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संत बोले, सीएम साहब खतरे में संत समाज
Updated Tue, 26 Sep 2017 10:39 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
श्री पंचायती बड़ा अखाड़ा उदासीन के सभागार में सीएम के सामने महंत मोहनदास के गायब होने के मसले पर संत समाज उद्वेलित दिखा। बारी- बारी से संत बोले कि सीएम साहब संत समाज खतरे में है। अब तो दिन ढलने के बाद अखाड़े-आश्रम से बाहर निकलने में भी भय महसूस होता है। हम घर-परिवार छोड़कर सन्यासी बने हैं, सरकार को सुरक्षा के लिए प्रयास करने चाहिए। संतों ने कहा कि हरिद्वार में अब तक दस से ज्यादा संत घटनाओं का शिकार हो चुके हैं।
ग्यारह दिन बाद भी महंत मोहनदास का अता- पता न लगने पर मुख्यमंत्री जब अखाड़े में पहुंचे तो संत समाज का दर्द बाहर आ गया। महंत मोहनदास के अब तब नहीं मिलने पर परेशान दिखे संत बोले कि भला कोई उनका दुश्मन क्यों होगा। वे बेहद ही शालीन और सरल स्वभाव के थे।
स्वामी हरिचेतनानंद ने सीएम का ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि हरिद्वार में इससे पहले दस से ज्यादा संत घटनाओं का शिकार हुए हैं। इस बार संत को ढूंढ निकाला जाए। वे जहां हों, जिस स्थिति में हों, बस इस मसले का पटाक्षेप होना जरूरी है। स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी ने कहा कि महंत मोहनदास के गायब होने के बाद से संत भयभीत हैं। अखाड़े या अपनी परंपराओं का निर्वहन करने के लिए अंधेरे में निकलने में डर लगने लगा है। प्रदेश सरकार या तो संतों की सुरक्षा के बंदोबस्त करे या फिर सुरक्षा को लेकर विश्वास की अलख जगाए। बोले कि हर हाल में महंत मोहनदास का पता लगना जरूरी है। महंत देवानंद सरस्वती ने भी संतों के साथ पूर्व में हुई घटनाओं का मामला उठाया और सरकार से कार्रवाई की मांग की। संतों ने राज्य सरकार को संतों के भावनात्मक रूप से करीब वाली सरकार बताते हुए कहा कि इस सरकार से हमें काफी उम्मीदें हैं। कुछ संतों ने ग्यारह दिन बाद संतों के बीच आने पर नाराजगी दिखाने की भी बात कही, लेकिन सीएम ने यह कहकर कि कभी राष्ट्रपति के दौरे तो कभी किसी और वजह से वे संतों के बीच नहीं आ सके, लेकिन वे हर रोज इस मामले पर कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक से तथा पुलिस अधिकारियों से वार्ता कर रहे थे। अभी तक नहीं आ पाने पर उन्होंने क्षमा प्रार्थना भी की।
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इस दौरान भाजपा के प्रदेश महामंत्री नरेश बंसल, मेयर मनोज गर्ग, जिलाध्यक्ष डा. जयपाल सिंह चौहान, उपाध्यक्ष विकास तिवारी, नरेश शर्मा, संदीप गोयल, बिंदिया गोस्वामी, प्रमोद शर्मा, राकेश राजतपूत, मयंक शर्मा, डॉ. अश्विनी, भूपेंद्र कुमार, अनिल अरोड़ा, अनिरुद्घ भाटी, सुमित लखेड़ा, लक्की सचदेवा समेत बडी संख्या मं भाजपाई भी मोजूद रहे।
सीबीआई जांच की मांग से पीछे हटे संत
हरिद्वार। महंत मोहनदास की गुमशुदगी प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग कर रहे संतों ने सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के सामने इस मामले पर अपना रुख बदल लिया। पुलिस पर पूरा विश्वास जताते हुए इतना भी कहा कि महंत मोहनदास किस हाल में हैं उन्हें इतना पता चलना चाहिए। कल तक पुलिस और सरकार के खिलाफ आग उगल रहे संत मुख्यमंत्री के सामने अधिकारियों की शान में कसीदे पढ़ते नजर आए।
