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कैंपा योजनाओं की मानीटरिंग करेगा भारतीय वन सर्वेक्षण, वन मंत्रालय की ओर से सौंपी गई जिम्मेदारी
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कैंपा की योजनाओं की निगरानी करेगा भारतीय वन सर्वेक्षण
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से कैंपा की योजनाओं के तहत देश के विभिन्न राज्याें में कराए जाने वाले वनीकरण की निगरानी अब भारतीय वन सर्वेक्षण करेगा। मंत्रालय की ओर से इस संबंध में सभी राज्यों को पत्र भी भेज दिया गया है। मंत्रालय की ओर से आदेश जारी होने के साथ ही भारतीय वन सर्वेक्षण की ओर से नीतियां बनानी भी शुरू कर दी हैं।
देश के तमाम राज्यों में केंद्र सरकार की ओर से संचालित विकास योजनाओं के तहत वन विभाग की जमीन का अधिग्रहण किए जाने और वनों के कटान के एवज में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से कंपेंसेटरी फॉरेस्टेशन फंड मैनेजमेंट एंड प्लानिंग अथारिटी (कैंपा) के जरिये योजना के तहत हर साल करोड़ों का बजट दिया जाता है। ताकि इस बजट से राज्य सरकारें व वन विभाग उतने पौधे लगा सकें, जितने वनों का कटान किया गया है, लेकिन तमाम राज्यों द्वारा वनीकरण के बजाय कैंपा योजना के तहत जारी किए गए बजट का इस्तेमाल अन्य मदों में कर दिया जाता है या कागजों में हेराफेरी कर बजट को ठिकाने लगा दिया जाता है। ऐसे में बजट का वास्तविक इस्तेमाल नहीं हो पाता है। परिणामस्वरूप देश में लक्ष्य के सापेक्ष वनीकरण नहीं हो पाता है। जिसका सीधा असर जलवायु परिवर्तन व कार्बन स्टाक समेत अन्य पर पड़ता है।
अब वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने कैंपा योजना की निगरानी व बजट के इस्तेमाल पर नजर रखनी शुरू कर दी है। कैंपा के तहत संचालित योजनाओं की निगरानी अब भारतीय वन सर्वेक्षण को सौंपी गई है। दूसरी ओर भारतीय वन सर्वेक्षण के उप महानिदेशक डॉ. प्रकाश लखचौरा का कहना है कि वनीकरण योजनाओं की मानीटरिंग की जा सके, इसके लिए एक तंत्र विकसित किया जाएगा जिसमें अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।
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उत्तराखंड को मिला है 2500 करोड़ का बजट
उत्तराखंड के कैंपा सीईओ समीर सिन्हा के मुताबिक केेंद्रीय वन, पर्यावरण जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने साल 2019-20 के लिए राज्य के लिए 2500 करोड़ के बजट का प्रावधान किया गया है। हालांकि अभी तक मंत्रालय की ओर से बजट का आवंटन नहीं किया गया है। उम्मीद है कि मंत्रालय की ओर से जल्द ही बजट का आवंटन किया जाएगा। बजट जारी होने के साथ ही तमाम प्रभागीय वनाधिकारियों को बजट का आवंटन किया जाएगा।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से कैंपा की योजनाओं के तहत देश के विभिन्न राज्याें में कराए जाने वाले वनीकरण की निगरानी अब भारतीय वन सर्वेक्षण करेगा। मंत्रालय की ओर से इस संबंध में सभी राज्यों को पत्र भी भेज दिया गया है। मंत्रालय की ओर से आदेश जारी होने के साथ ही भारतीय वन सर्वेक्षण की ओर से नीतियां बनानी भी शुरू कर दी हैं।
देश के तमाम राज्यों में केंद्र सरकार की ओर से संचालित विकास योजनाओं के तहत वन विभाग की जमीन का अधिग्रहण किए जाने और वनों के कटान के एवज में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से कंपेंसेटरी फॉरेस्टेशन फंड मैनेजमेंट एंड प्लानिंग अथारिटी (कैंपा) के जरिये योजना के तहत हर साल करोड़ों का बजट दिया जाता है। ताकि इस बजट से राज्य सरकारें व वन विभाग उतने पौधे लगा सकें, जितने वनों का कटान किया गया है, लेकिन तमाम राज्यों द्वारा वनीकरण के बजाय कैंपा योजना के तहत जारी किए गए बजट का इस्तेमाल अन्य मदों में कर दिया जाता है या कागजों में हेराफेरी कर बजट को ठिकाने लगा दिया जाता है। ऐसे में बजट का वास्तविक इस्तेमाल नहीं हो पाता है। परिणामस्वरूप देश में लक्ष्य के सापेक्ष वनीकरण नहीं हो पाता है। जिसका सीधा असर जलवायु परिवर्तन व कार्बन स्टाक समेत अन्य पर पड़ता है।
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अब वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने कैंपा योजना की निगरानी व बजट के इस्तेमाल पर नजर रखनी शुरू कर दी है। कैंपा के तहत संचालित योजनाओं की निगरानी अब भारतीय वन सर्वेक्षण को सौंपी गई है। दूसरी ओर भारतीय वन सर्वेक्षण के उप महानिदेशक डॉ. प्रकाश लखचौरा का कहना है कि वनीकरण योजनाओं की मानीटरिंग की जा सके, इसके लिए एक तंत्र विकसित किया जाएगा जिसमें अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।
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उत्तराखंड को मिला है 2500 करोड़ का बजट
उत्तराखंड के कैंपा सीईओ समीर सिन्हा के मुताबिक केेंद्रीय वन, पर्यावरण जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने साल 2019-20 के लिए राज्य के लिए 2500 करोड़ के बजट का प्रावधान किया गया है। हालांकि अभी तक मंत्रालय की ओर से बजट का आवंटन नहीं किया गया है। उम्मीद है कि मंत्रालय की ओर से जल्द ही बजट का आवंटन किया जाएगा। बजट जारी होने के साथ ही तमाम प्रभागीय वनाधिकारियों को बजट का आवंटन किया जाएगा।