फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   आपदा प्रभावितों को टेंट, तिरपाल के लिए भी काटने पड़ेंगे

आपदा प्रभावितों को टेंट, तिरपाल के लिए भी काटने पड़ेंगे

Sun, 18 Jun 2017 09:43 PM IST
Updated Sun, 18 Jun 2017 09:43 PM IST
विज्ञापन
आपदा प्रभावितों को टेंट, तिरपाल के लिए भी काटने पड़ेंगे
मानसून सिर पर और तैयारियां सिफर
विज्ञापन

आपदा प्रबंधन विभाग टेंट, तिरपाल की खरीद के लिए अब तक टेंडर प्रक्रिया में ही उलझा
फोटो
प्रमोद सेमवाल
गोपेश्वर। मानसून आने वाला है और इसकी तैयारियां अभी सिफर हैं। स्थिति यह है कि चमोली जिला प्रशासन की ओर से टेंट और तिरपाल की खरीद के लिए अब तक टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है। चालू वित्तीय वर्ष में शासन से जिले को टेंट, तिरपाल, राहत और अन्य आपदा प्रबंधन की सामग्री के लिए मात्र 30 लाख का बजट मिला है। इतनी कम राशि के इस्तेमाल पर ही अभी प्रशासनिक अधिकारी मंथन कर रहे हैं। 22 जून को आपदा राहत-बचाव सामग्री की खरीद के लिए जिलास्तर पर टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी। चमोली जिले के 78 गांवों में 2653 आपदा प्रभावित परिवार हैं। इनमें 17 संवेदनशील और 20 अति संवेदनशील गांव हैं। वर्ष 2013 की आपदा के बाद से गणांई, मोल्टा, चमेली, त्यूला और छपाली ऐसे गांव हैं, जहां मकान बाहर से दिखने में तो सुरक्षित लगते हैं लेकिन अंदर जगह-जगह दीवारों में पड़ी दरारें मकानों की दयनीय स्थिति को बयां करते हैं। गणांई गांव के ठीक पीछे गदेरे से हो रहा भूस्खलन थोड़ी सी बारिश में भी खतरा बन जाता है।
आपदा प्रभावित पारेश्वरी देवी, छुम्मा देवी, महिपाल सिंह, देवेंद्र सिंह और कमल सिंह का कहना है कि भारी बारिश होने पर उन लोगों को अपने घर छोड़कर दूसरों के घरों में शरण लेनी पड़ रही है। वर्ष 2013 में जिलाधिकारी से टेंट और तिरपाल की मांग की गई, लेकिन तिरपाल आज तक उन्हें नहीं मिला। नारायणबगड़ क्षेत्र के आपदा प्रभावित दरवान सिंह, चेता देवी और कमला देवी का भी यही कहना है।
विज्ञापन

कोट
आपदा प्रभावित 78 गांवों के पुनर्वास के लिए भूमि चयन प्रक्रिया जारी है। बरसात से पहले ही प्रभावित परिवारों को टेंट, तिरपाल मुहैया करा दिए जाएंगे। जिले से लेकर शासन स्तर पर प्रभावित गांवों के विस्थापन की कार्रवाई चल रही है। - नंद किशोर जोशी, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी, चमोली
विज्ञापन
विज्ञापन

चमोली जिला आपदा प्रबंधन विभाग संविदा कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है। आपदा प्रबंधन विभाग में आपदा आने पर एक रस्सी तक उपलब्ध नहीं होती है। शासन स्तर पर कई बार आपदा प्रभावित गांवों के विस्थापन और पुनर्वास के लिए दबाव बनाया गया, लेकिन अब तक स्थिति जस की तस है। -राकेश खनेड़ा, अध्यक्ष, चमोली आपदा प्रभावित संघर्ष समिति।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed