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प्राणों का नियमित व साधनायुक्त आयाम ही प्रणायाम है
Updated Mon, 23 Oct 2017 01:30 AM IST
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श्वास संतुलित कर बनेगा शरीर, मन, आत्मा का संतुलन
- फ्रांस के योगी कुडु ने किया प्राणायाम की विधाओं का प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
मुनिकीरेती। परमार्थ निकेतन आश्रम पहुंचे फ्रांस के योगी कुडु ने आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि से भेंट की। इस दौरान योग व प्राणायाम के विषय पर विस्तृत चर्चा की गई। परमार्थ निकेतन में साधकों व गुरुकुल के ऋषिकुमारों के सामने योगी कुडु ने प्राणायाम की विभिन्न क्रियाओं का प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि प्राणायाम के माध्यम से श्वास को संतुलित कर शरीर, मन, आत्मा और विचारों पर भी संतुलन रखा जा सकता है। योगी कुडु ने कहा कि प्राणायाम की यह विधा भारत के ऋषियों की ही देन है और उन्होंने भारत से ही इसे ग्रहण किया है।
स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि ने कहा कि प्राणायाम भारत के ऋषि-मुनियों व साधकों की देन है। कहा कि प्राण वह शक्ति है जो हमारे शरीर को जीवित रखती है। प्राणों का नियमित व साधनायुक्त आयाम ही प्राणायाम है, जिसके द्वारा मनुष्य सिद्धियां प्राप्त करने के साथ ही अपने शरीर ही नहीं बल्कि मन, मस्तिष्क और आत्मा पर भी संतुलन प्राप्त कर सकता है। प्राणायाम के माध्यम से ही मनुष्य तनाव से मुक्त जीवन जी सकता है। इस अवसर पर सभी ने गंगातट पर रुद्राक्ष के पौधों के साथ हरित विश्व निर्माण का संकल्प लिया।
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श्वास संतुलित कर बनेगा शरीर, मन, आत्मा का संतुलन
- फ्रांस के योगी कुडु ने किया प्राणायाम की विधाओं का प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
मुनिकीरेती। परमार्थ निकेतन आश्रम पहुंचे फ्रांस के योगी कुडु ने आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि से भेंट की। इस दौरान योग व प्राणायाम के विषय पर विस्तृत चर्चा की गई। परमार्थ निकेतन में साधकों व गुरुकुल के ऋषिकुमारों के सामने योगी कुडु ने प्राणायाम की विभिन्न क्रियाओं का प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि प्राणायाम के माध्यम से श्वास को संतुलित कर शरीर, मन, आत्मा और विचारों पर भी संतुलन रखा जा सकता है। योगी कुडु ने कहा कि प्राणायाम की यह विधा भारत के ऋषियों की ही देन है और उन्होंने भारत से ही इसे ग्रहण किया है।
स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि ने कहा कि प्राणायाम भारत के ऋषि-मुनियों व साधकों की देन है। कहा कि प्राण वह शक्ति है जो हमारे शरीर को जीवित रखती है। प्राणों का नियमित व साधनायुक्त आयाम ही प्राणायाम है, जिसके द्वारा मनुष्य सिद्धियां प्राप्त करने के साथ ही अपने शरीर ही नहीं बल्कि मन, मस्तिष्क और आत्मा पर भी संतुलन प्राप्त कर सकता है। प्राणायाम के माध्यम से ही मनुष्य तनाव से मुक्त जीवन जी सकता है। इस अवसर पर सभी ने गंगातट पर रुद्राक्ष के पौधों के साथ हरित विश्व निर्माण का संकल्प लिया।
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