सीएम के संतों के बीच पहुंचने पर प्रदेश सरकार के प्रवक्ता शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि यदि संत चाहें तो सीबीआई जांच भी कराई जा सकती है। दो दिन पहले सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर संतों ने खुद ही मांग उठाई थी कि सीबीआई जांच कराई जाए। संतों की सरकार के प्रति नाराजगी को ही जब मुख्यमंत्री के सामने पहुंचाया गया था तो उन्होंने मंगलवार को हरिद्वार आने की बात कही थी। सभी को उम्मीद थी कि संत सीएम के सामने भी अपने तीखे तेवर दिखाएंगे लेकिन नजारा बदला हुआा था। स्वामी हरिचेतनानंद ने ये जरूर कहा कि जांच में हरिद्वार के ही एसएसपी को प्राथमिकता दी जाए। स्वामी कैलाशनंद सरस्वती ने सीबीआई जांच की जरूरत नहीं बताकर हरिद्वार पुलिस की जांच को ही उचित बताया। इसके विपरीत कुछ संत सीएम के अखाड़े में पहुंचने पर साधुवाद और धन्यवाद करते नजर आए। इस बीच यह चर्चा होती रही कि जो अधिकारी अभी जांच कर रहे हैं एसआईटी में भी तो उन्हीं अफसरों को रखा गया है सीएम के आने के बाद कुछ खास नहीं हुआ तो फिर संतों के सुर कैसे बदल गए।
पुलिस टीमें लौट रही वापस
दस दिन बाद भी कोठारी महंत मोहनदास को खोज निकालने में हरिद्वार पुलिस नाकामयाब रही है। हरिद्वार पुलिस की कई टीमें खाक छानकर धीरे- धीरे लौट रही है। मेरठ, दिल्ली, मुंबई, मथुरा वृंदावन, देहरादून से पुलिस टीमें मायूस होकर लौट रही है। एसटीएफ, सीआईयू का फोकस महाराज के फेसबुक एकाउंट, मोबाइल फोन एवं बैंकों के एटीएम पर है।
कहीं जेल में छिपे अपराधी तो जिम्मेदार नहीं
भाजपा के वरिष्ठ नेता अशोक त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री के सामने कहा कि इस बात पर भी जांच की जाए कि कहीं महंत मोहनदास की गुमशुदगी के पीछे जेलों में बंद वे अपराधी तो नहीं हैं जो सलाखों के पीछे से अपराध संचालित कर रहे हैं और हरिद्वार में करोड़ों की वसूली कर चुके हैं।
हरिद्वार।
श्री पंचायती बड़ा अखाड़ा उदासीन के सभागार में सीएम के सामने महंत मोहनदास के गायब होने के मसले पर संत समाज उद्वेलित दिखा। बारी- बारी से संत बोले कि सीएम साहब संत समाज खतरे में है। अब तो दिन ढलने के बाद अखाड़े-आश्रम से बाहर निकलने में भी भय महसूस होता है। हम घर-परिवार छोड़कर सन्यासी बने हैं, सरकार को सुरक्षा के लिए प्रयास करने चाहिए। संतों ने कहा कि हरिद्वार में अब तक दस से ज्यादा संत घटनाओं का शिकार हो चुके हैं।
ग्यारह दिन बाद भी महंत मोहनदास का अता- पता न लगने पर मुख्यमंत्री जब अखाड़े में पहुंचे तो संत समाज का दर्द बाहर आ गया। महंत मोहनदास के अब तब नहीं मिलने पर परेशान दिखे संत बोले कि भला कोई उनका दुश्मन क्यों होगा। वे बेहद ही शालीन और सरल स्वभाव के थे।
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स्वामी हरिचेतनानंद ने सीएम का ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि हरिद्वार में इससे पहले दस से ज्यादा संत घटनाओं का शिकार हुए हैं। इस बार संत को ढूंढ निकाला जाए। वे जहां हों, जिस स्थिति में हों, बस इस मसले का पटाक्षेप होना जरूरी है। स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी ने कहा कि महंत मोहनदास के गायब होने के बाद से संत भयभीत हैं। अखाड़े या अपनी परंपराओं का निर्वहन करने के लिए अंधेरे में निकलने में डर लगने लगा है। प्रदेश सरकार या तो संतों की सुरक्षा के बंदोबस्त करे या फिर सुरक्षा को लेकर विश्वास की अलख जगाए। बोले कि हर हाल में महंत मोहनदास का पता लगना जरूरी है। महंत देवानंद सरस्वती ने भी संतों के साथ पूर्व में हुई घटनाओं का मामला उठाया और सरकार से