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फाइलों में दबकर रह गए ट्रैफिक मित्र

Thu, 31 Aug 2017 10:20 PM IST
Updated Thu, 31 Aug 2017 10:20 PM IST
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फाइलों में दबकर रह गए ट्रैफिक मित्र
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
ट्रैफिक सुधार के लिए बनाई गई योजना फाइलों में दबकर रह गई हैं। हरीश रावत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना पर अमल नहीं किया जा रहा है। पिछली सरकार ने ट्रैफिक कंट्रोल के लिए एनसीसी कैडेट और स्काउट के जरिये ट्रैफिक मित्र बनाने की योजना तैयार की थी।
धर्मनगरी में प्रतिवर्ष करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। साल के कुछ बड़े स्नानों के अलावा सावन और शिवरात्रि मेलों में भी भारी भीड़ जुटती है। इसके अलावा मई और जून में धर्मनगरी में सीमावर्ती इलाकों से लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। अधिकांश श्रद्धालु अपने वाहनों से ही यहां आते हैं। ऐसे में सड़कों में जाम की स्थिति रहती है।
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बीते वर्ष रावत सरकार ने जाम की स्थित पर सर्व कराया था। सारे रास्ते देखने के बाद पुलिस फोर्स की कमी महसूस हुई थी। जिस पर रावत सरकार ने ट्रैफिक मित्र रखने की योजना बनाई थी। इस योजना में स्काउट और एनसीसी की ट्रेनिंग करने वाले छात्रों को रखा जाना है। पांच माह के लिए इनकी नियुक्ति की जानी थी। सीजन की शुरुआत होते ही अप्रैल से अगस्त तक के लिए 1000 ट्रैफिक मित्रों को रखा जाना था। रावत सरकार की यह महत्वपूर्ण योजना फाइलों में दबकर रह गई है। इस योजना पर अमल किया होता तो शायद बीते माह लगने वाले जाम की समस्या कम हो सकती थी। एसएसपी कृष्ण कुमार वीके ने बताया कि स्काउट और एनसीसी के बच्चों से ट्रैफिक मित्र बनाकर काम लेना संभव नहीं है। सरकार की ओर से ट्रैफिक मित्र को लेकर कोई आदेश या पत्र नहीं मिला है।
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