमकर गालियां दीं। उन्होंने चिल्ला-चिल्ला कर कहा कि शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने उन्हें राखी बांध कर बहन बना लिया था। उनके कहने पर ही हमने निर्माण कराया है। उनका कहना था कि कोई कुछ नहीं कहेगा। महिलाओं की इस बात का नगर अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं था।
अभियान समाप्त नहीं हुआ है
कब्जों को हटाने का शुक्रवार को छेड़ा गया अभियान समाप्त नहीं हुआ है। नगर आयुक्त फिर से कार्यक्रम निर्धारित करेंगे। कब्जों को हटाने में पुलिस व मजिस्ट्रेट की जरूरत होती है, इसलिए बैठक कर मजिस्ट्रेट व फोर्स की उपलब्धता के अनुसार ही कब्जों को हटाने व बेदखल का अभियान शुरू किया जाएगा। जिन लोगों को नोटिस दिए जा चुके हैं उनको तो बेदखल किया ही जाना है।- पीके बंसल सहायक नगर आयुक्त।
हरिद्वार।
नगर निगम की बेशकीमती जमीनों पर अपने कब्जों को बचाने के लिए सियासतदां कर्मचारियों को आगे खड़ा कर नगर निगम प्रशासन को पीछे हटाने में जुटे हैं।
नगर निगम परिसर में ही कब्जा कर आवासीय पक्के निर्माण कराने वाले कर्मचारी सेवानिवृत्त होने के बाद भी नगर निगम छोड़ने को तैयार नहीं है। नगर निगम के गेस्ट हाउस पर सेवानिवृत्त कर्मचारी का कब्जा है। अपनी शानदार कोठी बनाने के बाद भी उसने कब्जा नहीं छोड़ा है। सेवा में रहते ही कुछ कर्मचारियों अपने नाम आवंटित आवासों को अपनी पत्नियों के नाम किरायेदारी में चढ़ाकर अरबों की संपत्तियों को ठिकाने लगा रखा है। किसी ने दफ्तर के नाम पर तो किसी ने आवास और दुकान के नाम पर बेशकीमती संपत्तियां कब्जा रखी हैं। नगर निगम की जमीनों पर नेताओं ने वोटों की बस्तियां आबाद कर रखी हैं। नगर निगम परिसर का पूरा क्षेत्र गंदगी व कब्जों से अटा हुआ है। कुछ लोगों ने बाहरी लोगों व नाते रिश्तेदारों तक को कब्जाए आवासों को किराये पर चढ़ा रखा है।
मेयर मनोज गर्ग नगर निगम परिसर में बहुउद्देश्य मल्टी स्टोरी बिल्डिंग बनवाने के लिए प्रयासरत हैं। जिसके लिए सर्वे भी कराया जा चुका है। नगर आयुक्त नितिन भदौरियों ने जब कब्जों को हटाने की योजना पर काम शुरू कर दिया तो राजनीतिज्ञों ने कर्मचारियों को भड़का दिया है। टिबड़ी तक से लोगों को यह कह कर विरोध के लिए जुटाया गया है यदि यहीं पर अभियान नहीं रुका तो फिर टिबड़ी भी नहीं बच पाएगी।
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बोर्ड के प्रस्ताव पर कुंडली मारकर बैठ गए
कमल जौरा के नगर पालिका बोर्ड के समय भी कर्मचारियों ने अपने कब्जे की जगह पर मालिकाना हक के लिए जोर लगाया था। समस्या के निराकरण के लिए सभासद दिनेश जोशी की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई। कमेटी ने सभी अवैध कब्जे ध्वस्त कराने की अनुशंसा की थी। और फिर जिन कर्मचारियों ने कब्जा कर रखा है उनको तथा अन्य इच्छुक कर्मचारियों को आवास बनाने के लिए नियमानुसार समान रूप से भूमि देने की सिफारिश की गई थी। इस प्रस्ताव को उन कुछ नेताओं व कर्मचारियों ने आगे नहीं बढ़ने दिया, जिन्होंने घर के साथ लाखों की भूमि कब्जा कर बेच रखी है।
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कर्मचारियों की बात ठीक है
नगर निगम की संपत्तियों पर कब्जा कर आवास बनाने वाले कर्मचारियों का कहना है कि नगर निगम के अधिकारी अपने कर्मचारियों को सड़क पर ला रहे हैं। लेकिन जिन लोगों ने अरबों की व्यावसासियक संपत्तियों पर कब्जा कर रखा है, उनके विरुद्ध कार्रवाई करने में प्रशासन हमेशा पीछे हट जाता है। पीपीपी एक्ट में बेदखली के मुकदमे कर नगर निगम मुकदमों की फीस का बोझ और बढ़ाया जा रहा है। जबकि नगर निगम प्रशासन उनको लीज समाप्त होने पर बेदखल कर सकता था। पीपीपी एक्ट में सिटी मजिस्ट्रेट न्यायालय में कब्जाधारी तारीख पर तारीख लेते जा रहे हैं। टिबड़ी में करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि को भाजपा नेताओं ने अवैध रूप से बेचकर ठिकाने लगा दिया है।
मंत्री जी ने हमें बहन बना लिया है
रानीपुर झाल पर अतिक्रमण हटाने के विरोध में जुटी महिलाओं ने नगर निगम के अधिकारियों को जमकर गालियां दीं। उन्होंने चिल्ला-चिल्ला कर कहा कि शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने उन्हें राखी बांध कर बहन बना लिया था। उनके कहने पर ही हमने निर्माण कराया है। उनका कहना था कि कोई कुछ नहीं कहेगा। महिलाओं की इस बात का नगर अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं था।
अभियान समाप्त नहीं हुआ है
कब्जों को हटाने का शुक्रवार को छेड़ा गया अभियान समाप्त नहीं हुआ है। नगर आयुक्त फिर से कार्यक्रम निर्धारित करेंगे। कब्जों को हटाने में पुलिस व मजिस्ट्रेट की जरूरत होती है, इसलिए बैठक कर मजिस्ट्रेट व फोर्स की उपलब्धता के अनुसार ही कब्जों को हटाने व बेदखल का अभियान शुरू किया जाएगा। जिन लोगों को नोटिस दिए जा चुके हैं उनको तो बेदखल किया ही जाना है।- पीके बंसल सहायक नगर आयुक्त।