कार्रवाई की मांग की। संतों ने राज्य सरकार को संतों के भावनात्मक रूप से करीब वाली सरकार बताते हुए कहा कि इस सरकार से हमें काफी उम्मीदें हैं। कुछ संतों ने ग्यारह दिन बाद संतों के बीच आने पर नाराजगी दिखाने की भी बात कही, लेकिन सीएम ने यह कहकर कि कभी राष्ट्रपति के दौरे तो कभी किसी और वजह से वे संतों के बीच नहीं आ सके, लेकिन वे हर रोज इस मामले पर कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक से तथा पुलिस अधिकारियों से वार्ता कर रहे थे। अभी तक नहीं आ पाने पर उन्होंने क्षमा प्रार्थना भी की।
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इस दौरान भाजपा के प्रदेश महामंत्री नरेश बंसल, मेयर मनोज गर्ग, जिलाध्यक्ष डा. जयपाल सिंह चौहान, उपाध्यक्ष विकास तिवारी, नरेश शर्मा, संदीप गोयल, बिंदिया गोस्वामी, प्रमोद शर्मा, राकेश राजतपूत, मयंक शर्मा, डॉ. अश्विनी, भूपेंद्र कुमार, अनिल अरोड़ा, अनिरुद्घ भाटी, सुमित लखेड़ा, लक्की सचदेवा समेत बडी संख्या मं भाजपाई भी मोजूद रहे।
सीबीआई जांच की मांग से पीछे हटे संत
हरिद्वार। महंत मोहनदास की गुमशुदगी प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग कर रहे संतों ने सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के सामने इस मामले पर अपना रुख बदल लिया। पुलिस पर पूरा विश्वास जताते हुए इतना भी कहा कि महंत मोहनदास किस हाल में हैं उन्हें इतना पता चलना चाहिए। कल तक पुलिस और सरकार के खिलाफ आग उगल रहे संत मुख्यमंत्री के सामने अधिकारियों की शान में कसीदे पढ़ते नजर आए।
सीएम के संतों के बीच पहुंचने पर प्रदेश सरकार के प्रवक्ता शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि यदि संत चाहें तो सीबीआई जांच भी कराई जा सकती है। दो दिन पहले सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर संतों ने खुद ही मांग उठाई थी कि सीबीआई जांच कराई जाए। संतों की सरकार के प्रति नाराजगी को ही जब मुख्यमंत्री के सामने पहुंचाया गया था तो उन्होंने मंगलवार को हरिद्वार आने की बात कही थी। सभी को उम्मीद थी कि संत सीएम के सामने भी अपने तीखे तेवर दिखाएंगे लेकिन नजारा बदला हुआा था। स्वामी हरिचेतनानंद ने ये जरूर कहा कि जांच में हरिद्वार के ही एसएसपी को प्राथमिकता दी जाए। स्वामी कैलाशनंद सरस्वती ने सीबीआई जांच की जरूरत नहीं बताकर हरिद्वार पुलिस की जांच को ही उचित बताया। इसके विपरीत कुछ संत सीएम के अखाड़े में पहुंचने पर साधुवाद और धन्यवाद करते नजर आए। इस बीच यह चर्चा होती रही कि जो अधिकारी अभी जांच कर रहे हैं एसआईटी में भी तो उन्हीं अफसरों को रखा गया है सीएम के आने के बाद कुछ खास नहीं हुआ तो फिर संतों के सुर कैसे बदल गए।
पुलिस टीमें लौट रही वापस
दस दिन बाद भी कोठारी महंत मोहनदास को खोज निकालने में हरिद्वार पुलिस नाकामयाब रही है। हरिद्वार पुलिस की कई टीमें खाक छानकर धीरे- धीरे लौट रही है। मेरठ, दिल्ली, मुंबई, मथुरा वृंदावन, देहरादून से पुलिस टीमें मायूस होकर लौट रही है। एसटीएफ, सीआईयू का फोकस महाराज के फेसबुक एकाउंट, मोबाइल फोन एवं बैंकों के एटीएम पर है।
कहीं जेल में छिपे अपराधी तो जिम्मेदार नहीं
भाजपा के वरिष्ठ नेता अशोक त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री के सामने कहा कि इस बात पर भी जांच की जाए कि कहीं महंत मोहनदास की गुमशुदगी के पीछे जेलों में बंद वे अपराधी तो नहीं हैं जो सलाखों के पीछे से अपराध संचालित कर रहे हैं और हरिद्वार में करोड़ों की वसूली कर चुके हैं।