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कैदियों के विरोध के आगे आईजी के आदेश धता
Updated Tue, 25 Jul 2017 11:42 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
मंगलवार से जेल में बंद कुख्यातों की मुलाकात नई व्यवस्था के तहत होनी थी, लेकिन मंगलवार को कुख्यातों से मुलाकात के लिए कोई आया ही नहीं।
आईजी जेल पीवीके प्रसाद के कैदियों से मुलाकात के नए नियम के विरोध में करीब एक हजार कैदी भूख हड़ताल पर चले गए थे। आईजी जेल की बात भी कैदियों ने अनसुनी कर दी थी। डीएम दीपक रावत के हस्तक्षेप के बाद एडीएम ललित नारायण मिश्रा खुद जेल गए थे और कैदियों को उनकी मांग से शासन को अवगत कराने का आश्वासन देकर शांत किया था। तब चार बजे के बाद कैदियों ने भूख हड़ताल खत्म कर दी थी।
मंगलवार को नई व्यवस्था लागू करने का पहला दिन था, लेकिन दिन भर कैदियों की मुलाकात पुराने नियम के तहत होती रही। अलबत्ता जेल प्रशासन ने कुख्यातों और उनके गुर्गों को लेकर नई व्यवस्था के तहत ही मुलाकात कराने का फैसला लिया हुआ है। जेलर एसएम सिंह ने बताया कि कुख्यातों और उनके गुर्गों से मिलने कोई नहीं आया।
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ये है यहां कैद
हरिद्वार। हरिद्वार जेल में कुख्यात संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा और सुनील राठी गैंग के गुर्गे कैद हैं। जीवा के सगे भाई विक्की, निक्की, रितेश यहां कैद हैं। उनके अलावा राठी गैंग के विश्वास, सुनील तोमर, विक्की, विपिन जैन, पप्पू महकार, हरेंद्र भी यहां कैद हैं। इन पर कई संगीन वारदातों को अंजाम देने के आरोप हैं। पूर्व विधायक महेंद्र भाटी की हत्या के आरोप में कुख्यात पाल सिंह लक्कड़पाला भी यहां सजा काट रहा है।
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जेल मैनुअल में फिट नहीं होते नए नियम
हरिद्वार। आईजी जेल पीवीके प्रसाद ने अपने विवेक से भले ही नए नियम लागू कर दिए हों लेकिन जेल मैनुअल के लिहाज से नए नियम फिट नहीं होते हैं। लंबे समय से चली आ रही व्यवस्था का जिक्र जेल मैनुअल में भी है। यदि कोई नियम लागू होता है तो उसकी प्रक्रिया बेहद ही जटिल होती है। सोमवार को कैदी बेहद आक्रोशित थे। उनका आक्रोश कोई बड़े बवाल की शक्ल ले सकता था। कारण, वे संख्या बल में बेहद ही ज्यादा हैं और सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी हैं।
कैदियों में गुस्सा आईजी जेल के एकतरफा नए नियम लागू कर देने को लेकर था। क्योंकि, उस दायरे में अधिकांश वे कैदी आ रहे थे जिनका कोई बउ़ा आपराधिक इतिहास नहीं है। ऐसे में मुलाकात की कटौती उन्हें चोट पहुंचा सकती थी। मुलाकात की पुरानी व्यवस्था जेल मैनुअल के हिसाब से होती है, उसमें बदलाव करना आसान नहीं है। बकायदा शासन से पुरानी व्यवस्था को खत्म कर नई व्यवस्था की प्रक्रिया को फोलो करना होता है लेकिन आईजी जेल ने खुद ही नए नियम लागू कर दिए। जेलर एसएम सिंह भी इस बात को स्वीकारते हैं। बोलते हैं कि नई व्यवस्था लागू करने का कार्य शासन स्तर से होता है।