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निजी डॉक्टरों का आंदोलन आज से
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ब्यूरो अमर उजाला, रुड़की
क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट (सीईए) की जगह उत्तराखंड हेल्थकेयर एस्टेब्लिशमेंट एक्ट लागू करने की मांग को लेकर लामबंद रुड़की चिकित्सक संघ ने 25 दिसंबर से शहर के सभी निजी अस्पतालों में मरीजों का इलाज बंद करने का निर्णय लिया है। जबकि, 22 दिसंबर से निजी चिकित्सकों और अस्पताल संचालकों का आंदोलन शुरू हो जाएगा।
शुक्रवार को रुड़की चिकित्सक संघ की अध्यक्ष डॉ. रेनू जैन और सचिव डॉ. संजीव ने एक रेस्टोरेंट में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सीईए के मानकों के कारण मरीजों का इलाज अधिक महंगा हो जाएगा। सीइए के नियम और मानक सख्त हैं। मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से इस संबंध में वार्ता हुई थी। इस विषय पर शुरू में उनका रवैया सकारात्मक रहा था। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत इसे संशोधित कर लागू करने का वादा किया था, लेकिन इसे अभी तक लागू नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि सीइए से इंस्पेक्टर राज बढ़ेगा। डॉ. अशंक ऐरन ने कहा कि सीइए में दस हजार रुपये से लेकर पांच लाख रुपये तक का अर्थदंड है और पुलिस की भूमिका को प्रमुखता दी गई है। उत्तर प्रदेश और बिहार ने भी सीइए के अनुपालन नहीं किया है। डॉ. विशाल घई ने कहा कि सरकार को डॉक्टर मिल नहीं रहे हैं और निजी अस्पतालों पर सारे मानक थोपे जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सरकारी अस्पतालों में मानक कोई मायने नहीं रखते। इस दौरान नगर और आसपास के सैकड़ों निजी चिकित्सक मौजूद थे।
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इस तरह करेंगे आंदोलन
22 दिसंबर को निजी चिकित्सक काली पट्टी बांधकर करेंगे विरोध
23 दिसंबर की शाम से ओपीडी में मरीजों को देखना कर देेंगे बंद
24 दिसंबर को मरीजों को डिस्चार्ज करना शुरू कर देंगे
25 दिसंबर से सभी निजी अस्पताल स्वेच्छा से इलाज बंद कर देंगे
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क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट (सीईए) की जगह उत्तराखंड हेल्थकेयर एस्टेब्लिशमेंट एक्ट लागू करने की मांग को लेकर लामबंद रुड़की चिकित्सक संघ ने 25 दिसंबर से शहर के सभी निजी अस्पतालों में मरीजों का इलाज बंद करने का निर्णय लिया है। जबकि, 22 दिसंबर से निजी चिकित्सकों और अस्पताल संचालकों का आंदोलन शुरू हो जाएगा।
शुक्रवार को रुड़की चिकित्सक संघ की अध्यक्ष डॉ. रेनू जैन और सचिव डॉ. संजीव ने एक रेस्टोरेंट में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सीईए के मानकों के कारण मरीजों का इलाज अधिक महंगा हो जाएगा। सीइए के नियम और मानक सख्त हैं। मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से इस संबंध में वार्ता हुई थी। इस विषय पर शुरू में उनका रवैया सकारात्मक रहा था। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत इसे संशोधित कर लागू करने का वादा किया था, लेकिन इसे अभी तक लागू नहीं किया गया।
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उन्होंने कहा कि सीइए से इंस्पेक्टर राज बढ़ेगा। डॉ. अशंक ऐरन ने कहा कि सीइए में दस हजार रुपये से लेकर पांच लाख रुपये तक का अर्थदंड है और पुलिस की भूमिका को प्रमुखता दी गई है। उत्तर प्रदेश और बिहार ने भी सीइए के अनुपालन नहीं किया है। डॉ. विशाल घई ने कहा कि सरकार को डॉक्टर मिल नहीं रहे हैं और निजी अस्पतालों पर सारे मानक थोपे जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सरकारी अस्पतालों में मानक कोई मायने नहीं रखते। इस दौरान नगर और आसपास के सैकड़ों निजी चिकित्सक मौजूद थे।
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इस तरह करेंगे आंदोलन
22 दिसंबर को निजी चिकित्सक काली पट्टी बांधकर करेंगे विरोध
23 दिसंबर की शाम से ओपीडी में मरीजों को देखना कर देेंगे बंद
24 दिसंबर को मरीजों को डिस्चार्ज करना शुरू कर देंगे
25 दिसंबर से सभी निजी अस्पताल स्वेच्छा से इलाज बंद कर देंगे